शुक्रवार रात से शुरू हुई लगातार बारिश ने नेपाल के इलाम जिले में भूस्खलन को जन्म दिया, जहां अकेले इस जिले में 18 लोगों की मौत हो चुकी है। नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता कालिदास धौबाजी ने बताया कि कोशी प्रांत में 36 लोग भूस्खलन में बह गए, जबकि बाढ़ से दो अन्य की जान गई। इसके अलावा, लंगतांग ट्रेकिंग रूट पर चार ट्रेकर्स सहित 11 लोग लापता हैं। बागमती और मधेश प्रांतों में भी नदियां उफान पर हैं, जिससे जलभराव और बचाव कार्यों में बाधा आ रही है। नेपाल सरकार ने 17 जिलों में रेड अलर्ट जारी कर स्कूल, कार्यालय और एयरपोर्ट बंद करने के आदेश दिए हैं, साथ ही दो दिनों की सार्वजनिक छुट्टी घोषित की है।
इस विपदा की घड़ी में भारत ने नेपाल के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दुख व्यक्त करते हुए कहा, "नेपाल में भारी बारिश के कारण हुई जनहानि और व्यापक क्षति दुखद है। हम इस कठिन समय में नेपाल की जनता और सरकार के साथ खड़े हैं। एक मित्रवत पड़ोसी और प्रथम प्रतिक्रियादाता के रूप में, भारत हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
The loss of lives and damage caused by heavy rains in Nepal is distressing. We stand with the people and Government of Nepal in this difficult time. As a friendly neighbour and first responder, India remains committed to providing any assistance that may be required.
— Narendra Modi (@narendramodi) October 5, 2025
भारत सरकार राहत और बचाव कार्यों के लिए तत्परता से कदम उठा रही है, जिसमें आवश्यक सामग्री और सहायता टीमों की तैनाती शामिल है। पड़ोसी देश होने के नाते, भारत ने पहले भी ऐसी आपदाओं में नेपाल की मदद की है।
नेपाल के मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा जारी रह सकती है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस और स्थानीय प्रशासन बचाव कार्यों में जुटे हैं, लेकिन खराब मौसम के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी सहायता की अपील की गई है। यह घटना जलवायु परिवर्तन और तेजी से शहरीकरण के प्रभाव को रेखांकित करती है, जो नेपाल जैसे पर्वतीय देशों के लिए लगातार खतरा बन रहा है।