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| Photo: Press TV |
ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिकी और इज़रायली सैन्य अभियानों में तकनीकी सहायता प्रदान कर रही हैं, जिसके कारण इन्हें “वैध लक्ष्य” माना जा रहा है. IRGC ने कहा कि इन कंपनियों के दफ्तर, डेटा सेंटर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है.
इसके साथ ही ईरान ने इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे मिडिल ईस्ट में स्थित अपने दफ्तरों को खाली कर दें. यहां तक कि आसपास रहने वाले लोगों को भी एक किलोमीटर के दायरे से दूर रहने की सलाह दी गई है.
यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव चरम पर पहुंच चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में दोनों देशों के बीच हमले और जवाबी कार्रवाई तेज हुई है, जिससे पूरा क्षेत्र युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहली बार है जब किसी संघर्ष में बड़े पैमाने पर टेक कंपनियों को सीधे निशाना बनाने की बात कही गई है. इससे साफ है कि अब युद्ध केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल और आर्थिक ढांचे भी इसके दायरे में आ गए हैं.
ईरान की इस चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यदि इन कंपनियों पर हमले होते हैं तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की टेक्नोलॉजी और इंटरनेट सेवाओं पर भी पड़ सकता है.
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