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यह नियम सभी सरकारी और निजी संस्थानों पर लागू होगा. इसमें फैक्ट्री, दुकान, कंपनी और अन्य कामकाजी जगहें शामिल हैं. इसका मकसद यह है कि कोई भी व्यक्ति काम के कारण वोट देने से वंचित न रहे.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिहाड़ी मजदूरों को भी इस दिन का पूरा भुगतान मिलेगा, भले ही वे काम पर न जाएं. यानी रोज कमाने वाले मजदूर भी बिना नुकसान के वोट डाल सकेंगे.
नियोक्ताओं (मालिकों) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों को वोट देने के लिए छुट्टी दें. अगर कोई संस्था या मालिक इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
सरकार का मानना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर नागरिक का मतदान करना जरूरी है. इसलिए यह कदम उठाया गया है ताकि सभी लोग आसानी से और बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें.
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