भारत सरकार ने चुनाव के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग अपने वोट का इस्तेमाल कर सकें. अब मतदान के दिन कर्मचारियों को सवेतन अवकाश (Paid Holiday) दिया जाएगा, यानी उस दिन छुट्टी रहेगी और वेतन भी नहीं कटेगा.
यह नियम उन सभी राज्यों और क्षेत्रों में लागू होगा, जहां चुनाव या उपचुनाव हो रहे हैं. इनमें अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं, जहां मतदान कराया जाएगा. इन राज्यों में असम, केरल, पुदुच्चेरी, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल, वहीं केंद्र शासित प्रदेश में गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा शामिल है.
यह नियम सभी सरकारी और निजी संस्थानों पर लागू होगा. इसमें फैक्ट्री, दुकान, कंपनी और अन्य कामकाजी जगहें शामिल हैं. इसका मकसद यह है कि कोई भी व्यक्ति काम के कारण वोट देने से वंचित न रहे.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिहाड़ी मजदूरों को भी इस दिन का पूरा भुगतान मिलेगा, भले ही वे काम पर न जाएं. यानी रोज कमाने वाले मजदूर भी बिना नुकसान के वोट डाल सकेंगे.
नियोक्ताओं (मालिकों) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों को वोट देने के लिए छुट्टी दें. अगर कोई संस्था या मालिक इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
सरकार का मानना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर नागरिक का मतदान करना जरूरी है. इसलिए यह कदम उठाया गया है ताकि सभी लोग आसानी से और बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें.
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यह नियम सभी सरकारी और निजी संस्थानों पर लागू होगा. इसमें फैक्ट्री, दुकान, कंपनी और अन्य कामकाजी जगहें शामिल हैं. इसका मकसद यह है कि कोई भी व्यक्ति काम के कारण वोट देने से वंचित न रहे.
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिहाड़ी मजदूरों को भी इस दिन का पूरा भुगतान मिलेगा, भले ही वे काम पर न जाएं. यानी रोज कमाने वाले मजदूर भी बिना नुकसान के वोट डाल सकेंगे.
नियोक्ताओं (मालिकों) को निर्देश दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों को वोट देने के लिए छुट्टी दें. अगर कोई संस्था या मालिक इस नियम का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
सरकार का मानना है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर नागरिक का मतदान करना जरूरी है. इसलिए यह कदम उठाया गया है ताकि सभी लोग आसानी से और बिना किसी दबाव के अपने मताधिकार का उपयोग कर सकें.
