रेलवे में बड़ा बदलाव: अब ट्रैक पर लगेंगे आधुनिक कॉम्पोजिट स्लीपर

भारतीय रेलवे अब पुराने लकड़ी और स्टील स्लीपर की जगह आधुनिक कॉम्पोजिट स्लीपर लगाने की तैयारी कर रहा है. ये स्लीपर नई तकनीक से बनाए जाते हैं और ज्यादा मजबूत व टिकाऊ होते हैं. 

नई दिल्ली में  9 अप्रैल 2026 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता वाली समीक्षा बैठक में यह फैसला लिया गया.

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फोटो क्रेडिट- PIB

क्या होते हैं कॉम्पोजिट स्लीपर?

कॉम्पोजिट स्लीपर ऐसे स्लीपर होते हैं जो अलग-अलग मटेरियल (जैसे प्लास्टिक, फाइबर आदि) को मिलाकर बनाए जाते हैं. ये पारंपरिक लकड़ी या कंक्रीट स्लीपर से बेहतर माने जाते हैं.

रेलवे इन्हें क्यों ला रहा है?

रेलवे इन नए स्लीपर का इस्तेमाल इसलिए बढ़ा रहा है क्योंकि ये ज्यादा लंबे समय तक चलते हैं और जल्दी खराब नहीं होते हैं. इसपर मौसम का असर कम पड़ता है. रखरखाव (maintenance) में लागत भी कम लगता है. यानी रेलवे का खर्च भी कम होगा.

पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद

कॉम्पोजिट स्लीपर में अक्सर recycled material का उपयोग होता है जिससे पेड़ों की कटाई कम होगी. इससे पर्यावरण को फायदा मिलेगा. 

कहां होंगे इस्तेमाल?

रेलवे इन स्लीपर को खासकर ब्रिज (पुल) वाले ट्रैक व मुश्किल और संवेदनशील जगहों पर लगाने की योजना बना रहा है. 

क्या होगा इसका असर?

  • ट्रैक ज्यादा मजबूत होंगे
  • ट्रेन संचालन सुरक्षित होगा
  • रखरखाव (maintenance) कम होगा
  • रेलवे को लंबे समय में फायदा मिलेगा

निष्कर्ष

भारतीय रेलवे का यह कदम तकनीक और पर्यावरण दोनों के लिहाज से बड़ा बदलाव है. कॉम्पोजिट स्लीपर के इस्तेमाल से रेलवे नेटवर्क और ज्यादा मजबूत और आधुनिक बनेगा.



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