लेबनान में इजरायली हमलों में 31 लोगों की मौत, ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया

मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। मंगलवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायल द्वारा किए गए बड़े पैमाने के हवाई हमलों में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे पूरे क्षेत्र में हालात और अधिक संवेदनशील हो गए हैं।
लेबनान में इजरायली हमले के बाद की तस्वीर
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली सेना ने दक्षिणी और पूर्वी लेबनान के कई इलाकों में लगातार एयर स्ट्राइक कीं। नबातियेह (Nabatieh), टायर (Tyre) और बेका घाटी (Bekaa Valley) के कई शहरों और गांवों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इजरायली सेना ने दर्जनों इलाकों के लिए नए विस्थापन आदेश भी जारी किए हैं, जिसके बाद हजारों लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल ने सोमवार को लेबनान में 120 से ज्यादा हवाई हमले किए। इनमें कई रिहायशी इलाके, सड़कें और कथित हिज्बुल्लाह ठिकाने शामिल थे। कुछ हमलों में नागरिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।

इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा है कि इजरायली सेना “सुरक्षा क्षेत्र” से आगे तक अपनी जमीनी कार्रवाई बढ़ा रही है। इजरायल का दावा है कि ये अभियान हिज्बुल्लाह के हमलों को रोकने के लिए चलाए जा रहे हैं। दूसरी ओर हिज्बुल्लाह ने भी इजरायली ठिकानों पर ड्रोन और रॉकेट हमलों का दावा किया है।

इसी दौरान ईरान और अमेरिका के बीच जारी कूटनीतिक वार्ता पर भी संकट गहराता दिखाई दे रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के Hormozgan प्रांत में सैन्य हमले कर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन किया है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को “गंभीर उकसावा” बताया और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

अमेरिका की ओर से कहा गया है कि ये हमले “self-defense strikes” थे और इन्हें Strait of Hormuz के पास संभावित खतरों को रोकने के लिए अंजाम दिया गया। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरानी मिसाइल साइट्स और बारूदी सुरंग बिछाने वाली नौकाओं को निशाना बनाया गया।

विश्लेषकों का कहना है कि लेबनान में बढ़ती हिंसा और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है। अप्रैल में लागू हुआ संघर्षविराम अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है।

संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। तेल बाजार पर भी इस संकट का असर दिखने लगा है और वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

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