“जल महोत्सव 2026” में राष्ट्रपति का संदेश—जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित “जल महोत्सव 2026” में भाग लिया और देश में जल संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जल केवल एक मूलभूत आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, आजीविका और सामुदायिक जीवन का आधार है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इसे देखते हुए सरकार द्वारा शुरू किए गए “जल जीवन मिशन” ने घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने यह भी कहा कि जल संसाधनों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की सामूहिक भागीदारी से ही इसे प्रभावी और स्थायी बनाया जा सकता है। इसी क्रम में “कैच द रेन” और “जल संचय जन भागीदारी” जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण को समय की आवश्यकता बताया।

राष्ट्रपति ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि जल परीक्षण, संचालन और रखरखाव जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी महिलाओं के सशक्तिकरण और समुदाय विकास में सहायक हो रही है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बहुआयामी और समन्वित प्रयास जरूरी हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल को एक “अमूल्य धरोहर” की तरह संरक्षित करना होगा।

राष्ट्रपति ने स्पष्ट कहा कि जल संरक्षण को केवल नीति नहीं, बल्कि “जीवन शैली” बनाना होगा ताकि देश की जल सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें HWB News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट एचडब्ल्यूबी न्यूज़ पर पढ़ें शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, राजनीतिक व सामाजिक मुद्दों से जुड़ी देश- विदेश की ख़बरें।

For more related stories, follow HWB News.


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ