मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर अहम बातचीत चल रही है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि ये हमले “self-defense strikes” थे और अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा के लिए किए गए।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, हमलों में उन नौकाओं और मिसाइल लॉन्च साइट्स को निशाना बनाया गया जो कथित तौर पर Hormuz Strait में बारूदी सुरंगें बिछाने और अमेरिकी विमानों को निशाना बनाने की तैयारी कर रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Bandar Abbas के पास कई जोरदार विस्फोट सुनाई दिए।
इसी बीच कतर में ईरानी अधिकारियों और मध्यस्थ देशों के बीच बातचीत जारी रही। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो “दूसरे विकल्प” भी खुले हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता का मुख्य मुद्दा Strait of Hormuz को फिर से पूरी तरह खोलना है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक माना जाता है। हाल के महीनों में संघर्ष बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि समझौते पर “काफी प्रगति” हुई है, लेकिन अभी अंतिम सहमति बाकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते की शर्तें नहीं मानता है तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी ड्रोन को भी निशाना बनाया और अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को और मजबूत किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और निवेशकों की नजर अब दोहा में चल रही वार्ता पर टिकी हुई है।
हालांकि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से बातचीत जारी रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन ताजा अमेरिकी हमलों ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मध्य पूर्व में तनाव कम होगा या संघर्ष और गहरा जाएगा।
इसी बीच कतर में ईरानी अधिकारियों और मध्यस्थ देशों के बीच बातचीत जारी रही। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन यदि वार्ता विफल होती है तो “दूसरे विकल्प” भी खुले हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता का मुख्य मुद्दा Strait of Hormuz को फिर से पूरी तरह खोलना है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति लाइनों में से एक माना जाता है। हाल के महीनों में संघर्ष बढ़ने के बाद यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी संकेत दिया है कि समझौते पर “काफी प्रगति” हुई है, लेकिन अभी अंतिम सहमति बाकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान समझौते की शर्तें नहीं मानता है तो अमेरिका और कड़ी कार्रवाई कर सकता है।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने में सक्षम है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी ड्रोन को भी निशाना बनाया और अपनी एयर डिफेंस प्रणाली को और मजबूत किया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष अब सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर पूरे मध्य पूर्व और वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है। तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और निवेशकों की नजर अब दोहा में चल रही वार्ता पर टिकी हुई है।
हालांकि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से बातचीत जारी रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन ताजा अमेरिकी हमलों ने यह साफ कर दिया है कि क्षेत्र में हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मध्य पूर्व में तनाव कम होगा या संघर्ष और गहरा जाएगा।