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द्वारका के पास ट्रैप लगाकर दबोचे गए बदमाश
दिल्ली में बढ़ते संगठित अपराध और जबरन वसूली के मामलों को देखते हुए स्पेशल कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) एच.जी.एस. धालीवाल (IPS) और डीसीपी हर्ष इंदोरा (IPS) के दिशा-निर्देशों में एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड (AGS) की एक विशेष टीम का गठन किया गया था। पुलिस टीम को खुफिया सूत्रों और तकनीकी निगरानी से पुख्ता जानकारी मिली कि कनाडा में बैठा गैंगस्टर लिपिन नेहरा एन्क्रिप्टेड 'सिग्नल' (Signal App) के जरिए भारत में अपने गुर्गों को हथियारों का एक बड़ा जखीरा ठिकाने लगाने का निर्देश दे रहा है।इस खुफिया इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली के द्वारका में ताजपुर के पास यूईआर-II (UER-II) पर एक रणनीतिक जाल बिछाया। तभी वहां एक टोयोटा हिल्क्स कार आती दिखाई दी, जिसे पुलिस टीम ने रोकने का प्रयास किया। पुलिस को सामने देखकर आरोपियों ने तेजी से भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी करके दोनों को मौके पर ही धर दबोचा। तलाशी के दौरान आरोपी रणदीप राठी उर्फ रिंकू के पास से एक अत्याधुनिक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस मिले, जबकि हितेश कुमार के पास से भी एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। जब पुलिस ने उनकी टोयोटा हिल्क्स गाड़ी की गहन तलाशी ली, तो गाड़ी के अंदर छिपाकर रखे गए बैग से चार और अत्याधुनिक पिस्तौल बरामद हुईं। पुलिस ने कुल छह अत्याधुनिक हथियार (चार 7.65 एमएम पिस्तौल और दो सिंगल-शॉट पिस्तौल) तथा आठ जिंदा कारतूस जब्त किए हैं। इस संबंध में आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर नंबर 177/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
कनाडा से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क, मेरठ से ली थी हथियारों की खेप
पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जेल में बंद अपराधियों और विदेशों में बैठे गैंगस्टर्स का यह नेटवर्क कितना खतरनाक रूप ले चुका है। पकड़े गए आरोपी हितेश कुमार ने खुलासा किया कि जब वह गुरुग्राम में रहकर बीएससी (B.Sc.) की पढ़ाई कर रहा था, तब वह लिपिन नेहरा के भाई सौरभ नेहरा के संपर्क में आया था। सौरभ ने ही उसकी बातचीत सिग्नल ऐप के जरिए कनाडा में बैठे लिपिन नेहरा से कराई थी। मार्च 2025 में लिपिन नेहरा के कहने पर ही हितेश और उसके साथियों ने पटौदी के एक बड़े कारोबारी रवि से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी और वहां फायरिंग की थी, जिसके बाद वह जेल भी गया था और जुलाई 2025 में जमानत पर बाहर आया था।जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा लिपिन नेहरा के संपर्क में आया। लिपिन नेहरा के निर्देश पर ही वह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना पहुंचा था, जहां बाइक सवार दो अज्ञात युवकों ने उसे हथियारों का यह जखीरा सौंपा था। इस खेप को हितेश गुरुग्राम लेकर आया, जहां लिपिन नेहरा ने उसे निर्देश दिया कि वह इन हथियारों को रणदीप राठी के माध्यम से 'लाला' नाम के एक कुख्यात अपराधी तक पहुंचाए, जो हाल ही में 7-8 साल जेल में काटकर बाहर आया है। हितेश ने यह भी माना कि वह इससे पहले भी कोशी, सरधना और मेरठ से अवैध हथियार लाकर पंजाब और राजस्थान के अपराधियों को सप्लाई कर चुका है।