गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग पर दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: 2 कुख्यात शूटर गिरफ्तार, हथियारों का जखीरा और टोयोटा हिल्क्स कार बरामद

नई दिल्ली: राजधानी में संगठित अपराध और जबरन वसूली (Extortion) के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड (AGS) ने मुस्तैदी दिखाते हुए कुख्यात गोल्डी बराड़ और लिपिन नेहरा गैंग के दो बेहद खतरनाक सक्रिय सदस्यों को दबोच लिया है। पकड़े गए आरोपियों की पहचान 36 वर्षीय रणदीप उर्फ रिंकू (निवासी झज्जर, हरियाणा) और 23 वर्षीय हितेश कुमार (निवासी रेवाड़ी, हरियाणा) के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे और इनकी लग्जरी टोयोटा हिल्क्स (Toyota Hilux) गाड़ी से भारी मात्रा में अत्याधुनिक अवैध हथियार बरामद किए हैं। इस बड़ी गिरफ्तारी के साथ ही दिल्ली पुलिस ने गैंगवार और जबरन वसूली की एक बहुत बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है।

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: गोल्डी बराड़-लिपिन नेहरा गैंग के 2 शूटर हथियार और लग्जरी कार के साथ गिरफ्तार

द्वारका के पास ट्रैप लगाकर दबोचे गए बदमाश

दिल्ली में बढ़ते संगठित अपराध और जबरन वसूली के मामलों को देखते हुए स्पेशल कमिश्नर (क्राइम ब्रांच) एच.जी.एस. धालीवाल (IPS) और डीसीपी हर्ष इंदोरा (IPS) के दिशा-निर्देशों में एंटी-गैंगस्टर स्क्वाड (AGS) की एक विशेष टीम का गठन किया गया था। पुलिस टीम को खुफिया सूत्रों और तकनीकी निगरानी से पुख्ता जानकारी मिली कि कनाडा में बैठा गैंगस्टर लिपिन नेहरा एन्क्रिप्टेड 'सिग्नल' (Signal App) के जरिए भारत में अपने गुर्गों को हथियारों का एक बड़ा जखीरा ठिकाने लगाने का निर्देश दे रहा है।

इस खुफिया इनपुट के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली के द्वारका में ताजपुर के पास यूईआर-II (UER-II) पर एक रणनीतिक जाल बिछाया। तभी वहां एक टोयोटा हिल्क्स कार आती दिखाई दी, जिसे पुलिस टीम ने रोकने का प्रयास किया। पुलिस को सामने देखकर आरोपियों ने तेजी से भागने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी करके दोनों को मौके पर ही धर दबोचा। तलाशी के दौरान आरोपी रणदीप राठी उर्फ रिंकू के पास से एक अत्याधुनिक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस मिले, जबकि हितेश कुमार के पास से भी एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। जब पुलिस ने उनकी टोयोटा हिल्क्स गाड़ी की गहन तलाशी ली, तो गाड़ी के अंदर छिपाकर रखे गए बैग से चार और अत्याधुनिक पिस्तौल बरामद हुईं। पुलिस ने कुल छह अत्याधुनिक हथियार (चार 7.65 एमएम पिस्तौल और दो सिंगल-शॉट पिस्तौल) तथा आठ जिंदा कारतूस जब्त किए हैं। इस संबंध में आर्म्स एक्ट के तहत एफआईआर नंबर 177/2026 दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कनाडा से ऑपरेट हो रहा था नेटवर्क, मेरठ से ली थी हथियारों की खेप

पुलिस की शुरुआती पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि जेल में बंद अपराधियों और विदेशों में बैठे गैंगस्टर्स का यह नेटवर्क कितना खतरनाक रूप ले चुका है। पकड़े गए आरोपी हितेश कुमार ने खुलासा किया कि जब वह गुरुग्राम में रहकर बीएससी (B.Sc.) की पढ़ाई कर रहा था, तब वह लिपिन नेहरा के भाई सौरभ नेहरा के संपर्क में आया था। सौरभ ने ही उसकी बातचीत सिग्नल ऐप के जरिए कनाडा में बैठे लिपिन नेहरा से कराई थी। मार्च 2025 में लिपिन नेहरा के कहने पर ही हितेश और उसके साथियों ने पटौदी के एक बड़े कारोबारी रवि से एक करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी थी और वहां फायरिंग की थी, जिसके बाद वह जेल भी गया था और जुलाई 2025 में जमानत पर बाहर आया था।

जेल से बाहर आने के बाद वह दोबारा लिपिन नेहरा के संपर्क में आया। लिपिन नेहरा के निर्देश पर ही वह उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के सरधना पहुंचा था, जहां बाइक सवार दो अज्ञात युवकों ने उसे हथियारों का यह जखीरा सौंपा था। इस खेप को हितेश गुरुग्राम लेकर आया, जहां लिपिन नेहरा ने उसे निर्देश दिया कि वह इन हथियारों को रणदीप राठी के माध्यम से 'लाला' नाम के एक कुख्यात अपराधी तक पहुंचाए, जो हाल ही में 7-8 साल जेल में काटकर बाहर आया है। हितेश ने यह भी माना कि वह इससे पहले भी कोशी, सरधना और मेरठ से अवैध हथियार लाकर पंजाब और राजस्थान के अपराधियों को सप्लाई कर चुका है।

आपसी रंजिश से अपराध की दुनिया में आया दूसरा आरोपी

वहीं दूसरे आरोपी रणदीप राठी उर्फ रिंकू की कहानी भी अपराध से जुड़ी है। रणदीप ने 12वीं तक पढ़ाई की थी लेकिन पढ़ाई में मन न लगने के कारण वह गांव में ही ट्रांसपोर्ट का काम करने लगा। इसी दौरान गांव के ही एक युवक मोनू से उसका झगड़ा हो गया, जिस पर रणदीप और उसके साथियों ने जानलेवा हमला कर दिया था। इस मामले में वह झज्जर जेल में बंद रहा और अप्रैल 2026 में ही जमानत पर बाहर आया था। जेल से छूटने के बाद वह अपने गांव के एक शातिर अपराधी सुमित उर्फ लाला के संपर्क में आया, जिसने उसकी बात सिग्नल ऐप पर लिपिन नेहरा से कराई। जिस दिन पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया, उस दिन रणदीप और हितेश इन अवैध हथियारों को दिल्ली के ताजपुर में लाला और उसके साथियों को सौंपने जा रहे थे, ताकि किसी बड़ी वारदात या संभावित गैंगवार को अंजाम दिया जा सके, जिसे दिल्ली पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दिया।

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