JK Statehood Movement: केंद्र के वादे पर उमर अब्दुल्ला का पलटवार; जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने 20 जुलाई को दिल्ली कूच करेगी नेशनल कॉन्फ्रेंस

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर भारी गरमाहट देखने को मिल रही है। केंद्र शासित प्रदेश (UT) को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) बहाल कराने की मांग को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने देश की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी (BJP) पर तीखा हमला बोला है। सीएम उमर ने बीजेपी पर राज्य का दर्जा बहाल करने के वादे से मुकर जाने और 'बैक डोर पॉलिटिक्स' (पीछे के दरवाजे से राजनीति) करने का गंभीर आरोप लगाया है। इसके साथ ही उन्होंने एलान किया है कि राज्य के दर्जे की मांग को लेकर आगामी 20 जुलाई 2026 से देश की राजधानी नई दिल्ली में एक बड़े आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।

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जम्मू में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने केंद्र सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। आइए विस्तार से जानते हैं कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह नया प्लान क्या है और जम्मू-कश्मीर की सियासत में इसका क्या असर होने वाला है।

बीजेपी पर लगाया 'बैक डोर पॉलिटिक्स' का आरोप

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी देश भर में विपक्षी और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों को कमजोर करने की साजिश रच रही है ताकि किसी भी तरह सत्ता पर काबिज हुआ जा सके। उमर अब्दुल्ला ने देश के अन्य राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा, "बीजेपी ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे राज्यों में विपक्षी दलों को अस्थिर और कमजोर करने की लगातार कोशिशें की हैं। जहां बीजेपी को सीधे (सामने के) रास्ते से जनता का बहुमत नहीं मिलता, वहां वह पीछे के रास्ते (Back Door) से सत्ता हथियाने का प्रयास करती है।"

जम्मू-कश्मीर की वर्तमान राजनीतिक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं का यह दावा पूरी तरह खोखला है कि वे नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन की चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास नहीं कर रहे हैं।

"अगर राजभवन से ही सरकार चलानी थी, तो चुनाव क्यों कराए?"

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए जनता से पूछा कि अगर जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह से उपराज्यपाल (LG) और राजभवन के जरिए ही संचालित करना था, तो फिर यहां इतने बड़े स्तर पर विधानसभा चुनाव कराने का क्या औचित्य था?

उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने देश की संसद, सुप्रीम कोर्ट और स्वयं केंद्र सरकार (प्रधानमंत्री और गृहमंत्री) के उन आश्वासनों पर पूरा भरोसा किया था, जिसमें बार-बार कहा गया था कि विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद जम्मू-कश्मीर को 'उचित समय' पर पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दे दिया जाएगा। लेकिन चुनाव खत्म होने और सरकार बनने के लंबे समय बाद भी केंद्र अपने वादे को टाल रहा है, जिससे जम्मू-कश्मीर की जनता का लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सरकार के वादों पर से भरोसा कमजोर हो रहा है।

20 जुलाई से दिल्ली मार्च: आंदोलन का नया चरण

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। उन्होंने कहा, "हमने केंद्र सरकार को पर्याप्त समय दिया है। लगभग दो वर्षों तक बातचीत और संवाद के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की हर मुमकिन कोशिश की गई, लेकिन जब कोई ठोस नतीजा या समय सीमा सामने नहीं आई, तो पार्टी ने अब एक नई रणनीति के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है।"

इस रणनीति के तहत 20 जुलाई से देश की राजधानी दिल्ली में एक बड़े और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का आगाज किया जाएगा। उमर अब्दुल्ला ने भावुक अपील करते हुए कहा, "अगर हम अपने ही देश की राजधानी में जाकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी जायज मांग नहीं रखेंगे, तो फिर इंसाफ के लिए कहां जाएंगे? नेशनल कॉन्फ्रेंस केवल वही मांग कर रही है, जिसका वादा देश की संसद में केंद्र सरकार द्वारा किया गया था।"

उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी साधा निशाना, पूछे तीखे सवाल

इस जनसभा में जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुए और नई लोकतांत्रिक सरकार के गठन की दिशा में आगे बढ़े 18 महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र का रवैया ढुलमुल बना हुआ है।

चौधरी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रही है, जबकि बीजेपी लगातार नए-नए बहाने बनाकर मुख्य मुद्दे से ध्यान भटका रही है। उन्होंने मांग की कि बीजेपी नेतृत्व को जम्मू-कश्मीर के लोगों के सामने यह साफ करना चाहिए कि राज्य का दर्जा कब तक बहाल किया जाएगा और इसमें इतनी देरी क्यों की जा रही है?

क्या रंग लाएगी नेशनल कॉन्फ्रेंस की नई रणनीति?

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित किए जाने के बाद से ही 'स्टेटहुड' यहां का सबसे बड़ा और संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है। उमर अब्दुल्ला द्वारा 20 जुलाई से दिल्ली में आंदोलन करने की घोषणा ने राष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। चूंकि संसद का सत्र भी इसी दौरान संभावित रहता है, ऐसे में दिल्ली की सड़कों पर जम्मू-कश्मीर की आवाज गूंजना केंद्र सरकार के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन सकता है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली में होने वाले इस बड़े प्रदर्शन के बाद केंद्र सरकार का क्या रुख रहता है।

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