केंद्रीय मंत्रीमंडल ने 'कोलसेतु' विंडो को दी मंजूरी

कैबिनेट ने ‘कोलसेतु’ नीति को मंजूरी दी, अब इंडस्ट्री को मिलेगी दीर्घकालिक कोयला लिंकेज की सुविधा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने आज कोयला क्षेत्र में बड़ा सुधार करते हुए ‘कोलसेतु’ नामक नई विंडो वाली कोयला लिंकेज नीलामी नीति को मंजूरी दे दी। यह कदम कोयले के निर्बाध, कुशल और पारदर्शी उपयोग को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण फैसला है।

क्या है नई ‘कोलसेतु’ विंडो?

सरकार ने 2016 की एनआरएस (Non-Regulated Sector) लिंकेज नीति में संशोधन करते हुए इस नई विंडो को शामिल किया है। अब कोई भी घरेलू उद्योग नीलामी में भाग लेकर दीर्घकालिक कोयला लिंकेज प्राप्त कर सकेगा। हालांकि, इस विंडो में कोकिंग कोल उपलब्ध नहीं होगा और ट्रेडर्स को भागीदारी की अनुमति नहीं होगी।

क्यों जरूरी थी नई नीति?

  • बदलते मार्केट डायनामिक्स को देखते हुए कोयला आपूर्ति को लचीला बनाना
  • ‘Ease of Doing Business’ को बढ़ावा देना
  • घरेलू कोयले के उपयोग को तेज़ करना
  • आयातित कोयले पर निर्भरता कम करना
  • अंतिम-उपयोग प्रतिबंध हटाकर उद्योगों को अधिक स्वतंत्रता देना

उपयोग व निर्यात की सुविधा

नई विंडो के तहत प्राप्त कोयला स्व-उपयोग, वॉशिंग, निर्यात सहित अन्य वैध उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। लिंकेज धारक अपनी मात्रा का 50% तक कोयला निर्यात करने के पात्र होंगे। साथ ही समूह कंपनियों के भीतर भी कोयले का लचीला उपयोग संभव होगा।

वॉशरी ऑपरेटरों को लाभ

धुले हुए कोयले की बढ़ती मांग को देखते हुए वॉशरी ऑपरेटरों को भी लिंकेज मिलेगा। इससे देश में वॉश्ड कोल की उपलब्धता बढ़ेगी और आयात में कमी आएगी। वॉश्ड कोल का निर्यात भी संभव है, जिससे विदेशी बाज़ार से बेहतर प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद है।

‘कोलसेतु’ नीति कोयला सेक्टर में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।


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