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ओवैसी ने क्या कहा?
ओवैसी ने भारतीय संविधान की बहुलता और समावेशी सोच का हवाला देते हुए कहा कि:- भारत का संविधान सभी नागरिकों को समान अवसर देता है.
- कोई भी व्यक्ति, चाहे वह महिला हो, हिजाब पहने या न पहने, प्रधानमंत्री जैसे उच्च पद पर आसीन हो सकता है.
- उनकी 'ड्रीम' है कि भविष्य में एक हिजाब पहनने वाली बेटी प्रधानमंत्री बने.
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया बेहद तीखी रही है:बीजेपी और एनडीए की प्रतिक्रिया
- बीजेपी नेताओं ने इसे “जिम्मेदारीहीन” और मतभेद फैलाने वाला बयान बताया.
- बीजेपी नेता शेहज़ाद पूनावाला ने चुनौती दी कि ओवैसी पहले अपने ही संगठन में एक हिजाब-धारण महिला अध्यक्ष क्यों नहीं बनाते.
नितेश राणे का पलटवार
भाजपा नेता नितेश राणे ने भी साफ कहा कि इस तरह की संभावना 'कोई मौका' नहीं है.हिमंता बिस्वा सरमा की टिप्पणी
आसाम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि संविधान के अनुसार कोई भी भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है, लेकिन भारत हिंदू राष्ट्र है तो भारत का प्रधानमंत्री हिंदू ही रहेगा.AIMIM का बचाव
AIMIM के अन्य नेताओं ने ओवैसी के बयान का समर्थन किया और कहा कि उन्हें धमकियों से डर नहीं लगता.यह विवाद क्यों हो रहा है?
यह बयान उस समय आया है जब देश में धार्मिक पहचान, संवैधानिक अधिकार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस चल रही है.ओवैसी ने इसे संवैधानिक समानता और बहुलतावाद की विजय के रूप में पेश किया, जबकि विरोधियों ने इसे धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण का प्रयास बताया.
ओवैसी का बयान न सिर्फ संविधान और समानता के विषय को सामने ला रहा है, बल्कि राजनीतिक धुरों के बीच एक ताजा बहस को भी जन्म दे रहा है. आगामी चुनावों को देखते हुए यह विषय और अधिक गर्माता दिख रहा है.
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