राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को बिहार के राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं. इस दौरान उन्होंने छात्रों को संबोधित भी किया.
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि एक “सभ्यतागत वादे” की पुष्टि है—जिसमें ज्ञान, संवाद और मानवता की सेवा की भावना निहित है. उन्होंने छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह उनकी मेहनत, अनुशासन और बौद्धिक प्रतिबद्धता का परिणाम है.
राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि इस वर्ष स्नातक होने वाले छात्रों में आधे से अधिक 30 से ज्यादा देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, जो नालंदा विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को दर्शाता है.
उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लगभग आठ शताब्दियों तक ज्ञान का विश्व प्रसिद्ध केंद्र रहा। इसका पुनरुत्थान आज भारत और विश्व की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्राचीन नालंदा में विभिन्न विचारधाराओं का स्वागत किया जाता था और वाद-विवाद व संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता था. उन्होंने जोर दिया कि आज के समय में भी करुणा आधारित स्वतंत्र और आलोचनात्मक सोच की आवश्यकता पहले से अधिक है.
उन्होंने विश्वास जताया कि नालंदा विश्वविद्यालय भविष्य में एशिया और दुनिया का एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बनेगा. साथ ही, उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है और ऐसे संस्थान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि इस वर्ष स्नातक होने वाले छात्रों में आधे से अधिक 30 से ज्यादा देशों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र हैं, जो नालंदा विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को दर्शाता है.
उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह लगभग आठ शताब्दियों तक ज्ञान का विश्व प्रसिद्ध केंद्र रहा। इसका पुनरुत्थान आज भारत और विश्व की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है.
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि प्राचीन नालंदा में विभिन्न विचारधाराओं का स्वागत किया जाता था और वाद-विवाद व संवाद की संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता था. उन्होंने जोर दिया कि आज के समय में भी करुणा आधारित स्वतंत्र और आलोचनात्मक सोच की आवश्यकता पहले से अधिक है.
उन्होंने विश्वास जताया कि नालंदा विश्वविद्यालय भविष्य में एशिया और दुनिया का एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र बनेगा. साथ ही, उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है और ऐसे संस्थान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.