
इसके बाद FWICE ने रणवीर सिंह के खिलाफ 'नॉन-कोऑपरेशन डायरेक्टिव' जारी किया। इसका मतलब यह है कि फेडरेशन से जुड़े लगभग चार लाख सदस्य अब रणवीर सिंह या उनके प्रोजेक्ट्स के साथ काम नहीं करेंगे। हालांकि FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने साफ किया कि यह स्थायी प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत हो सके।
अशोक पंडित ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि फिल्म इंडस्ट्री भरोसे पर चलती है और किसी बड़े प्रोजेक्ट को आखिरी समय पर छोड़ना पूरी यूनिट को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि रणवीर सिंह को कई नोटिस भेजे गए लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।
इसी बीच अभिनेता मनोज बाजपेयी ने उम्मीद जताई कि यह विवाद जल्द सुलझ जाएगा। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को ऐसे मामलों का समाधान बातचीत से निकालना चाहिए। वहीं अभिनेता चंकी पांडे ने भी अपने पुराने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इंडस्ट्री में इस तरह के विवाद पहले भी होते रहे हैं।
फिल्ममेकर संजय गुप्ता ने FWICE के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी अभिनेता पर इस तरह का प्रतिबंध लगाने से पूरी इंडस्ट्री प्रभावित होती है और इससे उन सैकड़ों तकनीशियनों का काम भी रुक सकता है जो फिल्मों पर निर्भर रहते हैं।
सोशल मीडिया पर भी रणवीर सिंह के समर्थन में बड़ी संख्या में फैंस सामने आए हैं। कई यूजर्स ने FWICE के फैसले को “अत्यधिक” बताया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि बड़े सितारों को भी अपने कॉन्ट्रैक्ट और इंडस्ट्री के नियमों का सम्मान करना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि FWICE का यह निर्देश पूरी तरह कानूनी प्रतिबंध नहीं माना जाएगा, लेकिन इसका असर अभिनेता के भविष्य के प्रोजेक्ट्स पर पड़ सकता है। अगर मामला आगे बढ़ता है तो इसे अदालत में भी चुनौती दी जा सकती है।
फिलहाल रणवीर सिंह की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि इंडस्ट्री के कई लोग चाहते हैं कि बातचीत के जरिए इस मामले को जल्द खत्म किया जाए ताकि आने वाले बड़े प्रोजेक्ट्स प्रभावित न हों।