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| IRGC | Credit: Tehran Times |
इस बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी नए संघर्ष की स्थिति में ईरान के पास “और भी कई सरप्राइज” मौजूद हैं। उन्होंने अमेरिकी कांग्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि हालिया संघर्ष में अमेरिका को अपने दर्जनों विमान खोने पड़े, जिनमें F-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट भी शामिल हैं।
Months after initiation of war on Iran, US Congress acknowledges loss of dozens of aircraft worth billions.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) May 19, 2026
Our powerful Armed Forces are confirmed as 1st to strike down a touted F-35.
With lessons learned and knowledge we gained, return to war will feature many more surprises.
रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी को शुरू हुए 39 दिनों के संघर्ष के दौरान ईरान ने न केवल इजरायल के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी हमले किए। यह संघर्ष 8 अप्रैल को सीजफायर के बाद रोका गया था।
ईरान का कहना है कि अमेरिका की “अत्यधिक मांगें” शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा हैं। तेहरान के अनुसार, स्थायी शांति के लिए वॉशिंगटन को कुछ शर्तों को स्वीकार करना होगा।
दूसरी ओर, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को लेकर दिए गए बयानों को ईरान ने “खोखली धमकी” बताया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने हाल ही में संभावित सैन्य कार्रवाई को टालने की बात कही थी, जिसे कुछ खाड़ी देशों के अनुरोध से जोड़ा गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव फिर से बढ़ता है, तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार मार्गों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक मार्गों पर तनाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ईरान और उसके सहयोगी समूह संघर्ष बढ़ने की स्थिति में लाल सागर और बाब-अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर दबाव बना सकते हैं, जिससे वैश्विक नौवहन और व्यापार प्रभावित हो सकता है।
कुल मिलाकर, IRGC और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में किसी भी नई सैन्य कार्रवाई के परिणाम गंभीर और व्यापक हो सकते हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता को बढ़ा सकते हैं।

