
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि “समझौते के अधिकांश हिस्से पर सहमति बन चुकी है” और मध्य पूर्व के कई देशों के नेताओं के साथ उनकी बातचीत सकारात्मक रही है। वहीं ईरान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वार्ता आगे बढ़ रही है, हालांकि तेहरान ने अभी किसी अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं की है।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पाकिस्तान भी इस कूटनीतिक प्रयास में अहम भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir ने तेहरान में कई उच्चस्तरीय बैठकें कीं और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की कोशिश की।
हालांकि अमेरिका के भीतर इस संभावित समझौते को लेकर मतभेद भी सामने आ रहे हैं। कुछ रिपब्लिकन नेताओं और सुरक्षा विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अगर ईरान को ज्यादा रियायतें दी गईं तो इससे भविष्य में नए सुरक्षा खतरे पैदा हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर वैश्विक बाजार इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समझौता सफल होता है तो तेल बाजार में स्थिरता आ सकती है और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
फिलहाल दोनों देशों के बीच अंतिम सहमति और औपचारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो यह हाल के वर्षों में अमेरिका-ईरान संबंधों में सबसे बड़ा कूटनीतिक बदलाव साबित हो सकता है।