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इन क्षेत्रों से गुजर रही है मानसून की उत्तरी सीमा
मौसम विभाग द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा (Northern Limit of Monsoon) इस समय देश के कई महत्वपूर्ण भौगोलिक और शहरी क्षेत्रों को छू रही है। वर्तमान में यह सीमा समुद्री और मैदानी इलाकों से होते हुए 18°N/60°E, 18°N/65°E, 18°N/70°E के साथ-साथ महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्र हरनाई और सोलापुर से गुजर रही है।इसके आगे बढ़ते हुए यह रेखा तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद और भद्राचलम को कवर कर चुकी है। पूर्वी भारत की बात करें तो मानसून की यह उत्तरी सीमा ओडिशा के कोरापुट और फूलबनी, झारखंड की राजधानी रांची, और बिहार के जमुई व मुजफ्फरपुर से होकर गुजर रही है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस सीमा पर मानसूनी हवाएं काफी मजबूत हैं, जो आने वाले दिनों में उत्तर और मध्य भारत की तरफ बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अगले 4-5 दिनों में इन राज्यों में बढ़ेगा मानसून का दायरा
मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आगामी 4-5 दिनों के दौरान मानसूनी हवाओं की सक्रियता में और अधिक तेजी आएगी। खाड़ी से उठने वाली नम हवाएं इस प्रणाली को और अधिक मजबूती दे रही हैं। आईएमडी के अनुसार, इस समयावधि के भीतर तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए कई विस्तृत हिस्सों में मानसून अपने पैर पसार लेगा।इसके साथ ही, मध्य भारत के प्रमुख राज्य छत्तीसगढ़ के भी कुछ नए इलाकों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम प्रणाली पूरी तरह से मददगार साबित हो रही है। छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए यह खबर बेहद राहत भरी है, क्योंकि वहां के कई हिस्सों में पानी की कमी के कारण फसलों की तैयारी प्रभावित हो रही थी। इन राज्यों में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने के साथ ही भारी बारिश का दौर शुरू होने की संभावना जताई गई है।
कृषि और आम जनजीवन पर पड़ेगा सकारात्मक असर
भारत में मानसून को देश की आर्थिक रीढ़ माना जाता है, क्योंकि देश का एक बड़ा कृषि क्षेत्र सिंचाई के लिए पूरी तरह से मानसूनी बारिश पर ही निर्भर करता है। इस समय देश के अधिकांश हिस्सों में खरीफ फसलों, विशेषकर धान, मक्का, बाजरा और दलहन की बुआई की तैयारियां चल रही हैं या कुछ जगहों पर यह शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में समय पर मानसून का आगे बढ़ना और समय पर बारिश होना फसलों की अच्छी पैदावार के लिए संजीवनी का काम करेगा।मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में जैसे ही मानसून इन राज्यों के नए क्षेत्रों में प्रवेश करेगा, वैसे ही प्री-मानसून और मुख्य मानसूनी बारिश की गतिविधियों में भारी तेजी देखने को मिलेगी। इससे न केवल आम जनता को महीनों से सता रही उमस भरी गर्मी और ऊंचे तापमान से निजात मिलेगी, बल्कि भूजल स्तर में भी सुधार होगा, जो गर्मी के मौसम में काफी नीचे चला गया था।
मौसम विभाग ने इन राज्यों के प्रशासनिक अमले और आपदा प्रबंधन टीमों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है, ताकि मानसून की पहली भारी बारिश के दौरान जलभराव या अन्य स्थानीय समस्याओं से निपटा जा सके। कुल मिलाकर, अगले 4-5 दिन देश के मौसम के मिजाज को पूरी तरह से बदलने वाले साबित होंगे और जल्द ही देश का एक बड़ा हिस्सा मानसूनी फुहारों से सराबोर दिखाई देगा।