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| ट्रंप ने वर्साय के महल में अमेरिका-ईरान समझौते पर हस्ताक्षर किए | Source: X.com/@WhiteHouse |
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खुलेगा: 'Let the Oil Flow'
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की पुष्टि करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "Let the oil flow!" (तेल को बहने दो!)। इस समझौते की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक है 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोलना।युद्ध के दौरान ईरान ने दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग को ब्लॉक कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil Supply) की भारी किल्लत हो गई थी और ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। अब इस समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के टैंकर बिना किसी रोक-टोक के आ-जा सकेंगे, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
14 सूत्री समझौता (MOU): क्या हैं मुख्य शर्तें?
सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह समझौता एक 14-सूत्रीय मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के रूप में तैयार किया गया है। स्विट्जरलैंड में 19 जून को इस पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस समझौते की प्रमुख बातें निम्नलिखित हैं:स्थायी युद्धविराम: अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी (जिसमें लेबनान का मोर्चा भी शामिल है) सभी मोर्चों पर तत्काल प्रभाव से हमले बंद करेंगे।
जब्त फंड की वापसी: मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वार्ता शुरू होने से पहले अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए संपत्तियों में से लगभग 12 बिलियन डॉलर (कुल 24 बिलियन डॉलर में से) की राशि को रिलीज कर सकता है।
60 दिनों का नेगोशिएशन पीरियड: दोनों देश परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल टेस्ट और क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने के लिए अगले 60 दिनों तक तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करेंगे।
नेवल ब्लॉकेड का खात्मा: अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटा देगा, जिससे ईरान दोबारा तेल निर्यात कर सकेगा।
डोनाल्ड ट्रंप और मुजतबा खामेनेई के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत
इस समझौते को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी व्यक्तिगत और कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। अपने 80वें जन्मदिन के मौके पर ट्रंप ने इस डील को फाइनल कर दुनिया को चौंका दिया। दूसरी तरफ, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई के लिए भी यह एक राहत भरी खबर है, क्योंकि लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों और युद्ध की मार झेल रहे ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी थी।हालांकि, ईरानी मीडिया और सेना इस डील को अपनी "नैतिक और रणनीतिक जीत" के रूप में पेश कर रही है, वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की दिशा में पहला ठोस कदम है।
इजरायल की चिंताएं और समझौते की चुनौतियां
भले ही अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम हो गया हो, लेकिन मिडिल ईस्ट में शांति की राह अभी भी कांटों भरी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समझौते से पूरी तरह खुश नहीं हैं। इजरायल का मानना है कि इस समझौते में ईरान के परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) और उसके प्रॉक्सी नेटवर्क (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगाई गई है।विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल 60 दिनों का एक अस्थायी समझौता (MOU) है। असली चुनौती तब शुरू होगी जब परमाणु हथियारों को नष्ट करने और प्रतिबंधों को स्थायी रूप से हटाने पर मुख्य बातचीत होगी। यदि अगले 60 दिनों में दोनों देश किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे, तो यह शांति समझौता फिर से टूट सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह सीजफायर वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से भारत सहित दुनिया भर के बाजारों को बड़ी राहत मिलेगी। अब पूरी दुनिया की नजरें आगामी 19 जून को होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर और उसके बाद होने वाली कूटनीतिक वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
