बिहार के समस्तीपुर जिले से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जो सरकारी निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोलता है। जिले के बिशनपुर सोनसा स्थित 'उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय सोनसा बछौली' में इन दिनों एक नए भवन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें सुरक्षा मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह स्कूल 12वीं कक्षा तक का है जहाँ वर्तमान में सैकड़ों छात्र अपनी शिक्षा पूरी करने आते हैं। ऐसे में स्कूल परिसर के भीतर ही बन रही इस नई इमारत में बेहद घटिया दर्जे की निर्माण सामग्री का उपयोग किया जाना सीधे तौर पर इन मासूम बच्चों की जिंदगी को जोखिम में डालने जैसा है। स्थानीय लोगों को जब इस बात की भनक लगी तो उन्होंने मौके पर पहुँचकर इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद फिलहाल काम को रुकवा दिया गया है।

महज़ दो छड़ों के सहारे टिकाई जा रही है पिलर की नींव
सामने आए वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि स्कूल में साइंस लैब या अतिरिक्त कमरों के लिए जिस भवन का ढांचा तैयार किया जा रहा है, उसके पिलर निर्माण में बेहद गंभीर लापरवाही बरती जा रही है। किसी भी दो मंजिला या सामान्य पिलर को मजबूती देने के लिए कम से कम चार या उससे अधिक लोहे की मजबूत छड़ों (TMT Bars) का इस्तेमाल अनिवार्य होता है। लेकिन यहाँ ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत से महज़ दो पतली छड़ों के सहारे पिलर खड़े किए जा रहे हैं। वीडियो बना रहे स्थानीय युवाओं ने मौके पर जाकर इन पिलरों को दिखाया कि कैसे सिर्फ दो छड़ों पर कंक्रीट ढालने की तैयारी चल रही थी। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को आमंत्रण देने के लिए काफी है, क्योंकि भूकंप या तेज आंधी की स्थिति में ऐसी कमजोर संरचनाएं ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं।
घटिया ईंटों का इस्तेमाल, पटकते ही हो रहे टुकड़े-टुकड़े
लापरवाही सिर्फ पिलर की छड़ों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दीवार जोड़ने के लिए मंगवाई गई ईंटों की गुणवत्ता भी बेहद शर्मनाक है। वीडियो में एक स्थानीय नागरिक जमीन पर रखी ईंटों को उठाकर दिखाता है, जो एक बार हल्के से पटकने पर ही कबाड़ की तरह बिखर जाती हैं। ईंटों की गुणवत्ता इतनी खराब है कि वे ठीक से पकी भी नहीं हैं और उनमें मिट्टी का अंश साफ दिखाई दे रहा है। लोगों का आरोप है कि यहाँ नंबर तीन दर्जे की ईंटों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा था ताकि पैसों की मोटी बचत की जा सके। जब लोगों ने इस भ्रष्टाचार को कैमरे में कैद करना शुरू किया, तो वहां मौजूद मजदूर और काम की देखरेख करने वाले लोग बगले झांकने लगे। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश और कड़े विरोध के बाद आखिरकार निर्माण कार्य को बीच में ही ठप करना पड़ा।
सैकड़ों छात्रों के भविष्य और सुरक्षा पर गहरा संकट
उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय सोनसा बछौली एक प्रतिष्ठित स्थानीय स्कूल है जहाँ दूर-दराज के गांवों से आकर सैकड़ों छात्र अपनी पढ़ाई करते हैं। चूंकि यह स्कूल इंटरमीडिएट (12वीं) तक का है, इसलिए यहाँ हर वक्त बच्चों की भारी चहल-पहल रहती है। जानकारी के अनुसार, यह नया निर्माण स्कूल के छात्रों के लिए एक आधुनिक लैब बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा था। विडंबना देखिए कि जिस जगह को बच्चे अपने ज्ञान और प्रयोगों के लिए इस्तेमाल करने वाले थे, उसी की नींव को भ्रष्टाचार के दीमक ने खोखला कर दिया। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वे इस मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मजिस्ट्रेट से करेंगे ताकि दोषी ठेकेदार का टेंडर रद्द किया जा सके और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
बिहार में सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की खबरें अक्सर आती रहती हैं, लेकिन जब मामला बच्चों के स्कूल से जुड़ा हो तो यह बेहद संवेदनशील हो जाता है। समस्तीपुर की इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। देखना होगा कि इस वीडियो के वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग इस पर क्या संज्ञान लेता है और क्या बच्चों के लिए एक सुरक्षित और मजबूत भवन का निर्माण सुनिश्चित किया जाता है या नहीं।