मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) द्वारा लगाए गए मिसाइल हमले के आरोपों का कड़ा खंडन किया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने यूएई के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान की तरफ से यूएई की ओर मिसाइलें दागी गईं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर यूएई द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर गहरा दुख जताया है और इसे पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया है।
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| ईरान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई | File Image Source: Foreign Ministry, Islamic Republic of Iran |
अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों और क्षेत्रीय विश्वास के खिलाफ बताया
इरानी मीडिया के हवाले से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने जोर देकर कहा कि इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों (Good Neighborliness) के पूरी तरह खिलाफ है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब क्षेत्र के देश आपस में विश्वास बढ़ाने और शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, इस प्रकार के आरोप उन प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। ईरान का मानना है कि बिना किसी ठोस सबूत के ऐसे बयान जारी करने से खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल और अधिक गहरा सकता है।
फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन्स और तीसरे देशों की साजिश की ओर किया इशारा
अपने बयान में इस्माइल बक़ाई ने क्षेत्रीय स्थितियों की जटिलता को रेखांकित करते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ज़ायोनी शासन (इजराइल) की लगातार जारी गतिविधियों के कारण पूरे मध्य पूर्व की शांति और सुरक्षा खतरे में है। बक़ाई ने चेतावनी दी कि अतीत में भी कई बार 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन्स' (False Flag Operations) यानी दूसरों के नाम पर हमले कराकर साज़िश रचने की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने इशारा किया कि इस प्रकार के घटनाक्रम के पीछे किसी तीसरे पक्ष की चाल भी हो सकती है।
क्षेत्रीय देशों से बिना सबूत आरोप न लगाने की अपील
ईरानी प्रवक्ता ने मध्य पूर्व के सभी देशों से जिम्मेदारी से काम लेने का आह्वान किया। उन्होंने अपील की कि क्षेत्र में चल रही जटिलताओं और तनावपूर्ण माहौल को ध्यान में रखते हुए किसी भी देश को बिना किसी जांच या सबूत के ईरान पर आरोप लगाने से बचना चाहिए। ईरान ने स्पष्ट किया कि वह हमेशा क्षेत्र में स्थिरता और शांति का समर्थन करता आया है और इस तरह के निराधार दावों से क्षेत्रीय सुरक्षा वार्ता पर नकारात्मक असर पड़ता है।