यूएई विदेश मंत्रालय ने सीरिया के इडलिब में इज़रायली सैन्य हमलों की सख्त निंदा की

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सीरियाई अरब गणराज्य के इडलिब प्रांत में स्थित अबू अल-दुहुर सैन्य एयरबेस पर हुए इज़रायली हवाई हमलों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है। यूएई के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए सीरिया की संप्रभुता के किसी भी प्रकार के उल्लंघन को सिरे से खारिज किया है। यूएई सरकार ने स्पष्ट किया है कि सीरिया की सुरक्षा और स्थिरता को खतरे में डालने वाले कदम किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

UAE ने सीरिया के इडलिब एयरबेस पर इज़रायली हमलों की कड़ी निंदा की | MOFA बयान

अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और 1974 के समझौते का खुला उल्लंघन

यूएई के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस वक्तव्य में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि सीरियाई क्षेत्र पर इज़रायल द्वारा लगातार किए जा रहे हमले अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन हैं। विदेश मंत्रालय ने याद दिलाया कि ये हमले वर्ष 1974 में सीरिया और इज़रायल के बीच हुए डिसइंगेजमेंट समझौते (1974 Disengagement Agreement) की भावना के पूरी तरह खिलाफ हैं। यूएई ने इज़रायल को इस अंतर्राष्ट्रीय समझौते का सम्मान करने और इसके प्रावधानों का पालन करने की अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने की याद दिलाई है।

सीरियाई जनता के साथ एकजुटता और क्षेत्रीय स्थिरता का समर्थन

विदेश मंत्रालय ने सीरिया की स्थिरता, क्षेत्रीय अखंडता और शांति के प्रति संयुक्त अरब अमीरात के अटूट रुख को एक बार फिर दोहराया है। यूएई ने सीरियाई जनता के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता व्यक्त की है। मंत्रालय ने कहा कि यूएई उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो सीरियाई नागरिकों की सुरक्षा, शांति, गरिमा, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सर्वांगीण विकास की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में उठाए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तनाव रोकने और तुरंत हस्तक्षेप की अपील

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताते हुए संयुक्त अरब अमीरात ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल और निर्णायक कदम उठाने का आह्वान किया है। यूएई ने वैश्विक शक्तियों से अपील की है कि वे सीरियाई क्षेत्र पर बार-बार होने वाले सैन्य हमलों को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करें। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि इस प्रकार की सैन्य कार्रवाइयां क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती हैं, जिससे न केवल क्षेत्र की बल्कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा भी गंभीर रूप से खतरे में पड़ सकती है।

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