प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के प्राचीन लाटभैरव मंदिर परिसर में आयोजित एक पारंपरिक उत्सव का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में महिला डांसरों के प्रदर्शन के दौरान वर्दीधारी पुलिसकर्मियों को मंच के पास खड़े होकर मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करते और घूरते हुए दिखाया गया है। वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यशैली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे थे। हालांकि, वाराणसी पुलिस ने पूरे मामले पर संज्ञान लेते हुए आधिकारिक दावा किया है कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी, एडिटेड और AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से निर्मित) है, जिसे पुलिस की छवि धूमिल करने की साजिश के तहत फैलाया गया है।

इस वीडियो के सामने आते ही आलोचकों ने पुलिस के इस व्यवहार को अनैतिक और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान नृत्य प्रस्तुतियां सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही हैं और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
जांच के बाद पुलिस ने आधिकारिक तौर पर दावा किया कि जनता के किसी भी वास्तविक वीडियो में मंच पर या उसके आसपास पुलिसकर्मी उस रूप में तैनात नहीं दिख रहे थे, जैसा कि वायरल क्लिप में दिखाया गया है। इसके आधार पर वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही क्लिप फर्जी है और इसे डिजिटल रूप से तैयार (AI Generated) करके फैलाया गया है।
पुलिस का कहना है कि एआई का दुरुपयोग कर फेक न्यूज और दुष्प्रचार फैलाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। वीडियो को पहली बार अपलोड करने वाले तथा इसे शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बाबा लाटभैरव बारात उत्सव और उठे विवाद का पूरा घटनाक्रम
वाराणसी के काशी जोन स्थित लाटभैरव मंदिर में वार्षिक बाबा लाटभैरव बारात और पारंपरिक उत्सव का आयोजन किया गया था। वर्षों पुरानी परंपरा के तहत उत्सव के दौरान सांस्कृतिक और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियां आयोजित की गई थीं। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक क्लिप वायरल हुई जिसमें दावा किया गया कि सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी छोड़ महिला डांसरों का वीडियो बनाने और देखने में व्यस्त थे।इस वीडियो के सामने आते ही आलोचकों ने पुलिस के इस व्यवहार को अनैतिक और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, मंदिर समिति और स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि उत्सव के दौरान नृत्य प्रस्तुतियां सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रही हैं और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
पुलिस का दावा और जांच: पब्लिक के मोबाइल फुटेज में गायब दिखे पुलिसकर्मी
विवाद बढ़ता देख वाराणसी पुलिस और काशी जोन के पुलिस अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए। पुलिस टीम ने कार्यक्रम में मौजूद आम जनता द्वारा अपने मोबाइल फोन से बनाए गए वास्तविक वीडियो फुटेज को ज़ूम करके बारीकी से देखा और उनका तकनीकी विश्लेषण किया।#WATCH | Varanasi, Uttar Pradesh: DCP, Kashi Zone Gaurav Banswal says, "Two days ago, the world-famous Baraat of Lord Bhairav took place here. Videos from that event are being used for malicious propaganda; they show a large number of police personnel standing on the stage, but… pic.twitter.com/HOQ0wms5Mw
— ANI (@ANI) September 29, 2026
जांच के बाद पुलिस ने आधिकारिक तौर पर दावा किया कि जनता के किसी भी वास्तविक वीडियो में मंच पर या उसके आसपास पुलिसकर्मी उस रूप में तैनात नहीं दिख रहे थे, जैसा कि वायरल क्लिप में दिखाया गया है। इसके आधार पर वाराणसी पुलिस ने स्पष्ट कहा है कि सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही क्लिप फर्जी है और इसे डिजिटल रूप से तैयार (AI Generated) करके फैलाया गया है।
पुलिस की छवि धूमिल करने वालों पर शिकंजा, आदमपुर थाने में एफआईआर दर्ज
वाराणसी पुलिस प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचाने के मकसद से यह भ्रामक और AI-जनरेटेड वीडियो फैलाया गया है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आदमपुर थाने में संबंधित धाराओं और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है।पुलिस का कहना है कि एआई का दुरुपयोग कर फेक न्यूज और दुष्प्रचार फैलाने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। वीडियो को पहली बार अपलोड करने वाले तथा इसे शेयर करने वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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