पंजाब के धार्मिक और राजनीतिक माहौल में एक बार फिर बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। श्री आनंदपुर साहिब से जुड़े एक हालिया विवाद को लेकर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अमृतसर स्थित एसजीपीसी कार्यालय में हुई अंतरिम कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक के बाद एडवोकेट धामी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि पंजाब सरकार को इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पूरी फाइल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप देनी चाहिए। एसजीपीसी अध्यक्ष के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और पंथक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है।

श्री आनंदपुर साहिब मामले में एसजीपीसी की इस मांग के बाद अब गेंद पंजाब सरकार के पाले में है। देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले को सीबीआई को सौंपती है या फिर पंजाब पुलिस ही अपनी जांच जारी रखती है।

निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई ही एकमात्र विकल्प
एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने पंजाब पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि मामले की सच्चाई तभी सामने आ सकती है जब कोई स्वतंत्र एजेंसी इसकी जांच करे। उनका मानना है कि स्थानीय स्तर पर राजनीति और पक्षपात के कारण निष्पक्ष रिपोर्ट आना मुश्किल है। यही वजह है कि शिरोमणि कमेटी की ओर से आधिकारिक रूप से मांग रखी जा रही है कि राज्य सरकार बिना किसी देरी के मामले की फाइल सीबीआई को स्थानांतरित करे। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि एसजीपीसी का एक उच्चस्तरीय शिष्टमंडल अगले तीन दिनों के भीतर पंजाब के राज्यपाल से मुलाकात करेगा और इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपेगा।सोशल मीडिया पर जारी दुष्प्रचार और मीडिया ट्रायल पर नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एडवोकेट धामी ने इंटरनेट मीडिया पर चल रही अफवाहों और मीडिया ट्रायल पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब तक किसी मामले में अदालत या कानून का कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना बिल्कुल गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व और राजनीतिक विरोधी इस घटना की आड़ में एसजीपीसी और उसकी छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए झूठा प्रचार फैला रहे हैं। धामी ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा सोशल मीडिया पर बहस का विषय नहीं, बल्कि एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया और पुलिस जांच का विषय है।विरोध प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक मंशा पर उठाए सवाल
एसजीपीसी और उनके खिलाफ हो रहे धरने-प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए धामी ने सवाल उठाया कि इन विरोध प्रदर्शनों के पीछे कोई गहरी राजनीतिक साजिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी बात रखना चाहते हैं या विरोध जता रहे हैं, उनके लिए शिरोमणि कमेटी के दरवाजे हमेशा खुले हैं। वे कभी भी आकर सीधे संवाद कर सकते हैं और अपना पक्ष रख सकते हैं। लेकिन बातचीत का रास्ता छोड़कर माहौल खराब करने की कोशिश करना यह दर्शाता है कि इसके पीछे किसी का अपना हित छुपा हो सकता है।विभागीय जांच समिति और एसजीपीसी चुनाव की मांग
मामले की अंदरूनी तहकीकात के लिए एसजीपीसी ने भी अपने स्तर पर एक विशेष जांच कमेटी गठित की हुई है, जो विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और जल्द ही अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसके अलावा, एडवोकेट धामी ने पंजाब सरकार से शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव की प्रक्रिया को भी जल्द से जल्द पूरा कराने का आग्रह किया। उनका कहना था कि चुनाव होने से संस्था के निर्वाचित ढांचे को लेकर स्थितियां बिल्कुल साफ हो जाएंगी और सभी तरह की भ्रम की स्थितियां समाप्त होंगी।श्री आनंदपुर साहिब मामले में एसजीपीसी की इस मांग के बाद अब गेंद पंजाब सरकार के पाले में है। देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील मामले को सीबीआई को सौंपती है या फिर पंजाब पुलिस ही अपनी जांच जारी रखती है।
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