
जंतर-मंतर पर महिला पत्रकार से एसीपी द्वारा छेड़छाड़ का आरोप
घटना की शुरुआत तब हुई जब जंतर-मंतर पर विभिन्न स्वतंत्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा था। रिपोर्टिंग कर रहीं स्वतंत्र महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि ग्राउंड पर कवरेज के दौरान दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी (ACP स्तर) द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार, धक्का-मुक्की और यौन उत्पीड़न (Groping and Molestation) किया गया। पीड़िता पत्रकार ने शनिवार रात को संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में जाकर आरोपी अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए कई घंटे बिताए, लेकिन पुलिस तुरंत कार्रवाई करने से कतराती रही। स्वतंत्र मीडिया पोर्टल्स के पत्रकारों का यह भी कहना है कि उनके पास अपनी संस्था के वैध प्रेस कार्ड मौजूद थे और वे बार-बार मीडियाकर्मी होने की बात दोहरा रहे थे, फिर भी पुलिस ने उनके साथ हिंसक और आक्रामक व्यवहार किया तथा कुछ पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों के साथ हिरासत में भी ले लिया।प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) का 4 अक्टूबर का कड़ा बयान
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने 4 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक प्रेस वक्तव्य जारी किया। प्रेस क्लब ने दिल्ली पुलिस की इस हिंसक कार्रवाई और पत्रकारों के साथ किए गए व्यवहार पर स्तब्धता और निराशा व्यक्त की। PCI ने अपने बयान में कहा कि लोकतंत्र में इस तरह के व्यवहार को सामान्य नहीं माना जा सकता और पत्रकारों को बिना किसी डर या भय के स्वतंत्र रूप से काम करने की अनुमति मिलनी चाहिए। प्रेस क्लब ने यह भी चिंता जताई कि देश की राजधानी के केंद्र में पत्रकारों को निष्पक्ष रिपोर्टिंग से रोकना भारत में मीडिया की स्वतंत्रता के भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इसके साथ ही PCI ने केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार को जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में बिना कोई सार्वजनिक आदेश दिए अचानक इंटरनेट सेवाएं बंद करने की भी कड़ी निंदा की और इसे सूचना के प्रवाह पर अनुचित प्रतिबंध करार दिया।The Press Club of India’s statement on Delhi Police’s action against journalists and imposition of Internet ban in and around Jantar Mantar area:— The Press Club of India is shocked and dismayed at the Delhi Police's actions against and treatment of journalists during the protests at Jantar Mantar against the chief election commissioner on Friday and Saturday. Behaviour of this kind cannot be normalised in a democracy. Journalists must be allowed to work freely, without fear, and document those who gather to raise various issues. That this is not being allowed even at the heart of the national capital does not bode well for the trajectory of media freedom in India. The Delhi Police (@DelhiPolice) must immediately act on the female journalist's complaint and ensure that it gives mediapersons the space to do their jobs without having to face aggression and threats.
— Press Club of India (@PCITweets) October 4, 2026
आरोपों के बाद दिल्ली पुलिस का रुख और जांच का आश्वासन
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बयान और बढ़ते जन आक्रोश के बाद दिल्ली पुलिस प्रशासन रक्षात्मक मुद्रा में आ गया। विवाद को बढ़ता देख दिल्ली पुलिस की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर कहा गया कि महिला पत्रकारों से प्राप्त शिकायतों को दर्ज कर लिया गया है और मामले की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए केस को तुरंत क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले जा रहे हैं और निष्पक्षता से जांच पूरी की जाएगी। हालाँकि, पुलिस ने पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाने या अवैध रूप से रोकने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही कार्रवाई की गई थी।दिल्ली पुलिस द्वारा जारी ग्राउंड रिपोर्टिंग की नई एडवाइजरी
तनाव को नियंत्रित करने और भविष्य में पत्रकारों एवं सुरक्षा बलों के बीच टकराव को रोकने के उद्देश्य से दिल्ली पुलिस ने एक सचित्र पोस्टर जारी कर चार सूत्रीय गाइडलाइंस लागू की हैं। पहली गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले सभी पत्रकारों के पास अपनी मीडिया संस्था या पीआईबी (PIB) और डीआईपी (DIP) द्वारा जारी वैध पहचान पत्र होना आवश्यक है। दूसरे नियम के अनुसार, पत्रकारों को अपना पहचान पत्र हर समय दृश्यमान तरीके से (छाती या गले में) पहनना होगा ताकि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा एजेंसियां उनकी पहचान आसानी से कर सकें।The story matters, So does how you get it! Guidelines for journalists. #DPUpdates #EthicsofJournalism https://t.co/Uu4nguCbJk
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 5, 2026
तीसरी हिदायत में पुलिस ने कहा है कि पत्रकारों की उपस्थिति या उनकी कवरेज गतिविधियों से पुलिस संचालन, गश्त और सुरक्षा बलों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। चौथे और अंतिम बिंदु में सलाह दी गई है कि तनावपूर्ण और संवेदनशील परिस्थितियों के दौरान पत्रकार सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों से एक सुरक्षित तथा उचित दूरी बनाकर ही रिकॉर्डिंग या रिपोर्टिंग करें। पत्रकारों को खुद को इस प्रकार खड़ा करना चाहिए जिससे यह आसानी से पहचाना जा सके कि वे प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पेशेवर मीडियाकर्मी हैं।