राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक स्थल जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर सियासी और प्रशासनिक माहौल गर्मा गया है। एक तरफ जहां सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रमुख चेहरे अभिजीत दीपके ने मुंबई से दिल्ली रवाना होने से पहले एक भावुक और आक्रामक वीडियो संदेश जारी कर लोकतंत्र बचाने की हुंकार भरी है, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सुरक्षा चिंताओं, जंतर-मंतर की सीमित क्षमता और पिछले प्रदर्शनों के कड़वे अनुभवों को रेखांकित किया है।
देश के लोकतांत्रिक ढांचे, निष्पक्ष चुनाव की प्रणाली और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर यह टकराव अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। अभिजीत दीपके के बयान और दिल्ली पुलिस के प्रेस नोट के बाद जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
अभिजीत दीपके ने अंदेशा जताया कि दिल्ली के एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी का डर उन्हें उनके पथ से डिगा नहीं सकता। उन्होंने सरकार और प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि उन पर UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) या NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराएं भी लगाई जाएं, तो भी वे पीछे नहीं हटने वाले हैं।
अपने व्यक्तिगत जीवन का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि वे देशप्रेम के चलते ही अमेरिका की आरामदेह जिंदगी छोड़कर भारत वापस आए हैं। इतने वर्षों से लोग डर-डरकर जी रहे हैं, लेकिन अब और डरना संभव नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा के मार्ग पर चलने की अपील की और कहा कि कोई भी गलती या हिंसा उनकी ओर से नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे गुंडे नहीं बल्कि जागरूक नागरिक हैं।
उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि यदि एयरपोर्ट या किसी अन्य स्थान पर उनकी गिरफ्तारी होती है, तो भी जंतर-मंतर पर होने वाला यह विरोध प्रदर्शन रुकना नहीं चाहिए। प्रदर्शन को शांतिपूर्वक सफल बनाना ही लोकतंत्र को बचाने का एकमात्र जरिया है।
पुलिस विज्ञप्ति में जुलाई के महीने में जंतर-मंतर पर हुए पिछले प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, उस समय केवल एक दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी लगभग एक महीने तक वहां डटे रहे। उस दौरान फैली हिंसा में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। जांच रिपोर्टों में यह भी सामने आया था कि उस प्रदर्शन में 2,000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों ने भाग लिया था, जिससे स्थिति अधिक हिंसक और अनियंत्रित हो गई थी। उन हिंसक झड़पों में निर्दोष छात्रों को भी चोटें आई थीं।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आकार और व्यावहारिक सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक तुलनात्मक रूप से छोटा क्षेत्र है जहां एक समय में सुरक्षित रूप से केवल लगभग 1,000 लोग ही आ सकते हैं। किसी भी स्थान पर लोगों की क्षमता का निर्धारण स्थान, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन आवाजाही और सार्वजनिक सुरक्षा के मापदंडों के आधार पर होता है। दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ एक प्रमुख आर्थिक केंद्र भी है, इसलिए शहर के सामान्य कामकाज में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न नहीं होना चाहिए।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस मामले में CJP बिना आवश्यक अनुमति प्राप्त किए ही अपने प्रस्तावित जमावड़े का आयोजन कर रही है। पुलिस ने माननीय उच्चतम न्यायालय के उन निर्देशों का भी हवाला दिया जिनमें सार्वजनिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने वाले कानूनी नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है। आयोजकों की यह जिम्मेदारी है कि वे प्रतिभागियों को कानूनी स्थिति और बिना अनुमति जमावड़े में शामिल होने के परिणामों से अवगत कराएं।
इसके साथ ही, दिल्ली पुलिस ने बीते सप्ताह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिस कांस्टेबलों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं को भी अत्यंत गंभीर माना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में लागू किए गए प्रतिबंध पूरी तरह से अस्थायी और निवारक प्रकृति के हैं, जिनका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और प्रभावित क्षेत्रों के व्यापारियों, यात्रियों व आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निर्वाचन आयोग के उप सचिव संदीप कुमार के आदेश के अनुसार:
देश के लोकतांत्रिक ढांचे, निष्पक्ष चुनाव की प्रणाली और चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर यह टकराव अब बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है। अभिजीत दीपके के बयान और दिल्ली पुलिस के प्रेस नोट के बाद जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
अमेरिका छोड़कर भारत लौटा, लोकतंत्र बचाने के लिए जेल जाने से डर नहीं लगता: अभिजीत दीपके
सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में अभिजीत दीपके ने साफ किया कि वह निष्पक्ष चुनावों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी परिणाम का सामना करने को तैयार हैं। उन्होंने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे मुंबई से दिल्ली के लिए रवाना हो रहे हैं ताकि जंतर-मंतर पर होने वाले मार्च में शामिल हो सकें।अभिजीत दीपके ने अंदेशा जताया कि दिल्ली के एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी का डर उन्हें उनके पथ से डिगा नहीं सकता। उन्होंने सरकार और प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि उन पर UAPA (गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) या NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) जैसी कठोर धाराएं भी लगाई जाएं, तो भी वे पीछे नहीं हटने वाले हैं।
अपने व्यक्तिगत जीवन का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि वे देशप्रेम के चलते ही अमेरिका की आरामदेह जिंदगी छोड़कर भारत वापस आए हैं। इतने वर्षों से लोग डर-डरकर जी रहे हैं, लेकिन अब और डरना संभव नहीं है। उन्होंने अपने समर्थकों और प्रदर्शनकारियों से महात्मा गांधी के दिखाए अहिंसा के मार्ग पर चलने की अपील की और कहा कि कोई भी गलती या हिंसा उनकी ओर से नहीं होनी चाहिए क्योंकि वे गुंडे नहीं बल्कि जागरूक नागरिक हैं।
निष्पक्ष चुनाव के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR को निरस्त करना जरूरी
अभिजीत दीपके ने अपने संदेश में प्रदर्शन की दो मुख्य मांगों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि CJP की यह पूरी लड़ाई देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने को लेकर है। जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जाता, तब तक निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।उन्होंने देशवासियों का आह्वान किया कि यदि एयरपोर्ट या किसी अन्य स्थान पर उनकी गिरफ्तारी होती है, तो भी जंतर-मंतर पर होने वाला यह विरोध प्रदर्शन रुकना नहीं चाहिए। प्रदर्शन को शांतिपूर्वक सफल बनाना ही लोकतंत्र को बचाने का एकमात्र जरिया है।
दिल्ली पुलिस का रुख: जुलाई के प्रदर्शन की हिंसा और जंतर-मंतर की क्षमता पर सवाल
अभिजीत दीपके के वीडियो संदेश के बीच दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।The right to protest must be protected, but so must the right of a city to function safely. Responsible policing is about balancing both. #DPUpdates #PublicSafetyOurPriority https://t.co/Zfwc8xiCwy
— Delhi Police (@DelhiPolice) October 9, 2026
पुलिस विज्ञप्ति में जुलाई के महीने में जंतर-मंतर पर हुए पिछले प्रदर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, उस समय केवल एक दिवसीय प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शनकारी लगभग एक महीने तक वहां डटे रहे। उस दौरान फैली हिंसा में 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। जांच रिपोर्टों में यह भी सामने आया था कि उस प्रदर्शन में 2,000 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों ने भाग लिया था, जिससे स्थिति अधिक हिंसक और अनियंत्रित हो गई थी। उन हिंसक झड़पों में निर्दोष छात्रों को भी चोटें आई थीं।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के आकार और व्यावहारिक सीमाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि यह एक तुलनात्मक रूप से छोटा क्षेत्र है जहां एक समय में सुरक्षित रूप से केवल लगभग 1,000 लोग ही आ सकते हैं। किसी भी स्थान पर लोगों की क्षमता का निर्धारण स्थान, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन आवाजाही और सार्वजनिक सुरक्षा के मापदंडों के आधार पर होता है। दिल्ली देश की राजधानी होने के साथ-साथ एक प्रमुख आर्थिक केंद्र भी है, इसलिए शहर के सामान्य कामकाज में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न नहीं होना चाहिए।
बिना अनुमति प्रदर्शन और कानूनी अनुपालन पर पुलिस का कड़ा संदेश
दिल्ली पुलिस ने यह स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हुए पुलिस को शहर के निवासियों, व्यापारियों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की सुरक्षा, आवाजाही तथा आर्थिक गतिविधियों के संतुलन को बनाए रखना होता है। इसके लिए अग्रिम योजना और आयोजकों से सहयोग आवश्यक है। प्रदर्शन के लिए पूर्व अनुमति मांगना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ नहीं, बल्कि एक अनिवार्य प्रशासनिक प्रक्रिया है ताकि यातायात प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं और भीड़ नियंत्रण के उचित इंतजाम किए जा सकें।पुलिस प्रशासन के अनुसार, इस मामले में CJP बिना आवश्यक अनुमति प्राप्त किए ही अपने प्रस्तावित जमावड़े का आयोजन कर रही है। पुलिस ने माननीय उच्चतम न्यायालय के उन निर्देशों का भी हवाला दिया जिनमें सार्वजनिक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने वाले कानूनी नियमों का पालन करने पर जोर दिया गया है। आयोजकों की यह जिम्मेदारी है कि वे प्रतिभागियों को कानूनी स्थिति और बिना अनुमति जमावड़े में शामिल होने के परिणामों से अवगत कराएं।
इसके साथ ही, दिल्ली पुलिस ने बीते सप्ताह जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान महिला पुलिस कांस्टेबलों के साथ छेड़छाड़ और मारपीट की घटनाओं को भी अत्यंत गंभीर माना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में लागू किए गए प्रतिबंध पूरी तरह से अस्थायी और निवारक प्रकृति के हैं, जिनका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना और प्रभावित क्षेत्रों के व्यापारियों, यात्रियों व आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निर्वाचन आयोग द्वारा फॉर्म-7 आवेदनों पर सीमा तय करने के निर्देश
प्रदर्शन और बयानों के इस माहौल के बीच निर्वाचन आयोग (ECI) की ओर से भी एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक आदेश सामने आया है। भारत निर्वाचन आयोग (Nirvachan Sadan) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को पत्र जारी कर मतदाता सूची से नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने वाले 'फॉर्म-7' के अत्यधिक और थोक आवेदनों पर उचित सीमाएं तय करने के निर्देश दिए हैं।निर्वाचन आयोग के उप सचिव संदीप कुमार के आदेश के अनुसार:
- दावे एवं आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान एक व्यक्तिगत मतदाता द्वारा अधिकतम 10 फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जा सकते हैं।
- मतदाता सूची के निरंतर अद्यतनीकरण की अवधि के दौरान यह सीमा प्रति माह अधिकतम 5 फॉर्म-7 आवेदन निर्धारित की गई है।
- राजनीतिक दलों के मान्यता प्राप्त बीएलए (BLA) ड्राफ्ट प्रकाशन से पहले प्रति दिन 50 फॉर्म और उसके बाद प्रति दिन 10 फॉर्म जमा कर सकते हैं।
जंतर-मंतर पर टकराव और आगे की राह
अभिजीत दीपके का गांधीवादी तरीके से आंदोलन जारी रखने का आह्वान और दिल्ली पुलिस द्वारा सुरक्षा कारणों से बरती जा रही सख्ती यह दर्शाती है कि आने वाले समय में राजधानी में राजनीतिक और नागरिक आंदोलनों को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी रह सकती है। एक ओर जहां नागरिक संगठन अपने मौलिक और संवैधानिक अधिकारों की दुहाई देकर सड़कों पर उतर रहे हैं, वहीं प्रशासन बिना अनुमति के होने वाले आयोजकों और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने के रुख में है।
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