हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऊंचे पहाड़ों और ठंडी वादियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। गर्मियों के मौसम के बाद हर साल लाखों सैलानी मानसून की फुहारों का आनंद लेने के लिए पहाड़ों का रुख करते हैं। लेकिन इस बार अगर आप भी देवभूमि हिमाचल की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो आपको अपनी योजना पर दोबारा विचार करने की सख्त जरूरत है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला (IMD) ने राज्य के मौसम को लेकर एक बेहद गंभीर और बड़ा बुलेटिन जारी किया है।
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ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 6 जुलाई से लेकर 11 जुलाई 2026 तक पूरे हिमाचल प्रदेश में मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए 'ऑरेंज' और 'येलो' अलर्ट जारी किया है। बादलों की इस मूसलाधार आवाजाही के कारण पहाड़ी इलाकों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त होने की आशंका जताई गई है।
6 और 7 जुलाई को भारी से बहुत भारी बारिश का 'ऑरेंज अलर्ट'
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की ट्रफ रेखा और स्थानीय मौसमी प्रणालियों के सक्रिय होने के कारण 6 और 7 जुलाई को राज्य में बारिश का प्रकोप सबसे अधिक रहेगा। इन दो दिनों के लिए विभाग ने 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। ऑरेंज अलर्ट का सीधा मतलब यह होता है कि स्थानीय प्रशासन और आम जनता को भारी नुकसान और आपातकालीन स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार रहना चाहिए।
इस दौरान कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला, सोलन, और सिरमौर जैसे मध्य और निचले पर्वतीय जिलों में गरज-चमक के साथ अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना है। कुछ इलाकों में तो चंद घंटों के भीतर ही रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
8 से 11 जुलाई तक थमेगा नहीं बारिश का सिलसिला, जारी रहेगा 'येलो अलर्ट'
7 जुलाई के बाद भी प्रदेश के लोगों को इस मानसूनी आफत से राहत मिलती नहीं दिख रही है। मौसम विभाग ने 8 जुलाई से लेकर 11 जुलाई तक के लिए 'येलो अलर्ट' जारी रखा है। इसका अर्थ यह है कि भले ही बारिश की तीव्रता में आंशिक कमी आए, लेकिन रुक-रुक कर होने वाली तेज बौछारें और आंधी-तूफान का सिलसिला लगातार बना रहेगा। पहाड़ों में लगातार होने वाली ऐसी बारिश बेहद खतरनाक मानी जाती है क्योंकि इससे मिट्टी पूरी तरह पानी सोख लेती है और उसकी पकड़ कमजोर हो जाती है।
जून के सूखे के बाद जुलाई में मानसून का अचानक यू-टर्न
इस साल हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत काफी चौंकाने वाली रही है। जून 2026 का महीना पूरे प्रदेश के लिए बेहद सूखा गुजरा था। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में सामान्य से करीब 36% कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसने इस साल के जून को साल 1901 के बाद से अब तक का 44वां सबसे सूखा जून बना दिया था। जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में तो स्थिति और भी खराब थी, जहां सामान्य से 59% कम बादल बरसे थे।
लेकिन जुलाई की शुरुआत होते ही मानसून ने अचानक ऐसा यू-टर्न लिया है कि अब जून के सूखे की कसर पूरी होती दिख रही है। कम समय में बहुत अधिक बारिश होने के कारण अब नदियां और नाले उफान पर आ गए हैं।
भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की बड़ी आशंका
मौसम विभाग और हिमाचल प्रदेश आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) ने इस छह दिवसीय स्पेल के दौरान कुछ बेहद गंभीर खतरों को लेकर आगाह किया है, जिन्हें नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है:
लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी रास्तों और नेशनल हाईवे पर बड़े पैमाने पर भूस्खलन (Landslides) होने का खतरा है। पहाड़ों से गिरने वाले मलबे और पत्थरों के कारण शिमला-चंडीगढ़ हाईवे, मनाली-लेह हाईवे और कई अन्य प्रमुख संपर्क मार्ग बंद हो सकते हैं। इसके अलावा, अचानक होने वाली तेज बारिश से नदियों का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है, जिससे 'फ्लैश फ्लड' यानी अचानक बाढ़ आने का खतरा पैदा हो जाता है। घने बादलों और कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता (Visibility) भी नाममात्र की रह जाएगी, जिससे गाड़ी चलाना बेहद जोखिम भरा होगा।
प्रशासन की पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए कड़ी हिदायत
बिगड़ते हालात को देखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार और स्थानीय जिला प्रशासनों ने सख्त गाइडलाइन जारी की है। पर्यटकों से अपील की गई है कि वे इस अवधि के दौरान ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों या नदी-नालों के किनारे जाने की बिल्कुल भी कोशिश न करें। ब्यास, रावी, सतलुज और अन्य खड्डों के पास जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर रहने और केवल बहुत जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी गई है।
