अमेरिका में अप्रवासन नियमों को लेकर सख्ती एक नए स्तर पर पहुँच गई है। अमरीकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर अपनी निगरानी और कार्रवाई को अचानक तेज कर दिया है। सैन फ्रांसिस्को, सैन जोस, ओकलैंड, डेनवर और वाशिंगटन डीसी जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर घरेलू उड़ानों के जरिए यात्रा कर रहे गैर-नागरिकों और प्रवासियों को सीधे हिरासत में लिया जा रहा है। विशेष रूप से वे लोग निशाने पर हैं जो अपने वीज़ा की आधिकारिक अवधि समाप्त होने के बावजूद अमेरिका में रह रहे थे। इस नई और सख्त कार्रवाई को देखते हुए इमिग्रेशन वकीलों और नागरिक अधिकार संगठनों ने सभी वीज़ा धारकों, शरण चाहने वालों और प्रवासियों को अत्यंत जरूरी न होने पर हवाई यात्रा करने से बचने की स्पष्ट हिदायत दी है।
टीएसए और आइस का डेटा तालमेल: इस तरह बुना जा रहा है जाल
हाल की घटनाओं के विश्लेषण से पता चलता है कि ट्रांसपोर्टेशन सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन (TSA) और ICE के बीच सहयोग अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ गया है। अप्रवासन मामलों के विशेषज्ञों और वकीलों का मानना है कि टीएसए यात्रियों की मैनिफेस्ट सूची और पहचान संबंधी जानकारी सीधे इमिग्रेशन एजेंसियों के साथ साझा कर रहा है। इसके कारण जब कोई गैर-नागरिक या वीज़ा ओवरस्टे करने वाला व्यक्ति घरेलू उड़ान के लिए बोर्डिंग पास प्राप्त करता है या सुरक्षा जांच से गुजरता है, तो उसकी जानकारी तुरंत संघीय अधिकारियों तक पहुँच जाती है। अधिकारी यात्री के विमान में सवार होने से ठीक पहले या लैंडिंग के बाद उसे हवाई अड्डे के परिसर से ही गिरफ्तार कर लेते हैं। इस प्रक्रिया ने उन प्रवासियों को हैरान कर दिया है जो सोचते थे कि केवल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ही अप्रवासन जांच होती है।
घरेलू उड़ानों पर भी मंडराया गिरफ्तारी का खतरा
पारंपरिक रूप से अमेरिका के भीतर घरेलू उड़ानों में यात्रा करते समय केवल एक वैध फोटो पहचान पत्र की आवश्यकता होती थी और इमिग्रेशन स्टेटस की प्रत्यक्ष जांच नहीं की जाती थी। हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहाँ लोग अमेरिका छोड़ने की तैयारी में थे या एक राज्य से दूसरे राज्य की सामान्य यात्रा कर रहे थे, लेकिन उन्हें हवाई अड्डे पर ही रोककर हिरासत केंद्र भेज दिया गया। इनमें से कई लोग वर्षों से अमेरिका में रह रहे थे और महामारी के दौरान या उससे पहले उनके पर्यटक, छात्र या कार्य वीज़ा की अवधि समाप्त हो चुकी थी। वकीलों के अनुसार, कई शरण चाहने वाले जिनके मामले अदालतों में लंबित हैं या जिनके खिलाफ अतीत में कोई छोटा-मोटा मामला दर्ज था, उन्हें भी इस अभियान के तहत निशाना बनाया जा रहा है।
डिपोर्टेशन के लक्ष्य और कानूनी अधिकार
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति प्रशासन द्वारा तय किए गए दैनिक गिरफ्तारी और देशनिकाला (डिपोर्टेशन) के कड़े लक्ष्यों को हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। हवाई अड्डे अधिकारियों के लिए एक आसान ठिकाना बन गए हैं क्योंकि यहाँ यात्रियों की पहचान की पुष्टि पहले ही डिजिटल माध्यम से हो जाती है। इस स्थिति ने मानवाधिकार संगठनों के बीच चिंता बढ़ा दी है। कानूनी सहायकों और इमिग्रेशन वकीलों ने प्रवासियों से अपील की है कि यदि उनके पास ग्रीन कार्ड या अमेरिकी नागरिकता नहीं है, तो वे बिना किसी अनुभवी वकील से परामर्श किए हवाई मार्ग से यात्रा न करें। यदि यात्रा करना अनिवार्य ही हो, तो अपने पास सभी कानूनी दस्तावेज रखना और अपने अधिकारों के बारे में जागरूक रहना बेहद जरूरी है।
प्रवासियों में दहशत और आने वाले दिनों का परिदृश्य
हवाई अड्डों पर हो रही इन अचानक गिरफ्तारियों के कारण अमेरिका में रहने वाले लाखों गैर-नागरिकों और उनके परिवारों के बीच डर का माहौल पैदा हो गया है। कई लोग अब अपने घर लौटने की योजनाओं या व्यापारिक यात्राओं को रद्द कर रहे हैं। जिस तरह से अमरीकी इमिग्रेशन एजेंसियाँ तकनीक और सरकारी डेटाबेस का इस्तेमाल करके हवाई यात्रा करने वालों पर शिकंजा कस रही हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और व्यापक हो सकता है। अप्रवासन मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक नियमों और टीएसए की डेटा शेयरिंग नीति पर कोई नई कानूनी रोक नहीं लगती, तब तक हवाई अड्डे असुरक्षित बने रहेंगे।