सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद ध्वस्तीकरण की खबर दिखाने पर पत्रकार पूजा माथुर पर FIR, ट्वीट कर दागे तीखे सवाल

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में कलेक्ट्रेट स्थित एक पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण की खबर कवर करने के बाद स्वतंत्र पत्रकार पूजा माथुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के जमीनी हालातों को दिखाने और वहां के इमाम का साक्षात्कार लेकर उनका पक्ष जनता के सामने रखने के बाद हुई इस कानूनी कार्रवाई ने सोशल मीडिया और पत्रकारिता जगत में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

सहारनपुर मस्जिद मामला: पूजा माथुर के ट्वीट से उपजा विवाद, प्रेस की आजादी पर उठे सवाल
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पूजा माथुर के ट्वीट से सामने आया पूरा मामला

मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकार पूजा माथुर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा कर अपना पक्ष रखा। डिजिटल मीडिया पब्लिकेशन 'द ऑब्जर्वर पोस्ट' के अनुसार, उन्हें अखबारों के माध्यम से ही अपने ऊपर हुई इस एफआईआर की जानकारी मिली। अपने ट्वीट में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने सिर्फ सहारनपुर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद वहां के इमाम साहब से बातचीत की, उनके सवाल पूछे, ऑन-कैमरा बयान रिकॉर्ड किया और वही बात जनता तक पहुँचाई। इसी इंटरव्यू को आधार बनाकर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने की बात सामने आ रही है।

ब्रिक्स सम्मेलन की टाइमलाइन और अंतरराष्ट्रीय छवि पर सवाल

पूजा माथुर ने अपने ट्वीट में वैश्विक पटल पर भारत की छवि और देश के आंतरिक हालातों के विरोधाभास को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा कि एक तरफ भारत 12-13 सितंबर को ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जहां दुनिया के कई बड़े देशों के नेता और प्रतिनिधि दिल्ली में जुटेंगे और भारत इस मंच से सहयोग, स्थिरता व "Humanity First" की बात करेगा। लेकिन दूसरी तरफ, देश के भीतर बार-बार पत्रकारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। जब दुनिया के सामने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी का दावा किया जाता है, तो देश के भीतर पत्रकारों को सवाल पूछने का भरोसा मिलना चाहिए।

महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस प्रशासन की भूमिका

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में पूजा माथुर ने महिला पत्रकारों के प्रति प्रशासन के दोहरे रवैये पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने जिक्र किया कि हाल ही में 4PM की महिला पत्रकार शाहीन और नफीसा के साथ बुरी तरह हिंसा हुई, लेकिन हिंसा के बाद आज तक उन महिला पत्रकारों की एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके विपरीत, जैसे ही सहारनपुर मस्जिद की खबरें दिखाई गईं, तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पुलिस प्रशासन को महिला विरोधी कार्य में लगा दिया गया है? एक तरफ महिला सम्मान की बातें की जाती हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस महिलाओं पर अत्याचार कर रही है।

क्या सवाल पूछना और पीड़ित की बात पहुँचाना अपराध है

अपने वक्तव्य में पूजा माथुर ने साफ किया कि यह सवाल सिर्फ उनका अकेले का नहीं है, बल्कि हर उस पत्रकार का है जो जमीन पर जाकर लोगों की आवाज सुनता है और जो देखता है उसे देश के सामने रखने की कोशिश करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी बयान से असहमति है, तो उसका जवाब दिया जा सकता है, लेकिन क्या सवाल पूछना अपराध है? क्या किसी पीड़ित की बात लोगों तक पहुँचाना अपराध है? क्या सच दिखाने वाले पत्रकार को हमेशा डर के साये में काम करना पड़ेगा?

पत्रकारिता की आजादी और लोकतंत्र का भविष्य

यह पूरा मुद्दा किसी एक व्यक्ति का न होकर पत्रकारिता की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। जिस दिन देश में पत्रकार सवाल पूछने से डरने लगेगा, उस दिन सिर्फ एक पत्रकार की आवाज नहीं दबेगी, बल्कि पूरे लोकतंत्र की आवाज कमजोर होगी। सच दिखाना कभी भी अपराध नहीं होना चाहिए और न ही निष्पक्ष पत्रकारिता को किसी मुकदमे के दायरे में बांधा जाना चाहिए।

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