मणिपुरी म्यूजिशियन की हत्या का AI ड्रामेटाइजेशन दिखाने पर टाइम्स नाउ को कानूनी नोटिस, 24 घंटे में माफी की मांग

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के किलोकरी इलाके में मणिपुर के मशहूर संगीतकार होंगथम विक्रम सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस दुखद और दर्दनाक घटना के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय समाचार चैनल 'टाइम्स नाउ' (Times Now) पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने शो में इस जघन्य हत्याकांड का एआई (AI - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) द्वारा बनाया गया एक काल्पनिक और आपत्तिजनक वीडियो प्रसारित किया। इस कदम के बाद पीड़ित परिवार, पूर्वोत्तर समुदाय और आम जनता में भारी आक्रोश फैल गया है।

Manipuri Musician Murder Case: टाइम्स नाउ को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट का लीगल नोटिस, AI वीडियो हटाने की मांग

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रसिद्ध सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता एंजेलिका अरिबम (Angellica Aribam) ने सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट आयशा खान के माध्यम से टाइम्स नाउ के एडिटर-इन-चीफ को एक कड़ा कानूनी नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में प्रसारण को तुरंत रोकने, वीडियो को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने और 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की सख्त मांग की गई है।

एआई जनरेटेड वीडियो और टाइम्स नाउ का प्रसारण विवाद

8 सितंबर 2026 को टाइम्स नाउ चैनल ने अपने कार्यक्रम 'डीकोडिंग नाउ' (Decoding Now) में "Manipuri Musician Murdered" शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रसारित की थी। इस प्रसारण के दौरान दोपहर करीब 2:28 से 17:03 बजे के बीच चैनल ने एआई द्वारा निर्मित एक ड्रामेटाइज्ड वीडियो दिखाया। इस वीडियो में आरोपियों द्वारा संगीतकार विक्रम सिंह को घेरकर बेरहमी से पीटने, घसीटने और खून से लथपथ हालत में अस्पताल ले जाने जैसे दृश्यों का काल्पनिक चित्रण किया गया था।

वीडियो पर बेहद छोटे और कुछ ही पलों के लिए "AI GENERATED" लिखा गया था। बाद में इस वीडियो के क्लिप्स चैनल के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल @TimesNow पर भी शेयर किए गए। सामाजिक कार्यकर्ता एंजेलिका अरिबम और कई अन्य दर्शकों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। एंजेलिका ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को देखकर कहा कि यह किसी के निजी आघात को भुनाने जैसा है और यह अत्यंत दर्दनाक और घिनौना है।

कानूनी नोटिस में उठाए गए गंभीर मुद्दे और कानून का उल्लंघन

एडवोकेट आयशा खान द्वारा भेजे गए नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह घटना पहले से ही सार्वजनिक रूप से एक नस्लीय हमले (Racial Attack) के रूप में देखी जा रही है। ऐसे संवेदनशील मामले में बिना परिवार की अनुमति के इस तरह के मनगढ़ंत हिंसात्मक दृश्यों को प्रसारित करना समाज में वैमनस्य और अशांति फैला सकता है।

नोटिस में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), धारा 197 (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन), धारा 270 (पब्लिक उपद्रव) और धारा 292 का हवाला दिया गया है। इसके अतिरिक्त, यह केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 के नियम 6(1)(a) और नियम 6(1)(c) के तहत तय 'प्रोग्राम कोड' का भी सीधा उल्लंघन है, जो अश्लीलता, खराब रुचि और सांप्रदायिक या नस्लीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर रोक लगाता है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और आईटी नियमों की अनदेखी

लीगल नोटिस में सूचना और प्रसारण मंत्रालय (M&B Ministry) द्वारा 9 जनवरी 2023 को जारी एडवाइजरी का भी विशेष रूप से जिक्र किया गया है। इस एडवाइजरी में टीवी चैनलों को सोशल मीडिया से उठाए गए हिंसात्मक, खून-खराबे और बिना धुंधले किए गए हमलों के वीडियो बार-बार दिखाने से मना किया गया था।

साथ ही, सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) संशोधन नियम, 2026 के तहत "सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन" (Synthetically Generated Information) के लिए स्पष्ट और निरंतर ऑन-स्क्रीन वाटरमार्क अनिवार्य किया गया है। नोटिस के अनुसार, टाइम्स नाउ का छोटा और तुरंत गायब होने वाला 'AI GENERATED' टेक्स्ट इस कानूनी मानक को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है।

24 घंटे का अल्टीमेटम और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता के माध्यम से भेजे गए इस नोटिस के जरिए टाइम्स नाव को तीन प्रमुख निर्देश दिए गए हैं। पहला, विवादित एआई वीडियो को टीवी टेलीकास्ट, वेबसाइट, यूट्यूब, एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और सभी आर्काइव प्लेटफॉर्म से तुरंत और हमेशा के लिए हटाया जाए।

दूसरा, चैनल एक लिखित वचनबद्धता दे कि वह भविष्य में किसी भी वास्तविक आपराधिक घटना या जीवित/मृत व्यक्ति का बिना सहमति और बिना स्पष्ट डिस्क्लोजर के ऐसा काल्पनिक प्रसारण नहीं करेगा। तीसरा, चैनल अपने मुख्य प्राइम-टाइम शो के दौरान ऑन-एयर और अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल पर इस आपत्तिजनक वीडियो के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि 24 घंटे के भीतर इन शर्तों का अनुपालन नहीं किया गया, तो चैनल के खिलाफ दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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