प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाए जाने पर सियासत गर्म: राहुल गांधी ने बताया 'बलात्कारियों का रक्षक', जानें क्या है पूरा विवाद

भारतीय राजनीति में एक बार फिर बयानों का तीर-कमान सज गया है और इस बार केंद्र में हैं नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का नया कार्यभार सौंपा गया, लेकिन पदभार संभालते ही विपक्षी दलों ने उन पर हमलों की बौछार कर दी। लोकसभा में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की। राहुल गांधी ने जोशी को बलात्कारियों का रक्षक करार देते हुए उनके पुराने बयानों का हवाला दिया और इस नियुक्ति को देश के युवाओं व छात्रों के साथ एक क्रूर मज़ाक बताया।

लोकसभा में प्रियंका गांधी का बड़ा हमला: नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री मोदी को घेरा

लोकसभा में प्रियंका गांधी वाड्रा का तीखा हमला

लोकसभा में चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने नए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। प्रियंका गांधी ने कहा कि देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को दिशा देने वाले शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार एक ऐसे व्यक्ति को सौंप दिया गया है जिसने एक गर्भवती महिला के साथ सामूहिक बलात्कार के दोषियों की रिहाई पर न केवल सहमति जताई थी, बल्कि खुशी भी व्यक्त की थी। उनके इस बयान के बाद सदन के भीतर जोरदार हंगामा हुआ और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

संसद के भीतर प्रियंका गांधी और प्रल्हाद जोशी में तीखी बहस

सदन के भीतर भी यह मुद्दा पूरी तरह से गरमाया रहा। प्रियंका गांधी ने सदन में छात्रों के मुद्दों और युवाओं पर हो रहे पुलिसिया कार्रवाई का जिक्र करते हुए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए। प्रियंका गांधी के आरोपों पर पलटवार करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सदन में ही उन पर भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। जोशी ने चुनौती देते हुए कहा कि कांग्रेस नेता को अपने बयानों के पक्ष में प्रमाण देने चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों के किसी जनप्रतिनिधि या मंत्री पर इस तरह के गंभीर आरोप लगाना और उनका चरित्र हनन करना संसदीय गरिमा के खिलाफ है।

संसद परिसर में गूंजा राहुल गांधी का तीखा बयान

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जब देश का युवा शिक्षा प्रणाली में सुधार और परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहा है, तब सरकार ने एक ऐसे व्यक्ति को देश का शिक्षा मंत्री बना दिया है जो बलात्कार के दोषियों का बचाव करता रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि किसी ऐसे व्यक्ति से ज्यादा घिनौना कोई नहीं हो सकता जो यह कहता है कि बलात्कारियों को सुरक्षा या राहत मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में कई अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे, लेकिन प्रधानमंत्री ने एक ऐसे चेहरे को चुना जिसकी सोच महिला सुरक्षा और न्याय के खिलाफ नजर आती है।

2002 बिल्किस बानो मामले से जुड़ा है पूरा विवाद

यह पूरा राजनीतिक बवंडर दरअसल 2002 के चर्चित बिल्किस बानो सामूहिक बलात्कार और हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। साल 2022 में जब गुजरात सरकार ने अपनी समयपूर्व रिहाई (रेमिशन) नीति के तहत बिल्किस बानो मामले के 11 दोषियों को जेल से रिहा करने का फैसला किया था, तब प्रल्हाद जोशी संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सरकार के इस कदम का बचाव करने वाले भाजपा के पहले वरिष्ठ नेता बने थे। उस समय मुख्य धारा की मीडिया NDTV से बातचीत में जोशी ने कहा, "मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता, क्योंकि यह कानून की एक प्रक्रिया है। दोषियों की रिहाई पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और एक निश्चित समय सीमा जेल में बिताने के बाद कैदियों की रिहाई का प्रावधान कानून में मौजूद है।"

सुप्रीम कोर्ट के फैसले और विपक्ष के आरोपों का रुख

प्रल्हाद जोशी द्वारा 2022 में दिए गए इस बयान पर उस समय भी देश भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। बाद में देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार द्वारा दोषियों को दी गई रिहाई को पूरी तरह से रद्द कर दिया था और इसे शक्तियों का दुरुपयोग करार देते हुए सभी 11 दोषियों को वापस जेल भेजने का आदेश जारी किया था। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का तर्क है कि जिस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक और गलत ठहराया, उसका सार्वजनिक रूप से समर्थन करने वाले नेता को देश की भावी पीढ़ी को दिशा देने वाले शिक्षा मंत्रालय का प्रभार देना पूरी तरह अनुचित है।

शिक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि हाल ही में प्रतियोगी परीक्षाओं और नीट (NEET) पर्चा लीक मामले को लेकर देश भर में छात्रों का भारी आक्रोश देखने को मिला था। छात्र संगठनों और युवा प्रदर्शनकारियों के लंबे आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने मंत्रिमंडल में फेरबदल करते हुए प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। लेकिन पदभार ग्रहण करते ही उनके पुराने विवादित बयान के सामने आने से सरकार और नए शिक्षा मंत्री दोनों ही रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं।

भावी राजनीति पर इस विवाद का असर

शिक्षा मंत्रालय जैसे संवेदनशील विभाग पर हुए इस राजनीतिक हमले ने संसद के मानसून सत्र में माहौल को और अधिक गर्मा दिया है। विपक्ष जहाँ महिला सुरक्षा, नैतिकता और न्यायिक मूल्यों को आधार बनाकर सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे विपक्ष का दुष्प्रचार बताकर खारिज कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस राजनीतिक घेराबंदी का जवाब किस रणनीति के साथ देती है और शिक्षा क्षेत्र में सुधार की प्रशासनिक चुनौतियों से नए मंत्री किस प्रकार निपटते हैं।

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