
क्यों शुरू हुआ था यह युद्ध और दुनिया पर क्या पड़ा असर?
इस जंग की शुरुआत इसी साल 28 फ़रवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर अचानक बड़े हवाई हमले शुरू कर दिए थे। इन शुरुआती हमलों में ईरान को भारी नुकसान हुआ और उसके कई शीर्ष नेता मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दाग दीं।बात सिर्फ यहीं तक नहीं रुकी; ईरान ने दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई करने वाले सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते 'होर्मुज़ स्ट्रेट' (Hormuz Strait) को पूरी तरह बंद कर दिया और वहाँ समुद्री बारूदी सुरंगें बिछा दीं। इस रास्ते के बंद होते ही दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई रुक गई, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगीं और महंगाई का संकट खड़ा हो गया। इसी संकट को टालने के लिए पिछले कई दिनों से पर्दे के पीछे बातचीत चल रही थी।
अमेरिका-ईरान समझौते की 10 सबसे बड़ी बातें
पाकिस्तानी और ईरानी मीडिया के अनुसार, दोनों देशों के बीच 14 बिंदुओं वाले एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस समझौते की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:- तुरंत युद्धविराम: दोनों देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाई और बमबारी को तुरंत और हमेशा के लिए रोक देंगे।
- शुक्रवार को होंगे हस्ताक्षर: दोनों देशों के बीच बातचीत फाइनल हो चुकी है और इस समझौते पर आने वाले शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में आधिकारिक रूप से दस्तखत किए जाएंगे।
- होर्मुज़ स्ट्रेट फिर खुलेगा: ईरान अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा। डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि अब यह समुद्री रास्ता हमेशा के लिए 'टोल मुक्त' (टैक्स फ्री) रहेगा।
- अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होगी: अमेरिका भी 30 दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों के आसपास से अपनी नौसेना को हटा लेगा और आर्थिक नाकेबंदी खत्म करेगा।
- 300 अरब डॉलर की मदद: युद्ध से तबाह हुए ईरान के दोबारा निर्माण के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देश मिलकर ईरान को कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) का फंड देंगे।
- प्रतिबंधों से मिलेगी राहत: ईरान के तेल और ऊर्जा प्रोडक्ट्स पर दुनिया भर में जो प्रतिबंध लगे थे, उन्हें धीरे-धीरे समाप्त किया जाएगा।
- परमाणु हथियार पर रोक: ईरान ने भरोसा दिया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- ट्रंप की सख्त चेतावनी: डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में यह भी कहा कि अगर ईरान अंतिम परमाणु समझौते पर मुकरा, तो अमेरिका सैन्य हमले फिर शुरू कर देगा या क्षेत्र की कुल कमाई का पांचवां हिस्सा (20%) सुरक्षा टैक्स के रूप में वसूलेगा।
- क़तर की मैराथन बैठक: इस डील को फाइनल करने के लिए क़तर के राजनयिकों ने तेहरान में लगातार 14 से 15 घंटे तक लंबी बातचीत करके यह मसौदा तैयार करवाया।
- संयुक्त राष्ट्र की मुहर: इस पूरे शांति समझौते को और मजबूत बनाने के लिए आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव पास कर इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का रूप दिया जाएगा।
वैश्विक बाजारों और बड़े देशों की प्रतिक्रिया
इस कूटनीतिक जीत का दुनिया भर के देशों ने स्वागत किया है। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली (E4 समूह) ने एक संयुक्त बयान जारी कर अमेरिका और ईरान को बधाई दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस के एवियन शहर में हो रही जी-7 (G7) बैठक में भी इस बात पर चर्चा की जाएगी कि इस समुद्री रास्ते को हमेशा के लिए सुरक्षित कैसे रखा जाए।सर्च इंजनों और आर्थिक जानकारों का मानना है कि इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को होगा। तेल की आवाजाही दोबारा शुरू होने से आने वाले दिनों में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की कीमतें काफी कम हो सकती हैं, जिससे मंदी का खतरा टल जाएगा।