पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच बुधवार सुबह अमेरिकी सेना और ईरानी सेना के बीच सीधी जंग जैसी स्थिति पैदा हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के बेहद खास 'केश्म द्वीप' (Qeshm Island) पर बड़ा हवाई हमला किया है। इसके तुरंत बाद जवाब देते हुए ईरान की सेना ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए हैं।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है और आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा युद्ध छिड़ सकता है।
अमेरिका का दावा है कि इस ईरानी ठिकाने से समुद्र में आने-जाने वाले व्यापारी जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की तैयारी की जा रही थी। हमले से ठीक पहले अमेरिकी सेना ने आसमान में उड़ रहे ईरान के तीन ड्रोनों को भी मार गिराया, जो खाड़ी देशों की तरफ बढ़ रहे थे।
लेकिन इस हमले के बाद ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने खबर दी है कि तेहरान ने फिलहाल शांति और युद्धविराम से जुड़ी तमाम बातचीत को पूरी तरह से रोक दिया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि जब भी शांति की बात होती है, अमेरिका जानबूझकर हमला कर देता है।
अमेरिका की शर्त है कि ईरान को सबसे पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा। जब तक ईरान ऐसा नहीं करता, तब तक उसे आर्थिक मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी जाएगी।
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अमेरिका ने ईरान के द्वीप पर क्यों हमला किया?
अमेरिकी सेना के मुख्यालय (पेंटागन) ने बताया कि उनके लड़ाकू विमानों ने ईरान के केश्म द्वीप पर बने एक मिलिट्री स्टेशन को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि यह हमला उन्होंने अपनी रक्षा के लिए किया।अमेरिका का दावा है कि इस ईरानी ठिकाने से समुद्र में आने-जाने वाले व्यापारी जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर हमले की तैयारी की जा रही थी। हमले से ठीक पहले अमेरिकी सेना ने आसमान में उड़ रहे ईरान के तीन ड्रोनों को भी मार गिराया, जो खाड़ी देशों की तरफ बढ़ रहे थे।
ईरान का पलटवार: कुवैत और बहरीन पर मिसाइलें दागीं
अपने इलाके पर अमेरिकी हमले से नाराज होकर ईरान की मुख्य सेना (IRGC) ने बिना देर किए जवाबी कार्रवाई की। ईरान ने रात के अंधेरे में कुवैत और बहरीन की तरफ एक के बाद एक कई मिसाइलें छोड़ दीं, जिससे वहां आसमान में तेज रोशनी और खतरों के सायरन गूंजने लगे।- कुवैत में अफरा-तफरी: ईरान की मिसाइलों का मुख्य निशाना कुवैत में बना अमेरिका का 'अली अल सालेम एयरबेस' था। हालांकि, कुवैत की सेना ने अपनी मिसाइल डिफेंस सिस्टम की मदद से ईरान के कई मिसाइलों और ड्रोनों को आसमान में ही मार गिराया। कुवैत सरकार ने ईरान के इस कदम की कड़ी निंदा की है।
- बहरीन में सायरन: बहरीन देश में, जहां अमेरिकी नौसेना का बहुत बड़ा अड्डा है, वहां भी ईरान ने हमले की कोशिश की। अमेरिकी और बहरीन की सेना ने मिलकर इन मिसाइलों को नष्ट कर दिया। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि ईरान की कई मिसाइलें इतनी खराब थीं कि वे रास्ते में ही खुद-ब-खुद टूटकर गिर गईं।
शांति की बातचीत को लगा बड़ा झटका
यह खतरनाक हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच पिछले कुछ समय से छिपकर शांति समझौता कराने की कोशिशें चल रही थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बार-बार दावा कर रहे थे कि बातचीत सही दिशा में जा रही है।लेकिन इस हमले के बाद ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों ने खबर दी है कि तेहरान ने फिलहाल शांति और युद्धविराम से जुड़ी तमाम बातचीत को पूरी तरह से रोक दिया है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि जब भी शांति की बात होती है, अमेरिका जानबूझकर हमला कर देता है।
प्रतिबंध हटाने से अमेरिका का साफ इनकार
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि ईरान चाहे कुछ भी कर ले, अमेरिका उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को बिल्कुल नहीं हटाएगा।अमेरिका की शर्त है कि ईरान को सबसे पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा। जब तक ईरान ऐसा नहीं करता, तब तक उसे आर्थिक मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी जाएगी।
लेबनान और गाजा में भी जारी है भीषण जंग
ईरान-अमेरिका के इस सीधे टकराव के साथ-साथ इजरायल और लेबनान के बॉर्डर पर भी भारी गोलाबारी चल रही है।- हिजबुल्लाह के हमले: ईरान के समर्थन से चलने वाले लड़ाकू समूह 'हिजबुल्लाह' ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में इजरायली सेना के ठिकानों पर 13 बड़े रॉकेट हमले किए हैं।
- शांति के लिए इजरायल की शर्त: वाशिंगटन में शांति के लिए बातचीत तो चल रही है, लेकिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक कड़ा नियम जोड़ने की मांग की है। इजरायल चाहता है कि शांति समझौते के बाद भी उसे जब मर्जी हो, लेबनान के अंदर घुसकर आतंकियों को मारने की आजादी मिले। लेबनान सरकार इस शर्त को मानने से साफ इनकार कर रही है।
दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
इस टकराव के कारण पूरी दुनिया में कच्चे तेल (पेट्रोल-डीजल) की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। जिस समुद्री रास्ते (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) के पास यह हमला हुआ है, वहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल जहाजों के जरिए गुजरता है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने सभी व्यापारिक जहाजों को चेतावनी दी है कि वे इस रास्ते से संभलकर निकलें, क्योंकि यहां कभी भी ड्रोन या मिसाइल हमला हो सकता है। सुरक्षा कारणों से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है।
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