
इस बीच, आगामी 20 जुलाई 2026 की तारीख दिल्ली के लिए सबसे बड़ी सियासी परीक्षा साबित होने वाली है, क्योंकि इस एक ही दिन दिल्ली में दो बड़े शक्ति प्रदर्शन होने जा रहे हैं। एक तरफ जहां जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा (Statehood) दिलाने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी कैबिनेट के साथ दिल्ली आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के बेरोजगार युवाओं की आवाज़ बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने भी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर एक विशाल और निर्णायक प्रदर्शन का एलान कर दिया है।
इस नाजुक स्थिति के बीच उनका हौसला बढ़ाने के लिए दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज और एक्टिविस्ट चिन्मयी श्रीपदा जैसे लोग जंतर-मंतर पहुंचे हैं। प्रकाश राज ने युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर एकजुटता दिखाई और सरकार की कॉर्पोरेट-परस्त नीतियों और इस मानवीय संकट पर सरकार की लंबी चुप्पी पर तीखे सवाल दागे हैं।
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा करना है। युवाओं की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
सीएम उमर ने केंद्र को संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए वादों की याद दिलाते हुए पूछा:
"अगर जम्मू-कश्मीर की सत्ता और फैसले केवल राजभवन के ही अधीन रखने थे, तो फिर यहाँ करोड़ों रुपये खर्च करके विधानसभा चुनाव कराने का ढोंग क्यों रचा गया? जनता के वोट का क्या मूल्य रह गया?"
उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ 20 जुलाई को दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिससे केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव दोगुना होना तय है।
ये दोनों आंदोलन इस बात का साफ संकेत हैं कि आम जनता, देश का युवा और क्षेत्रीय राज्य सरकारें अब अपने हक को लेकर किसी भी समझौते या आश्वासन के मूड में नहीं हैं। चारों तरफ से घिरी केंद्र सरकार इन दोनों गंभीर मोर्चों से कैसे निपटती है और क्या बातचीत का रास्ता चुनती है, इस पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।
जंतर-मंतर पर वर्तमान स्थिति: 15वें दिन सोनम वांगचुक की सेहत बेहद गंभीर
दिल्ली के जंतर-मंतर पर इस समय देश के कोने-कोने से आए युवा डटे हुए हैं। इस पूरे आंदोलन को सबसे बड़ी नैतिक ताकत सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल से मिल रही है, जो आज अपने 15वें दिन में प्रवेश कर चुकी है। आंदोलन का समर्थन कर रहे आधिकारिक डिजिटल मंच @Cockroachisback द्वारा जारी किए गए ताजा मेडिकल बुलेटिन ने समर्थकों और डॉक्टरों की चिंता को बेहद बढ़ा दिया है।15वें दिन मेडिकल स्थिति की जानकारी
15 दिनों से बिना अन्न और केवल पानी के सहारे रह रहे सोनम वांगचुक के शरीर पर इस लंबे उपवास का बेहद खतरनाक असर पड़ रहा है। सीजेपी द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़ों के मुताबिक:- ब्लड प्रेशर (BP) में भारी गिरावट: सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर लगातार गिरते हुए अब 104/66 mmHg के खतरनाक स्तर पर आ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि इतने कम बीपी के कारण शरीर के मुख्य अंगों (Organs) पर दबाव बढ़ रहा है और उन्हें चक्कर व अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है।
- वजन में रिकॉर्ड कमी: अनशन के इन 15 दिनों के भीतर उनके शरीर का कुल वजन 7.8 किलोग्राम तक कम हो चुका है। मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी के कारण उन्हें उठने-बैठने में भी काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।
Hunger Strike Day 15
— Cockroach is Back (@Cockroachisback) July 12, 2026
Sonam Wangchuk’s health worsens
Blood pressure drops to 104/66
Total weight loss- 7.8 kg pic.twitter.com/m8uu1g3vqF
असह्य परिस्थितियां और बढ़ता जनसमर्थन
चिंता की बात यह है कि दिल्ली की इस भीषण उमस और कड़कड़ाती धूप के बीच भी आंदोलनकारी बिना किसी बुनियादी वीआईपी सुविधाओं, बिजली या पंखे के जंतर-मंतर की खुली सड़कों पर रातें गुजार रहे हैं। इसके बावजूद वांगचुक और युवाओं का हौसला कम नहीं हुआ है।इस नाजुक स्थिति के बीच उनका हौसला बढ़ाने के लिए दिग्गज अभिनेता प्रकाश राज और एक्टिविस्ट चिन्मयी श्रीपदा जैसे लोग जंतर-मंतर पहुंचे हैं। प्रकाश राज ने युवाओं के साथ जमीन पर बैठकर एकजुटता दिखाई और सरकार की कॉर्पोरेट-परस्त नीतियों और इस मानवीय संकट पर सरकार की लंबी चुप्पी पर तीखे सवाल दागे हैं।
20 जुलाई का महा-ऐलान: 'कॉकरोच जनता पार्टी' का आर-पार का मोर्चा
जंतर-मंतर पर चल रहे इस शांत लेकिन गहरे संघर्ष को गति देते हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने अब अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक और व्यापक कर दिया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एलान किया है कि आगामी 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर देश भर के युवाओं का एक ऐतिहासिक महा-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।The Cockroach Janta Party will peacefully march to parliament on 20 July to seek the resignation of Dharmendra Pradhan. #ChaloSansad pic.twitter.com/CBwmZ8prGW
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) July 11, 2026
इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा करना है। युवाओं की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- परीक्षाओं में पारदर्शिता और सुधार: NEET, CBSE, CUET और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक और धांधली पर पूर्ण रोक लगे और इसके दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
- रोजगार की संवैधानिक गारंटी: देश के युवाओं को 'कॉकरोच' यानी उपेक्षित और महत्वहीन समझने वाली सिस्टम की मानसिकता के खिलाफ युवाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार के अवसर दिए जाएं।
- लद्दाख की सुरक्षा और अधिकार: सोनम वांगचुक की मूल मांग के अनुसार, लद्दाख की नाजुक पारिस्थितिकी (Ecology) को बचाने के लिए उसे संविधान की छठी अनुसूची (6th Schedule) के तहत पर्यावरण कवच और राज्य का अधिकार प्रदान किया जाए।
उसी दिन दूसरा मोर्चा: J&K स्टेटहुड के लिए उमर अब्दुल्ला का दिल्ली कूच
दिलचस्प और रणनीतिक बात यह है कि जिस दिन यानी 20 जुलाई को युवाओं की 'कॉकरोच सेना' जंतर-मंतर पर महा-प्रदर्शन करेगी, ठीक उसी दिन जम्मू-कश्मीर की नवनिर्वाचित सरकार भी दिल्ली की सड़कों पर केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने राज्य का दर्जा बहाल कराने के लिए आर-पार की जंग का एलान किया है।बीजेपी पर 'बैक डोर पॉलिटिक्स' का सनसनीखेज आरोप
जम्मू में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव नहीं जीत पाती, तो 'बैक डोर पॉलिटिक्स' (पीछे के दरवाजे की राजनीति) के जरिए राजभवन और उपराज्यपाल (LG) का इस्तेमाल कर चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को पंगु बनाने की कोशिश करती है।सीएम उमर ने केंद्र को संसद और सुप्रीम कोर्ट में किए गए वादों की याद दिलाते हुए पूछा:
"अगर जम्मू-कश्मीर की सत्ता और फैसले केवल राजभवन के ही अधीन रखने थे, तो फिर यहाँ करोड़ों रुपये खर्च करके विधानसभा चुनाव कराने का ढोंग क्यों रचा गया? जनता के वोट का क्या मूल्य रह गया?"
उमर अब्दुल्ला और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं, विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों के साथ 20 जुलाई को दिल्ली में बड़ा विरोध प्रदर्शन करेंगे, जिससे केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव दोगुना होना तय है।
20 जुलाई को थम जाएगी दिल्ली? सरकार के सामने दोहरी चुनौती
जुलाई 2026 का यह महीना देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक टर्निंग पॉइंट के रूप में दर्ज होने जा रहा है। विशेष रूप से 20 जुलाई की तारीख दिल्ली और केंद्र सरकार के लिए बेहद संवेदनशील होगी। एक तरफ जहां 15 दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक (जिनका वजन 7.8 किलो गिर चुका है) के समर्थन में 'कॉकरोच जनता पार्टी' की युवा शक्ति जंतर-मंतर को हिलाएगी, वहीं दूसरी तरफ संघीय ढांचे (Federal Structure) और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर एक मौजूदा मुख्यमंत्री (उमर अब्दुल्ला) दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगे।ये दोनों आंदोलन इस बात का साफ संकेत हैं कि आम जनता, देश का युवा और क्षेत्रीय राज्य सरकारें अब अपने हक को लेकर किसी भी समझौते या आश्वासन के मूड में नहीं हैं। चारों तरफ से घिरी केंद्र सरकार इन दोनों गंभीर मोर्चों से कैसे निपटती है और क्या बातचीत का रास्ता चुनती है, इस पर अब पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।