
यह फिल्म लगभग 4 साल तक सेंसर बोर्ड (CBFC) के साथ लंबी कानूनी और वैचारिक लड़ाई लड़ती रही। आखिरकार, जब 3 जुलाई 2026 को इसे बिना किसी कट के सीधे OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, तो सिनेमा प्रेमियों को लगा कि सच की जीत हुई है। लेकिन यह राहत महज 48 घंटे ही टिक सकी। 5 जुलाई की शाम को अचानक इस फिल्म को भारत में ZEE5 से हटा (Take Down) दिया गया।
सरकार के इस आदेश के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। मशहूर फिल्म मेकर्स अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) और राम गोपाल वर्मा (Ram Gopal Varma) ने इस बैन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है और इसकी तुलना ईरान जैसे देशों की सख्त सेंसरशिप से कर दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है 'सतलुज' फिल्म का पूरा विवाद, यह किस पर आधारित है और सरकार ने इसे क्यों हटाया?
फिल्म 'सतलुज' में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है, जबकि अर्जुन रामपाल ने पुलिस व्यवस्था और उसके भीतर के नैतिक पतन को पर्दे पर उतारा है।
सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने IT रूल्स 2021 (Information Technology Rules, 2021) के पार्ट-III के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे हटाने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि:
इसके जवाब में फिल्म के सह-निर्माता रॉनी स्क्रूवाला की कंपनी (RSVP Movies) और लेखक वरुण भट्ट ने कहा कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। यह न्याय और मानवाधिकारों की एक मानवीय कहानी है। उन्होंने सवाल उठाया कि "अगर 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फिल्में बिना किसी रोक-टोक के चल सकती हैं, तो एक सच्ची जीवनी पर आधारित फिल्म को अंतरराष्ट्रीय ताकतों का टूल मानकर क्यों दबाया जा रहा है?" मेकर्स अब इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
"‘पंजाब 95’ हाल के दिनों में मेरे द्वारा देखी गई सबसे मजबूत और बेहतरीन फिल्मों में से एक है। आखिरकार यह @zee5 पर बिना किसी कट के रिलीज हो गई है.. नाम बदल गया है 'सतलुज'.. फिल्म वही है। प्राथमिकता के आधार पर इसे आज के आज ही देखो। पावरफुल। बोल्ड। अविस्मरणीय।"
अनुराग कश्यप के इस पोस्ट से साफ था कि फिल्म इंडस्ट्री इस फिल्म को लेकर कितनी उत्साहित थी, लेकिन इसके तुरंत बाद फिल्म को हटा दिया गया, जिसने इस विवाद को और बड़ा बना दिया।
"मैंने अभी 'सतलुज' देखी और यह कोई फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐसा गहरा जख्म है जो कभी नहीं भरेगा। यह हमारे इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक की गंदगी को खंगालती है। यह सिनेमा का इस्तेमाल एक टकराव के रूप में है, जहां दिलजीत दोसांझ बिना किसी बनावटी हीरोइज्म के शांत गुस्से के साथ अभिनय करते हैं। उनके पास केवल एक बहीखाता (लेजर) और उनकी अंतरात्मा ही हथियार हैं।"
RGV ने निर्देशक हनी त्रेहान की भी सराहना की कि उन्होंने इस डरावने सच को सनसनीखेज बनाने के बजाय एक स्लो-बर्न इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर की तरह पेश किया है।
"#ichallengethedarkness (मैं अंधेरे को चुनौती देता हूँ) 🪔 शहीद जसवंत सिंह खालरा जी 🙏🏽 'सतलुज' के साथ भी वही हुआ जो खालरा साहब के साथ हुआ था।"
दिलजीत ने पूर्व में वैराइटी (Variety) को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि यह उनके करियर की सबसे कठिन फिल्मों में से एक रही है। जसवंत सिंह खालरा के किरदार को जीने के बाद उन्हें मानसिक रूप से सामान्य होने में एक हफ्ते से अधिक का समय लगा था। दिलजीत का मानना है कि इंटरनेट के इस दौर में किसी आवाज को दबाया नहीं जा सकता; आप जितना इसे रोकने की कोशिश करेंगे, यह उतनी ही वायरल होगी।
फिलहाल, फिल्म के मेकर्स अदालत जाने की तैयारी में हैं, ठीक उसी तरह जैसे 'उड़ता पंजाब' के समय मेकर्स ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 94 कट्स के आदेश के बावजूद फिल्म महज 1 कट के साथ रिलीज हुई थी। अब देखना यह होगा कि भारतीय न्यायपालिका 'सतलुज' को भारतीय दर्शकों के लिए दोबारा बहाल करती है या अभिव्यक्ति की आजादी का यह मामला इतिहास के पन्नों में ही दफन हो जाएगा।
सरकार के इस आदेश के बाद पूरी फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल आ गया है। मशहूर फिल्म मेकर्स अनुराग कश्यप (Anurag Kashyap) और राम गोपाल वर्मा (Ram Gopal Varma) ने इस बैन के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है और इसकी तुलना ईरान जैसे देशों की सख्त सेंसरशिप से कर दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर क्या है 'सतलुज' फिल्म का पूरा विवाद, यह किस पर आधारित है और सरकार ने इसे क्यों हटाया?
क्या है 'सतलुज' (Punjab 95) की असली कहानी?
'सतलुज' फिल्म का विवाद समझने के लिए सबसे पहले इसकी कहानी और इसके पीछे के इतिहास को समझना जरूरी है। हनी त्रेहान (Honey Trehan) द्वारा निर्देशित यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा (Jaswant Singh Khalra) की बायोपिक है।कौन थे जसवंत सिंह खालरा?
1990 के दशक में, जब पंजाब उग्रवाद और अशांति के दौर से गुजर रहा था, तब जसवंत सिंह खालरा ने एक बेहद संवेदनशील मामले की जांच की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस ने हजारों लावारिस शवों का अवैध रूप से अंतिम संस्कार कर दिया था, जिनमें कई निर्दोष लोग भी शामिल थे। उनकी इस खोजी रिपोर्ट ने देश-दुनिया को हिलाकर रख दिया था। लेकिन सितंबर 1995 में, जसवंत सिंह खालरा रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। बाद में जांच में सामने आया कि उनका अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई थी। साल 2005 में इस मामले में कई पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा हुई।फिल्म 'सतलुज' में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है, जबकि अर्जुन रामपाल ने पुलिस व्यवस्था और उसके भीतर के नैतिक पतन को पर्दे पर उतारा है।
नाम बदलने से लेकर 127 कट्स तक: सेंसर बोर्ड के साथ 4 साल की जंग
यह फिल्म साल 2022 से ही विवादों में घिरी हुई है। मेकर्स ने इस फिल्म को कई बार रिलीज करने की कोशिश की, लेकिन हर बार इसे रोक दिया गया। इस फिल्म के सफर को हम तीन बड़े बदलावों से समझ सकते हैं:- 'घल्लूघारा' (Ghallughara) से शुरुआत: फिल्म का मूल नाम 'घल्लूघारा' रखा गया था, जो सिख इतिहास में हुए नरसंहारों (जैसे 1746, 1762 और 1984) के लिए इस्तेमाल होने वाला एक बेहद संवेदनशील शब्द है। सेंसर बोर्ड (CBFC) ने इस नाम पर आपत्ति जताई और 21 कट्स के साथ नाम बदलने का आदेश दिया।
- 'पंजाब 95' (Panjab 95) और 127 कट्स का दबाव: इसके बाद फिल्म का नाम बदलकर 'पंजाब 95' किया गया। इस नाम के साथ फिल्म को 2023 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (TIFF) में प्रीमियर के लिए भेजा गया था, लेकिन भारतीय अधिकारियों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी आपत्तियों के बाद इसे वहां से वापस ले लिया गया। सेंसर बोर्ड ने इस बार फिल्म में 127 कट्स लगाने की मांग की। बोर्ड चाहता था कि जसवंत सिंह खालरा का नाम बदला जाए, पंजाब पुलिस और भारत के झंडे से जुड़े संदर्भ हटाए जाएं। मेकर्स ने इतने कट्स मानने से इनकार कर दिया, जिससे फिल्म अधर में लटक गई।
- 'सतलुज' (Satluj) नाम से सीक्रेट OTT रिलीज: आखिरकार, मेकर्स ने बिना सेंसर बोर्ड की परवाह किए (क्योंकि OTT प्लेटफॉर्म सीधे CBFC के दायरे में नहीं आते) फिल्म को 'सतलुज' नाम दिया और 3 जुलाई 2026 को ZEE5 पर चुपचाप बिना किसी कट के रिलीज कर दिया।
सरकार ने क्यों लगाया बैन? क्या हैं 'सुरक्षा चिंताएं'?
रिलीज के महज दो दिन बाद, यानी 5 जुलाई 2026 को भारत सरकार के निर्देश पर ZEE5 ने इस फिल्म को भारत में ब्लॉक कर दिया। हालांकि, यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (ZEE5 Global) अभी भी देखी जा सकती है।सरकारी सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार ने IT रूल्स 2021 (Information Technology Rules, 2021) के पार्ट-III के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इसे हटाने का आदेश दिया है। सरकार का कहना है कि:
- फिल्म को बिना तय नियमों के, सेंसर बोर्ड की आपत्तियों को दरकिनार कर सीधे OTT पर रिलीज किया गया।
- फिल्म की संवेदनशील सामग्री से पंजाब और देश की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था (Security Concerns) प्रभावित हो सकती है।
- सरकार को डर था कि इस फिल्म के नैरेटिव का इस्तेमाल कुछ असामाजिक या विदेशी ताकतें देश विरोधी प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए कर सकती हैं।
इसके जवाब में फिल्म के सह-निर्माता रॉनी स्क्रूवाला की कंपनी (RSVP Movies) और लेखक वरुण भट्ट ने कहा कि फिल्म में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। यह न्याय और मानवाधिकारों की एक मानवीय कहानी है। उन्होंने सवाल उठाया कि "अगर 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरला स्टोरी' जैसी फिल्में बिना किसी रोक-टोक के चल सकती हैं, तो एक सच्ची जीवनी पर आधारित फिल्म को अंतरराष्ट्रीय ताकतों का टूल मानकर क्यों दबाया जा रहा है?" मेकर्स अब इस फैसले के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं।
अनुराग कश्यप ने फ़िल्म की जमकर की तारीफ
अपनी बेबाक राय के लिए जाने जाने वाले दिग्गज निर्देशक अनुराग कश्यप ने फिल्म 'सतलुज' के ZEE5 पर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर इसकी जमकर तारीफ की थी और इसे एक बेहद साहसी सिनेमा बताया था। उन्होंने फिल्म को सपोर्ट करते हुए लिखा:"‘पंजाब 95’ हाल के दिनों में मेरे द्वारा देखी गई सबसे मजबूत और बेहतरीन फिल्मों में से एक है। आखिरकार यह @zee5 पर बिना किसी कट के रिलीज हो गई है.. नाम बदल गया है 'सतलुज'.. फिल्म वही है। प्राथमिकता के आधार पर इसे आज के आज ही देखो। पावरफुल। बोल्ड। अविस्मरणीय।"
अनुराग कश्यप के इस पोस्ट से साफ था कि फिल्म इंडस्ट्री इस फिल्म को लेकर कितनी उत्साहित थी, लेकिन इसके तुरंत बाद फिल्म को हटा दिया गया, जिसने इस विवाद को और बड़ा बना दिया।
फ़िल्म बैन होने पर गोपाल वर्मा का फूटा गुस्सा
फिल्म 'सतलुज' के इस तरह अचानक डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाए जाने पर बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशकों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
राम गोपाल वर्मा ने बताया 'गहरा जख्म'
वहीं, राम गोपाल वर्मा (RGV) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म की जमकर तारीफ की और इसे सिनेमा का एक बेहतरीन और साहसी रूप बताया। उन्होंने लिखा:"मैंने अभी 'सतलुज' देखी और यह कोई फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐसा गहरा जख्म है जो कभी नहीं भरेगा। यह हमारे इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक की गंदगी को खंगालती है। यह सिनेमा का इस्तेमाल एक टकराव के रूप में है, जहां दिलजीत दोसांझ बिना किसी बनावटी हीरोइज्म के शांत गुस्से के साथ अभिनय करते हैं। उनके पास केवल एक बहीखाता (लेजर) और उनकी अंतरात्मा ही हथियार हैं।"
Just saw SATLUJ and it is not a film , but a deep wound that will never heal. It stirs up the sludge in one of the darkest chapters of our history
— Ram Gopal Varma (@RGVzoomin) July 7, 2026
This is cinema used as confrontation , where @diljitdosanjh acts with a quiet fury with no chest thumping heroism.. His only weapons…
RGV ने निर्देशक हनी त्रेहान की भी सराहना की कि उन्होंने इस डरावने सच को सनसनीखेज बनाने के बजाय एक स्लो-बर्न इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर की तरह पेश किया है।
दिलजीत दोसांझ का कड़ा संदेश: "मैं अंधेरे को चुनौती देता हूँ"
अपनी फिल्म को OTT से हटाए जाने के बाद दिलजीत दोसांझ काफी भावुक और आक्रामक नजर आए। उन्होंने इंस्टाग्राम पर फिल्म का एक सीन शेयर करते हुए पंजाबी में लिखा, जिसका हिंदी अनुवाद है:"#ichallengethedarkness (मैं अंधेरे को चुनौती देता हूँ) 🪔 शहीद जसवंत सिंह खालरा जी 🙏🏽 'सतलुज' के साथ भी वही हुआ जो खालरा साहब के साथ हुआ था।"
दिलजीत ने पूर्व में वैराइटी (Variety) को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि यह उनके करियर की सबसे कठिन फिल्मों में से एक रही है। जसवंत सिंह खालरा के किरदार को जीने के बाद उन्हें मानसिक रूप से सामान्य होने में एक हफ्ते से अधिक का समय लगा था। दिलजीत का मानना है कि इंटरनेट के इस दौर में किसी आवाज को दबाया नहीं जा सकता; आप जितना इसे रोकने की कोशिश करेंगे, यह उतनी ही वायरल होगी।
क्या 'सतलुज' को मिल पाएगा इंसाफ?
पंजाब की राजनीति में भी इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है। शिरोमणि अकाली दल (SAD), कांग्रेस और पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) समेत शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने इस बैन की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को पंजाब के इतिहास के उस काले दौर का सच जानने का पूरा हक है।फिलहाल, फिल्म के मेकर्स अदालत जाने की तैयारी में हैं, ठीक उसी तरह जैसे 'उड़ता पंजाब' के समय मेकर्स ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और 94 कट्स के आदेश के बावजूद फिल्म महज 1 कट के साथ रिलीज हुई थी। अब देखना यह होगा कि भारतीय न्यायपालिका 'सतलुज' को भारतीय दर्शकों के लिए दोबारा बहाल करती है या अभिव्यक्ति की आजादी का यह मामला इतिहास के पन्नों में ही दफन हो जाएगा।