उत्तर प्रदेश सरकार ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर 7 अक्टूबर 2025 को पूरे राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस फैसले से सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज तथा शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। यह घोषणा वाल्मीकि समाज की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने का कदम है, जिससे समाज में उत्साह का माहौल है।
मुख्यमंत्री ने श्रावस्ती जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस राजकीय छुट्टी की औपचारिक घोषणा की। कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में योगी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण के रचयिता हैं और उनकी जयंती पर अवकाश घोषित करना उचित है। यह अवकाश राज्य के सभी जिलों में लागू होगा, जिसमें लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा समेत हर क्षेत्र शामिल है। अभिभाषकों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने संस्थानों से छुट्टी की पुष्टि अवश्य कर लें, क्योंकि कुछ स्थानीय स्तर पर बदलाव हो सकते हैं।
ऐतिहासिक रूप से, महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश की परंपरा पुरानी है, लेकिन कुछ वर्षों पहले इसे रद्द कर दिया गया था। वाल्मीकि समाज ने बार-बार इसकी बहाली की मांग उठाई, जिसमें धरना-प्रदर्शन भी शामिल थे। योगी सरकार का यह निर्णय सामाजिक समावेशिता को मजबूत करने का संदेश देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वंचित वर्गों में सकारात्मक संदेश जाएगा।
इसके अलावा, दशहरा उत्सव के चलते 1 और 2 अक्टूबर को भी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। कुछ जिलों में दुर्गा अष्टमी (3 अक्टूबर) पर भी छुट्टी की संभावना है। शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं कि छुट्टियों के दौरान सुरक्षा और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं।
यह घोषणा न केवल शैक्षणिक कैलेंडर को प्रभावित करेगी, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों को भी बढ़ावा देगी। वाल्मीकि जयंती पर राज्यभर में कार्यक्रम आयोजित होंगे, जहां रामायण पाठ और सांस्कृतिक आयोजन प्रमुख होंगे। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अवकाश के पालन की सख्ती से निगरानी करने के आदेश दिए हैं। छात्रों के बीच यह खबर उत्साह लेकर आई है, लेकिन अभिभावक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। कुल मिलाकर, यह निर्णय सामाजिक न्याय और परंपरा के संरक्षण का प्रतीक बनेगा।
मुख्यमंत्री ने श्रावस्ती जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस राजकीय छुट्टी की औपचारिक घोषणा की। कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में योगी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि रामायण के रचयिता हैं और उनकी जयंती पर अवकाश घोषित करना उचित है। यह अवकाश राज्य के सभी जिलों में लागू होगा, जिसमें लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, आगरा समेत हर क्षेत्र शामिल है। अभिभाषकों और छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने-अपने संस्थानों से छुट्टी की पुष्टि अवश्य कर लें, क्योंकि कुछ स्थानीय स्तर पर बदलाव हो सकते हैं।
ऐतिहासिक रूप से, महर्षि वाल्मीकि जयंती पर अवकाश की परंपरा पुरानी है, लेकिन कुछ वर्षों पहले इसे रद्द कर दिया गया था। वाल्मीकि समाज ने बार-बार इसकी बहाली की मांग उठाई, जिसमें धरना-प्रदर्शन भी शामिल थे। योगी सरकार का यह निर्णय सामाजिक समावेशिता को मजबूत करने का संदेश देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वंचित वर्गों में सकारात्मक संदेश जाएगा।
इसके अलावा, दशहरा उत्सव के चलते 1 और 2 अक्टूबर को भी स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। कुछ जिलों में दुर्गा अष्टमी (3 अक्टूबर) पर भी छुट्टी की संभावना है। शिक्षा विभाग ने सभी संस्थानों को निर्देश जारी किए हैं कि छुट्टियों के दौरान सुरक्षा और सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं।
यह घोषणा न केवल शैक्षणिक कैलेंडर को प्रभावित करेगी, बल्कि सांस्कृतिक उत्सवों को भी बढ़ावा देगी। वाल्मीकि जयंती पर राज्यभर में कार्यक्रम आयोजित होंगे, जहां रामायण पाठ और सांस्कृतिक आयोजन प्रमुख होंगे। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अवकाश के पालन की सख्ती से निगरानी करने के आदेश दिए हैं। छात्रों के बीच यह खबर उत्साह लेकर आई है, लेकिन अभिभावक सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। कुल मिलाकर, यह निर्णय सामाजिक न्याय और परंपरा के संरक्षण का प्रतीक बनेगा।