बांग्लादेश में एक बार फिर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है. जशोर जिले के मोनिरामपुर उपज़िला स्थित कोपालिया बाज़ार में सोमवार शाम करीब 5:45 बजे एक हिंदू व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान 45 वर्षीय राणा प्रताप बैरागी के रूप में हुई है, जो केशबपुर उपज़िला के अरुआ गांव के रहने वाले थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, राणा प्रताप बाजार में मौजूद थे तभी अज्ञात हमलावरों ने उन पर अचानक गोलियां चला दीं. गंभीर रूप से घायल राणा प्रताप की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि हमलावर फरार हो गए.
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तीन हफ्तों में पांचवीं हिंसक घटना
यह घटना कोई अकेली वारदात नहीं है. बीते तीन हफ्तों में हिंदू समुदाय के खिलाफ यह पांचवीं गंभीर हिंसा बताई जा रही है. इससे पहले 18 दिसंबर को माइमेंसिंग में एक हिंदू युवक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इसके बाद पांग्शा उपज़िला में ईशनिंदा के आरोप में एक अन्य व्यक्ति को मार दिया गया. अलग-अलग इलाकों में गोलीबारी, भीड़ हिंसा और आगजनी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे हालात और भी चिंताजनक हो गए हैं.
पुलिस जांच में जुटी, लेकिन सवाल बरकरार
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया. पुलिस का कहना है कि हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जांच जारी है. हालांकि, लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बावजूद अपराधियों का पकड़े न जाना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है.
भारत समेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता
बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने भी गंभीर चिंता जताई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि हिंदू, ईसाई और बौद्ध समुदायों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर बारीकी से नजर रखी जा रही है. मानवाधिकार संगठनों ने भी बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
सांप्रदायिक संतुलन के लिए खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश के सामाजिक और सांप्रदायिक संतुलन के लिए खतरा बन सकती हैं. अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अल्पसंख्यक समुदाय में भय और असुरक्षा और गहरी होती जाएगी.