
रूस ने इस कदम को अत्यधिक दबाव की राजनीति बताया है। Kremlin के प्रवक्ता ने कहा कि किसी पूर्व राष्ट्राध्यक्ष के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ा सकती है। रूस का मानना है कि देशों के बीच मतभेदों को राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से सुलझाया जाना चाहिए।
वहीं चीन ने भी अमेरिका की नीति पर सवाल उठाए हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि किसी देश पर लगातार प्रतिबंध और दबाव बनाना समस्या का समाधान नहीं है। चीन ने क्यूबा के प्रति अपने समर्थन को दोहराते हुए कहा कि बाहरी हस्तक्षेप से बचना जरूरी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका और क्यूबा के संबंध फिर चर्चा में आ गए हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका ने क्यूबा पर कई आर्थिक और राजनीतिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों के कारण क्यूबा में ईंधन संकट, बिजली कटौती और खाद्य आपूर्ति जैसी समस्याएं बढ़ी हैं।
क्यूबा सरकार ने राउल कास्त्रो पर लगे आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताया है। क्यूबा का कहना है कि यह कार्रवाई देश पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, रूस, चीन और क्यूबा के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। खासकर ऐसे समय में जब दुनिया पहले से कई बड़े भू-राजनीतिक संघर्षों का सामना कर रही है, यह विवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और जटिल बना सकता है।
लैटिन अमेरिकी राजनीति पर नजर रखने वाले जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में इस मुद्दे पर अमेरिका और उसके विरोधी देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।