दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) के चौथे वर्ष के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए वाइवा (Viva) के लिए वीडियो जमा करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। विश्वविद्यालय के इस फैसले से उन छात्रों को काफी राहत मिलेगी, जिन्हें 30 मिनट का वीडियो प्रस्तुतीकरण तैयार कर जमा करना पड़ता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले चौथे वर्ष के छात्रों को अपने एंड-टर्म असेसमेंट के हिस्से के रूप में वीडियो प्रस्तुति जमा करनी होती थी। इस व्यवस्था को लेकर छात्रों और शिक्षकों के बीच लगातार असंतोष देखने को मिल रहा था। कई छात्रों का कहना था कि वीडियो रिकॉर्डिंग, एडिटिंग और अपलोडिंग की प्रक्रिया समय लेने वाली और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इस प्रावधान को वापस लेते हुए कहा है कि चौथे वर्ष के छात्रों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाया जाएगा। इस फैसले के बाद छात्रों को अब अनिवार्य वीडियो प्रस्तुति जमा नहीं करनी होगी।
डीयू का चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू किया गया है। इस प्रणाली में छात्रों को चौथे वर्ष में रिसर्च, ऑनर्स और अन्य विशेष ट्रैक चुनने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों और शिक्षकों ने सवाल उठाए थे।
शिक्षकों और छात्र संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वीडियो प्रस्तुति की अनिवार्यता कई छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक और तकनीकी दबाव पैदा कर रही थी। खासकर उन छात्रों को परेशानी हो रही थी जिनके पास बेहतर इंटरनेट, रिकॉर्डिंग उपकरण या तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय का यह फैसला छात्रों के हित में है और इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और छात्र-अनुकूल बनेगी। हालांकि, अब भी चौथे वर्ष के पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई स्तरों पर चर्चा जारी है।
डीयू प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय लगातार नई शिक्षा नीति के तहत लागू व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है और छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब इस प्रावधान को वापस लेते हुए कहा है कि चौथे वर्ष के छात्रों के मूल्यांकन की प्रक्रिया को सरल और व्यावहारिक बनाया जाएगा। इस फैसले के बाद छात्रों को अब अनिवार्य वीडियो प्रस्तुति जमा नहीं करनी होगी।
डीयू का चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू किया गया है। इस प्रणाली में छात्रों को चौथे वर्ष में रिसर्च, ऑनर्स और अन्य विशेष ट्रैक चुनने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद कई प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों और शिक्षकों ने सवाल उठाए थे।
शिक्षकों और छात्र संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि वीडियो प्रस्तुति की अनिवार्यता कई छात्रों के लिए अतिरिक्त मानसिक और तकनीकी दबाव पैदा कर रही थी। खासकर उन छात्रों को परेशानी हो रही थी जिनके पास बेहतर इंटरनेट, रिकॉर्डिंग उपकरण या तकनीकी संसाधन उपलब्ध नहीं थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि विश्वविद्यालय का यह फैसला छात्रों के हित में है और इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और छात्र-अनुकूल बनेगी। हालांकि, अब भी चौथे वर्ष के पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई स्तरों पर चर्चा जारी है।
डीयू प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय लगातार नई शिक्षा नीति के तहत लागू व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहा है और छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक बदलाव किए जा रहे हैं।
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