राजधानी दिल्ली में ड्रग्स और नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने तथा इससे जुड़े मामलों की जांच को और अधिक सटीक बनाने के लिए दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने शनिवार को एक विशेष कदम उठाया। क्राइम ब्रांच की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स विंग द्वारा 20 जून 2026 को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के आदर्श ऑडिटोरियम में सुबह 11:00 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 पर एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों के ज्ञान, कानूनी समझ और खोजी कौशल को और अधिक मजबूत करना था। इस महत्वपूर्ण सत्र में दिल्ली पुलिस के कुल 71 अधिकारियों ने हिस्सा लिया, जिनमें असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस, इंस्पेक्टर और सब-इस्पेक्टर शामिल थे।
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देश के जाने-माने कानूनी और कानून प्रवर्तन विशेषज्ञों ने दिए टिप्स
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कानून और नारकोटिक्स प्रवर्तन क्षेत्र के कई दिग्गज वक्ताओं को आमंत्रित किया गया था, जिन्होंने अलग-अलग सत्रों में अधिकारियों का मार्गदर्शन किया। इसी कड़ी में दिल्ली हाईकोर्ट के एडिशनल पब्लिक प्रोसक्यूटर श्री अमन उस्मान ने एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों, कानूनी ढांचे और महत्वपूर्ण न्यायिक पहलुओं पर एक विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने अधिकारियों को बारीकी से समझाया कि कोर्ट में केस को मजबूत करने के लिए किन कानूनी कड़ियों को जोड़ना सबसे जरूरी होता है। संगठित ड्रग तस्करी पर लगाम कसने के उद्देश्य से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की नॉर्न रेंज की स्पेशल पब्लिक प्रोसक्यूटर सुश्री जीनत मलिक ने प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट पर प्रकाश डाला। उन्होंने निवारक नजरबंदी और संगठित ड्रग सिंडिकेट की कमर तोड़ने में इस एक्ट के महत्व को रेखांकित किया।
इसके साथ ही, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रवीण राठी ने मादक पदार्थों के मामलों में वित्तीय जांच पर एक बेहद महत्वपूर्ण सत्र लिया। उन्होंने अपराध से होने वाली कमाई की पहचान करने, मनी ट्रेल यानी पैसों के लेन-देन को ट्रैक करने और वित्तीय खुफिया जानकारी के माध्यम से जांच को पुख्ता करने के तरीकों पर विशेष जोर दिया। डिजिटल मोर्चे पर अधिकारियों को मजबूत करने के लिए एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स क्राइम ब्रांच के ही इंस्पेक्टर राकेश दुहान ने दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर नए विकसित किए गए 'एएनटीएफ पोर्टल' से सभी को रूबरू कराया। उन्होंने इस पोर्टल की विशेषताओं और उपयोगिता को समझाते हुए बताया कि यह नशीले पदार्थों के नियंत्रण में लगी विभिन्न एजेंसियों के बीच डेटा संग्रह, ज्ञान साझा करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने में कितना मददगार साबित होगा।
अधिकारियों की शंकाओं का हुआ समाधान
तीन घंटे चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान एनडीपीएस मामलों की जांच, अभियोजन, निवारक नजरबंदी और वित्तीय पहलुओं से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने हाल के दिनों में हुए कानूनी बदलावों और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा किया ताकि मामलों को अदालतों में मजबूती से साबित किया जा सके और अपराधियों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
लगातार क्षमता निर्माण की दिशा में एक कदम
दिल्ली पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गौरव गुप्ता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दिल्ली पुलिस द्वारा अपने जांच अधिकारियों की क्षमताओं को लगातार बढ़ाने के लिए चलाई जा रही मुहिम का हिस्सा है। इस तरह के आयोजनों से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में नशीले पदार्थों के खिलाफ कानून प्रवर्तन को अधिक प्रभावी और सख्त बनाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में भाग लेने वाले सभी अधिकारियों ने इस पहल की सराहना की और माना कि इससे ड्रग्स से जुड़े अपराधों को सुलझाने में उनकी कानूनी और तकनीकी समझ काफी बेहतर हुई है।