तिरंगा फहराने पर पुलिस कार्रवाई: अभिजीत दीपके और नेहा बोरा की हिरासत पर भड़के केजरीवाल और ममता बनर्जी, ध्रुव राठी ने लंदन से किया विरोध का आह्वान

देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और आईसा (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रमुख छात्र नेत्री नेहा बोरा को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस पूरी घटना के सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मशहूर यूट्यूबर व राजनीतिक विश्लेषक ध्रुव राठी ने भी इस दमनकारी कार्रवाई को लेकर सरकार पर कड़े प्रहार किए हैं। नेहा बोरा के हिरासत में होने के कारण उनके सोशल मीडिया हैंडल का संचालन उनके सहयोगियों द्वारा किया जा रहा है, जिसके जरिए लगातार पुलिस हिरासत और प्रशासनिक कार्रवाई की पल-पल की अपडेट साझा की जा रही है।

तिरंगा फहराने पर पुलिस कार्रवाई: अभिजीत दीपके और नेहा बोरा की हिरासत पर भड़के केजरीवाल और ममता बनर्जी, ध्रुव राठी ने लंदन से किया विरोध का आह्वान
Image Source: Social Media and The Red Mike

अभिजीत दीपके और नेहा बोरा की हिरासत के बाद सोशल मीडिया पर उबाल

कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र संगठनों के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से लगातार गंभीर बयान जारी किए जा रहे हैं। पार्टी के बयानों के मुताबिक अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने के बाद घंटों तक उनके ठिकाने के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिसे लेकर समर्थकों में भारी आक्रोश है। वहीं छात्र नेत्री नेहा बोरा की हिरासत के बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट को उनके सहयोगी संभाल रहे हैं, जिनके माध्यम से यह जानकारी सामने आई कि उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन में रखा गया है और पुलिस कार्रवाई के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। समर्थकों का आरोप है कि पुलिस प्रशासन युवाओं की आवाज को दबाने के लिए लगातार अलोकतांत्रिक हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है।


अरविंद केजरीवाल का कड़ा बयान और केंद्र सरकार पर हमला

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बेहद कड़े शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराते हुए लिखा कि यदि हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं लहराएंगे तो क्या पाकिस्तान जाकर लहराएंगे। उन्होंने सरकार और व्यवस्था से सीधा सवाल किया कि जिन्हें भारतीय तिरंगे से परेशानी है, वे खुद पाकिस्तान क्यों नहीं चले जाते। केजरीवाल के इस आक्रामक बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रीय ध्वज फहराने और लोकतांत्रिक विरोध दर्ज कराने वाले युवाओं को इस तरह निशाना बनाना तानाशाही का स्पष्ट प्रमाण है।

ममता बनर्जी का तीखा तंज, इसे बताया अघोषित आपातकाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के इस रवैये की कड़ी निंदा की है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि आखिर दिल्ली पुलिस किस प्रकार के आदेशों पर काम कर रही है, जहां स्वतंत्र भारत में युवाओं को सिर्फ राष्ट्रीय ध्वज फहराने और लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करने पर गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरी स्थिति को 'अघोषित आपातकाल' करार देते हुए कहा कि जो सरकार असहमतियों के स्वरों से डरती है, वह संपूर्ण युवा पीढ़ी को भयभीत कर खामोश करना चाहती है। उन्होंने साफ कहा कि यह एक फासीवादी शासन का स्पष्ट आचरण है जो किसी भी स्वतंत्र आवाज को बर्दाश्त नहीं कर सकता। ममता बनर्जी ने हिरासत में मौजूद अभिजीत, नेहा, आशुतोष और सौरव जैसे युवाओं की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि कोई भी सरकारी ताकत देश के लोकतंत्र और युवाओं के बुलंद हौसलों को कुचल नहीं सकती।

ध्रुव राठी का अंतरराष्ट्रीय मंच से विरोध प्रदर्शन का ऐलान

इस राजनीतिक और सामाजिक संकट की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। प्रसिद्ध यूट्यूबर और विश्लेषक ध्रुव राठी ने लंदन पहुंचते ही इस दमनकारी कार्रवाई के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज कराया है। ध्रुव राठी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश के जरिए दुनिया भर के लोगों का ध्यान इस बात की ओर आकर्षित किया है कि देश के भीतर किस प्रकार लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंटा जा रहा है। उन्होंने लंदन में रह रहे तमाम भारतीयों और न्यायप्रिय नागरिकों से अपील की है कि वे महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने पार्लियामेंट स्क्वायर में एकत्र होकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लें और इस तानाशाही के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करें।

देश में गहराता राजनीतिक तनाव और लोकतंत्र पर मंडराते सवाल

अभिजीत दीपके और नेहा बोरा समेत तमाम युवा नेताओं की लगातार हो रही हिरासत के बाद देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया है। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार जनहित और संविधान विरोधी नीतियों पर से ध्यान भटकाने के लिए पुलिस बल का बेजा इस्तेमाल कर रही है। तिरंगा फहराने जैसे आयोजनों पर इस तरह की पुलिसिया सख्ती ने देश के संघीय ढांचे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप ले सकता है, क्योंकि देश का युवा वर्ग अब इस कार्रवाई के विरोध में खुलकर सड़कों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उतर रहा है।

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