आजमगढ़ वोटर लिस्ट विवाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बड़ा एक्शन; ERO, ARO समेत कई अधिकारियों पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 347-आजमगढ़ की मतदाता सूची में एक ही नाम के कई बार दर्ज होने का मामला देश भर में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। लोकतंत्र के सबसे बड़े आधार यानी मतदाता सूची की शुद्धता पर उठे सवालों के बाद निर्वाचन आयोग ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। समाजवादी पार्टी द्वारा इस गंभीर अनियमितता को लेकर उठाए गए सवालों के बाद निर्वाचन आयोग ने त्वरित और कड़ा संज्ञान लेते हुए अपनी विस्तृत जांच पूरी कर ली है और इसमें लिप्त पाए गए जिम्मेदार कर्मचारियों तथा अधिकारियों पर प्रशासनिक गाज गिराई है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में गंभीर लापरवाही और पदीय दायित्वों के निर्वहन में भारी चूक बरतने वाले कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों को मतदाता सूची के तमाम कार्यों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, इन सभी को सेवा से बर्खास्त किए जाने के संबंध में आधिकारिक नोटिस भी जारी कर दिए गए हैं, जो चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी तरह से स्पष्ट करते हैं।

आजमगढ़ वोटर लिस्ट विवाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बड़ा एक्शन

समाजवादी पार्टी के प्रेस कॉन्फ्रेंस और आरोपों के बाद गरमाई सियासत

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब समाजवादी पार्टी ने बीते 15 अक्टूबर 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह गंभीर आरोप लगाया था कि आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 'विकास यादव' नामक एक ही व्यक्ति का नाम 10 बार से अधिक बार गलत तरीके से दर्ज किया गया है। 

आजमगढ़ वोटर लिस्ट विवाद में मुख्य निर्वाचन अधिकारी का बड़ा एक्शन
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का प्रेस कॉन्फ्रेंस | 15 अक्टूबर, 2026

विपक्ष द्वारा चुनावी पारदर्शिता पर उठाए गए इस बड़े सवाल के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ से मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की थी। विपक्ष के इस आरोप ने प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया था क्योंकि मतदाता सूची में इस तरह की पुनरावृत्ति सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाती है। निर्वाचन आयोग ने बिना किसी देरी के मामले की तह तक जाने के लिए विशेष जांच टीम को सक्रिय किया और जल्द से जल्द तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।

जांच रिपोर्ट में खुलासे, तकनीकी चूक और वास्तविक मतदाताओं का सच

जब जिला प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों ने इस मामले की गहराई से छानबीन की, तो कई चौकाने वाले और तकनीकी पहलू सामने आए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, गोरखपुर जनपद के चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित एक मतदाता का नाम और उसके पिता का नाम (वल्दियत) समान पाया गया, जो बाकी प्रविष्टियों से पूरी तरह अलग था। वहीं जब आजमगढ़ की मतदाता सूची की सूक्ष्मतम छानबीन की गई तो यह पाया गया कि हिंदी भाषा में 'विकास यादव' नाम कुल 13 जगहों पर प्रदर्शित हो रहा था। निर्वाचन विभाग के स्पष्टीकरण के अनुसार, इन 13 स्थानों में से 2 जगहों पर नियमानुसार पहले ही विलोपन यानी नाम हटाने की कार्रवाई की जा चुकी थी। इसके अलावा शेष बची 11 प्रविष्टियां दरअसल जनपद आजमगढ़ के ही 11 अलग-अलग वास्तविक व्यक्तियों से जुड़ी हुई थीं, जो वर्तमान में अपने-अपने गांवों में ही पूरी तरह वैध रूप से निवास कर रहे हैं। तकनीकी चूक या मानवीय भूल के कारण इन अलग-अलग वास्तविक व्यक्तियों के नाम डेटाबेस में सही तरीके से उपनाम या मध्य नाम के साथ अपडेट नहीं हो पाए थे, जिसके बाद इनमें से असली विकास यादव को छोड़कर बाकी 10 व्यक्तियों के वास्तविक नाम और अन्य विवरणों को दुरुस्त करने के लिए फॉर्म-8 भरवाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी दुविधा से बचा जा सके।


दोषी कंप्यूटर सहायक और पांच बूथ लेवल अधिकारियों पर बर्खास्तगी की तलवार

प्रशासन ने इस गड़बड़ी को केवल एक सामान्य मानवीय या तकनीकी त्रुटि मानने से साफ इनकार कर दिया है और इसे फील्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं की भारी लापरवाही माना है। प्रकरण में सीधे तौर पर दोषी पाए गए मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर सहायक और संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों के खिलाफ बहुत कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की गई है। इन्हें मतदाता सूची जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य से मुक्त करने के साथ-साथ इनकी सेवा समाप्त करने के संबंध में नोटिस थमाए गए हैं। इसके साथ ही, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-32 के प्रावधानों के अंतर्गत इन सभी दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिसके तहत उन्हें तय नियमों के तहत नोटिस दिए जा चुके हैं। निर्वाचन आयोग का यह कड़ा संदेश साफ है कि चुनावी कार्यों में किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वाले कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा।

उच्चाधिकारियों पर भी चला प्रशासनिक डंडा, ईआरओ और दो एआरओ पर विभागीय कार्रवाई

इस पूरे मामले की आंच केवल निचले स्तर के संविदा या नियमित कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया की देखरेख और पर्यवेक्षण में ढिलाई बरतने वाले उच्चाधिकारियों पर भी प्रशासनिक डंडा चला है। आजमगढ़ विधानसभा क्षेत्र संख्या 347 के तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी ईआरओ और दो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों यानी एआरओ को भी इस बड़ी चूक के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माना गया है। अपने पर्यवेक्षण में गंभीर शिथिलता और पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप में इन तीनों वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। इन सभी के खिलाफ गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत आरोप पत्र जारी किए जाने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है, जिससे प्रशासनिक तंत्र में यह संदेश गया है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही भी उतनी ही तय की जाएगी जितनी कि जमीनी स्तर के कर्मचारियों की होती है।

आजमगढ़ के अन्य विधानसभा क्षेत्रों की सूचियों की भी होगी विशेष जांच

चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय किसी भी तरह की चुनावी गड़बड़ी या मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की सेंधमारी को लेकर बेहद सतर्क नजर आ रहा है। इसी का दूरगामी परिणाम है कि केवल एक विशिष्ट विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहने के बजाय, जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे पूरे जनपद के अन्य सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की भी इसी बिंदु पर गहनता से पुनः जांच करवाएं। इस पूरे विशेष अभियान की विस्तृत और प्रमाणित जांच आख्या को एक सप्ताह के भीतर हर हाल में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यदि अन्य किसी विधानसभा क्षेत्र में भी इस प्रकार की कोई तकनीकी या मानवीय विसंगति मौजूद है, तो उसे समय रहते दुरुस्त किया जा सके और मतदाता सूचियों की शुद्धता पूरी तरह से बरकरार रखी जा सके।

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