Jamia Millia Islamia में सुलगता असंतोष, जानें कैंपस के ताजा हालात

राजधानी दिल्ली की प्रतिष्ठित जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (JMI) इन दिनों अपने परिसरों में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों और तनाव के कारण देश भर की सुर्खियों में बनी हुई है। विश्वविद्यालय में अंतिम बार वर्ष 2005 में छात्रसंघ चुनाव आयोजित किए गए थे, लेकिन लगातार बढ़ते गतिरोध और हिंसक घटनाओं का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 31 मार्च 2006 को छात्रसंघ को पूरी तरह से भंग कर दिया था। तब से लेकर अब तक दो दशकों से कैंपस में कोई चुनी हुई छात्र संस्था अस्तित्व में नहीं है। इसी 20 साल पुराने गतिरोध को खत्म करने और छात्रसंघ (JMISU) की बहाली तथा मुख्य प्रॉक्टर को हटाए जाने की प्रमुख मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।

Jamia Millia Islamia Student Protest 2026: जामिया में छात्रसंघ चुनाव और भूख हड़ताल को लेकर क्यों मचा है घमासान

12 अक्टूबर से गालिब लॉन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

जामिया में छात्रसंघ चुनाव की बहाली के लिए छात्रों का यह अनिश्चितकालीन आंदोलन 12 अक्टूबर 2026 से लगातार जारी है। इस विरोध प्रदर्शन की शुरुआत उस समय हुई जब पांच छात्रों ने कैंपस के भीतर स्थित ग़ालिब लॉन में बैठकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन शुरू किया। भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का कहना है कि इतने लंबे समय से छात्र संघ न होने की वजह से छात्रों की समस्याओं को सुनने और उठाने वाला कोई आधिकारिक मंच नहीं बचा है। छात्रों का आरोप है कि चुनी हुई छात्र संस्था के अभाव में हॉस्टल आवंटन में अनियमितताएं, प्रशासनिक कमियां और छात्रों के अधिकारों का हनन लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसे रोकने के लिए छात्रसंघ का पुनर्गठन बेहद जरूरी है।

दो सप्ताह बाद भी अड़े छात्र: लाइब्रेरी बंद और कक्षाएं हुई ऑनलाइन

प्रदर्शन और भूख हड़ताल को अब दो सप्ताह यानी 14 दिन पूरे हो चुके हैं (26 अक्टूबर 2026 तक)। इस दौरान कई हड़ताली छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी आई हैं, फिर भी आंदोलन की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी है। स्थिति को नियंत्रित करने और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 अक्टूबर को सेंट्रल लाइब्रेरी को बंद करने का आदेश जारी कर दिया और सभी विभागों की नियमित कक्षाओं को एहतियातन ऑनलाइन मोड में शिफ्ट कर दिया। इसके बावजूद छात्रों का आक्रोश कम नहीं हुआ है और सैकड़ों छात्र प्रदर्शनकारियों के समर्थन में यूनिवर्सिटी के गेट नंबर 7 पर दिन-रात डटे हुए हैं।

राजनीतिक हलचल, एफआईआर और प्रशासन की कार्रवाई

जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, इस छात्र आंदोलन का दायरा कैंपस से बाहर भी फैलने लगा है। कई राजनीतिक दलों के नेताओं और सांसदों ने कैंपस पहुंचकर भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों का समर्थन किया। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने बिना अनुमति बाहरी लोगों और नेताओं के प्रवेश को नियमों का उल्लंघन मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया है। छात्रों का दावा है कि कक्षाओं को ऑनलाइन करना और लाइब्रेरी बंद करना केवल आंदोलन को दबाने की एक रणनीति है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय आम छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल को बचाए रखने के लिए लिया गया है।

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