प्रज्ञा मिश्रा का दिल्ली पुलिस पर बड़ा आरोप: अपमानजनक तरीके से डिटेन करने का दावा, कहा- खाकी वर्दी वाला दुर्योधन

राजधानी दिल्ली में स्वतंत्र पत्रकारों पर पुलिसिया कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। टीवी पत्रकार और 'उल्टा चश्मा' की संस्थापक प्रज्ञा मिश्रा ने दिल्ली पुलिस पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। प्रज्ञा मिश्रा का दावा है कि दिल्ली में जारी प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग करने से रोका गया और जानबूझकर बेहद अपमानजनक तरीके से बस के अंदर फेंककर डिटेन कर लिया गया। उन्होंने दिल्ली की कानून व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए इसे "अंधेर नगरी, अंधी पुलिस और चौपट राजा" करार दिया है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर पत्रकार सुरक्षा और प्रेस की आजादी को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है।

पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा का दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप: अपमानजनक तरीके से किया डिटेन

रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसिया कार्रवाई और लोकतंत्र के चीरहरण का आरोप

प्रज्ञा मिश्रा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से बयान जारी करते हुए पूरी घटना की जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि घटना के वक्त उनके पास पत्रकारिता के सभी वैध पहचान पत्र, माइक और माइक आईडी मौजूद थे। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें काम करने से रोका और जबरन वैन में डाल दिया। प्रज्ञा मिश्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस का इस समय केवल एक ही मुख्य एजेंडा नजर आ रहा है कि जो भी पत्रकार निष्पक्षता से सच दिखा रहे हैं, उन्हें हिरासत में लिया जाए, थानों में बिठाया जाए और देश की जनता के सामने लोकतंत्र के चीरहरण की तस्वीरें बाहर न जाने दी जाएं।


खाकी वर्दी वाला दुर्योधन और प्रज्ञा मिश्रा का पुलिसकर्मी को श्राप

घटना के बाद जारी एक अन्य भावुक और आक्रामक वीडियो में प्रज्ञा मिश्रा ने खुद को ब्राह्मण घर की बेटी बताते हुए उस पुलिसकर्मी को आड़े हाथों लिया जिसने उनके साथ बदसलूकी की थी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और अधिकारों की लड़ाई अपनी जगह है, लेकिन जिस तरह से उन्हें असहाय बनाकर टांगों से पकड़कर बस में फेंका गया, उसके लिए वे उस पुलिसकर्मी को दिल से श्राप देती हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2022 में भी उन्होंने एक श्राप दिया था और आज यह उनका दूसरा श्राप है, क्योंकि किसी भी असहाय व्यक्ति की हाय लोहे को भी भस्म कर देने की ताकत रखती है। प्रज्ञा मिश्रा ने आरोप लगाया कि पुलिस की यह कार्रवाई ज्ञानेश की मशीन से निकली सरकार के इशारे पर हो रही है और उत्पीड़न करने वाले पुलिसवाले "खाकी वर्दी वाले दुर्योधन" की तरह बर्ताव कर रहे हैं।

दिल्ली में पत्रकारों पर लगातार होती कार्रवाई और उठता जनाक्रोश

यह पूरी घटना दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के दौरान हुई है। प्रज्ञा मिश्रा से पहले भी कई वरिष्ठ पत्रकारों और स्वतंत्र मीडियाकर्मियों को इसी तरह हिरासत में लिए जाने की खबरें लगातार आ रही हैं। एक तरफ जहां देश की शीर्ष अदालतें शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और निष्पक्ष रिपोर्टिंग में बाधा न डालने के स्पष्ट निर्देश दे चुकी हैं, वहीं जमीनी स्तर पर पत्रकारों के साथ हो रहा यह व्यवहार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। प्रज्ञा मिश्रा के इस बयान और वीडियो के सामने आने के बाद देश भर के मीडिया जगत, नागरिक संगठनों और आम जनता के बीच दिल्ली पुलिस और प्रशासन के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

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