कला हमेशा से समाज का आईना रही है और जब बात थिएटर यानी रंगमंच की हो, तो यह केवल मनोरंजन का साधन न रहकर समाज को झकझोरने और उसे नई दिशा देने का एक सशक्त माध्यम बन जाता है। इसी कड़ी में दिल्ली के प्रसिद्ध अस्मिता थिएटर ग्रुप ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता को साबित करते हुए दो महीने की थिएटर वर्कशॉप का सफलतापूर्वक समापन किया है। इस विशेष अवसर पर ग्रुप के जाने-माने निर्देशक और थिएटर गुरु अरविंद गौड़ ने रंगमंच के वर्तमान स्वरूप, डिजिटल युग की चुनौतियों और समाज में कलाकारों की भूमिका को लेकर खुलकर अपने विचार साझा किए। उनके इस बयान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आज के इस आधुनिक और आभासी दौर में भी जमीनी स्तर पर कला और संवाद का महत्व कितना अधिक प्रासंगिक है।



'मंटू की औरतें' नाटक के साथ वर्कशॉप का भव्य समापन
अस्मिता थिएटर ग्रुप की इस दो महीने लंबी समर या विशेष थिएटर वर्कशॉप का समापन प्रख्यात लेखक सआदत हसन मंटू की रचनाओं पर आधारित नाटक 'मंटू की औरतें' के मंचन के साथ हुआ। इस नाटक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें विभिन्न कहानियों के माध्यम से मुख्य रूप से महिलाओं के किरदारों और उनके जीवन के अलग-अलग पहलुओं को मंच पर जीवंत किया गया। वर्कशॉप में भाग लेने वाले नए विद्यार्थियों ने इस नाटक में अपनी कला का प्रदर्शन किया। नाटक के मंचन के साथ-साथ इन युवाओं ने पिछले दो महीनों में अभिनय की बारीकियों के अलावा लाइट डिजाइनिंग, साउंड इफेक्ट्स और बैकस्टेज मैनेजमेंट जैसे तकनीकी पहलुओं का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया। निर्देशक अरविंद गौड़ ने बताया कि यह समापन सत्र इन नए कलाकारों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है और आने वाले पंद्रह से बीस दिनों के भीतर फिर से एक नई वर्कशॉप शुरू की जाएगी, जिसमें नए और प्रशिक्षित दोनों तरह के कलाकार हिस्सा ले सकेंगे।
नाटक समाज को जागरूक करने और सवाल उठाने का माध्यम
थिएटर के उद्देश्य पर बात करते हुए निर्देशक अरविंद गौड़ ने स्पष्ट किया कि नाटक का मुख्य उद्देश्य केवल मंच पर प्रस्तुति देना नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित करना और हमारे आसपास चल रही व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करना है। उनका मानना है कि कला का असली अर्थ समाज के साथ जुड़ना और वहां घटित होने वाली हर अच्छी-बुरी घटना पर अपनी बेबाक टिप्पणी रखना है, चाहे वह व्यक्तिगत स्तर पर हो, सामाजिक दायरे में हो या फिर राजनीतिक गलियारों में हो। नाटक को संवाद की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण विधा बताते हुए उन्होंने कहा कि यह सामाजिक परिवर्तन और जन-जागरूकता का एक बहुत बड़ा जरिया है। अस्मिता थिएटर ग्रुप लगातार नुक्कड़ नाटकों और मंच प्रस्तुतियों के जरिए आम जनता के बीच पहुंचता है ताकि लोगों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जा सके।डिजिटल युग में रंगमंच को जीवित रखने की चुनौती और प्रयास
आज के दौर में जब डिजिटल माध्यम और सोशल मीडिया का प्रभाव अत्यधिक बढ़ गया है और हर व्यक्ति स्क्रीन की दुनिया में सिमटता जा रहा है, ऐसे में दर्शकों को रंगमंच तक खींचकर लाना और युवाओं को इस कला से जोड़ना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इस विषय पर बात करते हुए अरविंद गौड़ ने कहा कि एक शिक्षक और निर्देशक के रूप में उनकी और उनकी पूरी टीम की जिम्मेदारी आज के समय में और अधिक बढ़ जाती है। डिजिटल युग की इस आंधी में अस्मिता थिएटर ग्रुप पूरी ईमानदारी और दृढ़ प्रतिबद्धता के साथ युवाओं को रंगमंच की मूल संस्कृति से जोड़े रखने का सराहनीय कार्य कर रहा है। यह वर्कशॉप न केवल युवाओं को अभिनय के क्षेत्र में प्रशिक्षित करती है, बल्कि उन्हें एक बेहतर इंसान और संवेदनशील नागरिक भी बनाती है।वर्कशॉप से जुड़ने की प्रक्रिया और आगामी कक्षाएं
जो युवा या रंगमंच प्रेमी अस्मिता थिएटर ग्रुप के साथ जुड़ना चाहते हैं और अभिनय की कला सीखना चाहते हैं, उनके लिए रास्ते हमेशा खुले रहते हैं। निर्देशक अरविंद गौड़ ने जानकारी दी कि ग्रुप की ओर से लगातार अलग-अलग थिएटर वर्कशॉप्स का आयोजन किया जाता है, जिसमें अस्मिता थिएटर और त्रिवेणी थिएटर के सहयोग से होने वाली कार्यशालाएं शामिल हैं। इन सभी कार्यक्रमों की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियमित रूप से अपडेट की जाती है। इच्छुक लोग उनके आधिकारिक नंबर पर व्हाट्सएप के जरिए संपर्क कर सकते हैं और त्वरित प्रतिक्रिया प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, अरविंद गौड़ खुद त्रिवेणी कला संगम में सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक लगातार कक्षाएं लेते हैं, जहां कोई भी आकर सीधे बातचीत कर सकता है। इसके साथ ही अस्मिता थिएटर का इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज पूरी तरह सार्वजनिक है, जहां से जुड़कर हर कोई रंगमंच की इस यात्रा का हिस्सा बन सकता है।
Tags
ख़बर
नाटक
मनोरंजन
Arvind Gaur
Asmita Theatre
Cultural News
Delhi Theatre Workshop
Mantu Ki Auratein
Rangmanch
Theater