मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी युद्ध अब बेहद खौफनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) पूरी तरह टूट चुका है, जिसके बाद अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा सैन्य अभियान छेड़ दिया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय (Iran’s Health Ministry) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की है कि पिछले दो दिनों में अमेरिकी हवाई हमलों के कारण कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के 5 अलग-अलग प्रांतों में स्थित तटीय और रणनीतिक शहरों को निशाना बनाया है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज (Ahvaz) के बाहरी इलाके में हुए हमले में 3 लोगों की जान चली गई, जबकि ईरानशहर (Iranshahr) एयरपोर्ट पर हुई बमबारी में एक फायरफाइटर की मौत हो गई। अमेरिकी सेना का दावा है कि उन्होंने ईरान की युद्ध क्षमता और मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स को नष्ट करने के लिए 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बम गिराए हैं।
5 प्रांतों में 170 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर बमबारी
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख हुसैन केर्मानपुर ने सोशल मीडिया पर इस तबाही का आधिकारिक आंकड़ा साझा किया। उनके अनुसार, अमेरिका ने 8 और 9 जुलाई को लगातार ईरान के पांच प्रांतों पर ताबड़तोड़ मिसाइलें बरसाईं। इन हमलों में घायल हुए 78 लोगों में से 47 की हालत नाजुक है और वे इस समय अस्पतालों में भर्ती हैं।در حالی که آتشبس برقرار بود، آمریکا در روزهای ۱۷ و ۱۸ تیر ۱۴۰۵ پنج استان ایران را هدف حمله قرار داد؛ حملاتی که تاکنون ۱۴ شهید و ۷۸ مصدوم بر جای گذاشته است. از میان مجروحان، ۴۷ نفر همچنان در بیمارستان بستری هستند و سایر مصدومان پس از دریافت خدمات درمانی ترخیص شدهاند.#آتش_بس
— حسین کرمانپور Hossein.Kermanpour (@HKermanpour) July 9, 2026
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज (Ahvaz) के बाहरी इलाके में हुए हमले में 3 लोगों की जान चली गई, जबकि ईरानशहर (Iranshahr) एयरपोर्ट पर हुई बमबारी में एक फायरफाइटर की मौत हो गई। अमेरिकी सेना का दावा है कि उन्होंने ईरान की युद्ध क्षमता और मिसाइल लॉन्चिंग पैड्स को नष्ट करने के लिए 170 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बम गिराए हैं।
चाबहार में ब्लैकआउट, बुशहर और बंदर अब्बास निशाना
अमेरिकी एयरस्ट्राइक का सबसे बड़ा असर ईरान के तटीय और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण शहरों पर पड़ा है:- चाबहार (Chabahar): भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद खास माने जाने वाले चाबहार पोर्ट के आसपास अमेरिकी बम गिरने से वहां का मुख्य पावर ग्रिड पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। पूरे चाबहार शहर में ब्लैकआउट (अंधेरा) छाया हुआ है और संचार व्यवस्था ठप है। यहां एक अस्पताल को भी मलबे से नुकसान पहुंचा है।
- बंदर अब्बास (Bandar Abbas): स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के पास स्थित इस प्रमुख बंदरगाह शहर में देर रात कई बड़े धमाके सुने गए। सोशल मीडिया पर आए वीडियो में बंदर अब्बास के हक्कानी पोर्ट के पास भीषण आग की लपटें उठती देखी जा सकती हैं।
- बुशहर (Bushehr) और जास्क (Jask): ईरान के परमाणु रिएक्टर वाले शहर बुशहर और तटीय शहर जास्क और सरिक में भी अमेरिकी विमानों ने भारी बमबारी की है।
डोनाल्ड ट्रंप बोले- "यह जहाजों पर हमले का प्रतिशोध है"
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद ट्वीट (Truth Social) कर साफ कहा कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों का "प्रतिशोध" (Retribution) है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर ऐसा दोबारा हुआ, तो अंजाम इससे भी बुरा होगा।" अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर लगे अस्थायी प्रतिबंध हटाने के फैसले को भी वापस ले लिया है।ईरान का जवाबी पलटवार: कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें
इस एकतरफा अमेरिकी हमले के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी मोर्चा खोल दिया है। ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Navy's 5th Fleet) के मुख्यालय और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ ड्रोन और मिसाइलें दागीं। बहरीन में पूरी रात हवाई हमले के सायरन (Air Raid Sirens) बजते रहे, वहीं कुवैत की सेना ने कई ईरानी मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स को हवा में ही इंटरसेप्ट करने का दावा किया है।वैश्विक संकट: कच्चे तेल की कीमतों में लग सकती है आग
यह युद्ध ऐसे संवेदनशील समय पर भड़का है जब ईरान अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारी कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह सीधा टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी में धकेल सकता है। चूंकि दुनिया का एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते होता है, इसलिए इस युद्ध के कारण आने वाले दिनों में वैश्विक स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। फिलहाल, दोनों में से कोई भी देश पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध का खतरा गहरा गया है।
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