राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 2026: अमित शाह ने नई दिल्ली में किया 9वें NSSC का भव्य उद्घाटन

भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश की सुरक्षा चुनौतियों का आधुनिक समाधान तलाशने के लिए राजधानी नई दिल्ली में दो दिवसीय नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 2026 का आधिकारिक उद्घाटन किया गया। इस ऐतिहासिक सम्मेलन का शुभारंभ केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने किया। सम्मेलन की शुरुआत में गृह मंत्री ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के शहीद स्तम्भ पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने देश की अखंडता और रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

9th National Security Strategies Conference 2026: अमित शाह ने किया उद्घाटन
Image Source: PIB

यह दो दिवसीय सम्मेलन भारत की रक्षा रणनीतियों को 21वीं सदी की आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के आधार पर वर्ष 2021 से इस सम्मेलन का आयोजन हाइब्रिड फॉर्मेट में हर साल किया जा रहा है, ताकि केंद्रीय नेतृत्व और जमीनी स्तर पर तैनात पुलिस अधिकारियों के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सके।

हाइब्रिड मॉडल में 850 अधिकारियों की सहभागिता

सुरक्षा मामलों पर आधारित इस सम्मेलन की सबसे खास बात इसका व्यापक स्वरूप रहा। कार्यक्रम में देश भर से लगभग 850 शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया। नई दिल्ली स्थित मुख्य स्थल पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, केंद्रीय गृह सचिव, उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों एवं केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

वहीं दूसरी ओर, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, जमीनी स्तर पर तैनात युवा पुलिस अधिकारी और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ वर्चुअल माध्यम से अपनी-अपनी राजधानी से जुड़े। इस हाइब्रिड मॉडल ने पूरे देश के सुरक्षा तंत्र को एक ही मंच पर लाकर विचार-विमर्श करने की सुविधा प्रदान की है।

आतंकवाद और कट्टरपंथ पर 'प्रहार' योजना का रोडमैप

सम्मेलन के पहले दिन देश के सामने मौजूद सबसे गंभीर सुरक्षा मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें आतंकवाद विरोधी अभियानों को प्रभावी बनाने और कट्टरपंथ को रोकने पर विशेष बल दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गृह मंत्रालय की महत्त्वाकांक्षी 'प्रहार' (PRAHAAR) योजना को पूरे देश में सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया।

आतंकवाद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को और तेज करने के लिए भगोड़ों को विदेशों से वापस लाने, उनके खिलाफ अदालती कार्यवाही में तेजी लाने और 'ट्रायल इन एब्सेंशिया' यानी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधानों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया। इसके अलावा, गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के मामलों की जांच में सभी एजेंसियों के बीच एक व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की बात कही गई।

इंटेलिजेंस एकीकरण और एआई तकनीक का प्रयोग

आधुनिक युग में सूचना ही सबसे बड़ा हथियार है। इसी सोच के तहत सम्मेलन में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए इंटेलिजेंस के एकीकरण, सटीक विश्लेषण और उसे तुरंत लागू करने पर गहराई से मंथन हुआ।

गृह मंत्री ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा की उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए। इसके लिए MAC प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध डेटा का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विश्लेषण किया जाना बेहद जरूरी है। एआई तकनीक की मदद से सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरों का पहले से अनुमान लगाकर उन्हें समय रहते नाकाम कर सकेंगी।

घुसपैठियों पर ज़ीरो टॉलरेंस और साइबर सुरक्षा रणनीति

अवैध प्रवासियों की पहचान और उन्हें देश से वापस भेजने का मुद्दा भी इस सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में शामिल रहा। गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों को 'ज़ीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाने का कड़ा निर्देश दिया। इसके लिए एक व्यापक और मजबूत राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने को कहा गया है, जिससे सीमाओं को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके।

इसके साथ ही नशीले पदार्थों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए विज़न डॉक्यूमेंट, साइबर अपराधों की रोकथाम और पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा चलाए जा रहे प्रॉक्सी वॉर को नाकाम करने के लिए एक मजबूत पॉलिसी फ्रेमवर्क पर सहमति जताई गई।

दूसरे दिन के मुख्य विषय: सब-एरियल खतरे और बायो-सिक्योरिटी

सम्मेलन के दूसरे दिन आधुनिक और भविष्य के खतरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसमें हवा से होने वाले हमलों यानी सब-एरियल सिस्टम से जुड़े खतरों और उनसे निपटने के तरीकों पर चर्चा होगी।

इसके अलावा समुद्री सीमाओं और ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) की सुरक्षा सुनिश्चित करने, सूचना युद्ध (इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर) के राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों और एक नए बायो-सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह देश के शीर्ष रणनीतिकारों और कटिंग-एज स्तर के अधिकारियों के व्यावहारिक अनुभवों का अनूठा संगम है। यह सम्मेलन भारत को हर प्रकार के पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों से सुरक्षित रखने के लिए एक अभेद्य दीवार तैयार कर रहा है।

A K

Founding Editor

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने