देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 25 सितंबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों के साथ हुई धक्का-मुक्की और हिरासत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरी घटना पर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) ने गहरा दुख और गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। संगठन ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर बड़ा आघात करार दिया है।



प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने एक आधिकारिक बयान जारी कर दिल्ली पुलिस से मांग की है कि वह प्रभावित पत्रकारों से बिना किसी शर्त के सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और भविष्य में इस प्रकार का व्यवहार न दोहराने का आश्वासन दे।
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अनुसार, प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कम से कम दो पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वे अपना पेशेवर काम कर रहे थे। हिरासत में लिए गए पत्रकारों में फ्रंटलाइन (The Frontline) के वेदांत लखेरा और द वायर (The Wire) के मोहम्मद इरफान शामिल हैं।
बयान के मुताबिक, फ्रंटलाइन के पत्रकार वेदांत लखेरा ने जब मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों से नेम टैग न पहनने की वजह पूछी, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्हें खींचकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया और एक फोटो डिलीट करने का दबाव बनाया गया। हालांकि, उन्होंने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया।
दूसरी तरफ, द वायर के पत्रकार मोहम्मद इरफान को पुलिस द्वारका पुलिस स्टेशन ले गई, जहां उन्हें प्रदर्शनकारियों के साथ कई घंटों तक हिरासत में रखा गया।
प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य पत्रकारों का कहना है कि पुलिस का व्यवहार काफी आक्रामक और तानाशाही भरा था। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में कुछ पत्रकारों को मामूली चोटें भी आई हैं।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था?
25 सितंबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नागरिक समूहों, छात्र संगठनों और विभिन्न नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन को कवर करने के लिए मीडिया जगत से जुड़े कई पत्रकार वहां मौजूद थे।प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अनुसार, प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कम से कम दो पत्रकारों को दिल्ली पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वे अपना पेशेवर काम कर रहे थे। हिरासत में लिए गए पत्रकारों में फ्रंटलाइन (The Frontline) के वेदांत लखेरा और द वायर (The Wire) के मोहम्मद इरफान शामिल हैं।
प्रेस कार्ड पहनने के बावजूद हुई कार्रवाई
चौंकाने वाली बात यह रही कि दोनों ही पत्रकार घटना के समय अपना आधिकारिक प्रेस पहचान पत्र (Press ID Card) पहने हुए थे। इसके बावजूद पुलिस कर्मियों ने उनके साथ कड़ा रुख अपनाया।बयान के मुताबिक, फ्रंटलाइन के पत्रकार वेदांत लखेरा ने जब मौके पर मौजूद पुलिस कर्मियों से नेम टैग न पहनने की वजह पूछी, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया। उन्हें खींचकर पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन ले जाया गया और एक फोटो डिलीट करने का दबाव बनाया गया। हालांकि, उन्होंने ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्हें छोड़ा गया।
दूसरी तरफ, द वायर के पत्रकार मोहम्मद इरफान को पुलिस द्वारका पुलिस स्टेशन ले गई, जहां उन्हें प्रदर्शनकारियों के साथ कई घंटों तक हिरासत में रखा गया।
उपकरण छीनने और मारपीट का आरोप
इस पूरी घटना के दौरान पत्रकारों के उपकरणों को भी नुकसान पहुंचाने और छीनने की बात सामने आई है। आरोप है कि जंतर-मंतर पर एक पुलिसकर्मी ने मोहम्मद इरफान के हाथ से उनका माइक छीनकर फेंक दिया, जिस पर उनकी संस्था का लोगो लगा हुआ था। घटना के बाद वह माइक काफी तलाशने पर भी नहीं मिला।प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य पत्रकारों का कहना है कि पुलिस का व्यवहार काफी आक्रामक और तानाशाही भरा था। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की में कुछ पत्रकारों को मामूली चोटें भी आई हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के नियंत्रण पर उठाए सवाल
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि दिल्ली पुलिस सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (Union Home Ministry) के अधीन कार्य करती है। देश की राजधानी के केंद्र में स्वतंत्र पत्रकारों के खिलाफ पुलिस का यह व्यवहार अत्यंत चिंताजनक है।
प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था यह मांग करती है कि पत्रकारों को एक सुरक्षित और निर्भीक माहौल में काम करने की पूरी आजादी मिले। उन्हें सत्ता से सवाल पूछने वाले नागरिकों और प्रदर्शनकारियों की आवाज को कवर करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।
प्रेस क्लब की प्रमुख मांगें
- दिल्ली पुलिस उन सभी पत्रकारों से औपचारिक रूप से माफी मांगे जिनका काम बाधित हुआ और जिनके उपकरण नष्ट या गायब हुए।
- मीडियाकर्मियों के खिलाफ आक्रामक और मनमाने रवैये को तुरंत बंद किया जाए।
- पत्रकारों के काम करने के अधिकार और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
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