संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने दुनिया के सामने भारत का स्पष्ट, निर्भीक और सशक्त दृष्टिकोण रखा है। भारत के 1.4 अरब नागरिकों की ओर से वैश्विक समुदाय को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र अपने नौवें दशक में प्रवेश कर रहा है, लेकिन आज भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के इसके प्राथमिक उद्देश्य गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में युद्ध, संघर्ष और तनाव जिस तरह से पूरी दुनिया की प्रगति को बाधित कर रहे हैं, उस पर भारत ने गहराई से चिंता व्यक्त की है।


अपने भाषण के दौरान विदेश मंत्री ने वैश्विक व्यवस्था में सुधार, आतंकवाद के प्रति शून्य-सहिष्णुता, खाद्यान्न और ऊर्जा संकट, ग्लोबल साउथ की दुर्दशा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार उपयोग जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बिना किसी झिझक के यह साबित किया कि भारत अब न केवल एक बड़ी आर्थिक शक्ति है, बल्कि वैश्विक प्राथमिकताओं को दिशा देने वाला एक जिम्मेदार और नेतृत्वकर्ता राष्ट्र भी बन चुका है।
जयशंकर ने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया में किसी भी क्षेत्र में होने वाले युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। जिन देशों की इन संघर्षों में कोई भूमिका नहीं है, वे भी इसकी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए। भारत शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और खाद्यान्न तथा ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
इसी क्रम में उन्होंने पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के हालात पर बात करते हुए कहा कि वहां भी हिंसा और तनाव जारी है। भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति केवल दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के जरिए ही संभव है। जब तक यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजना जारी रखे हुए है।
आज वित्त की दुनिया से लेकर बाजारों तक पहुंच सीमित की जा रही है, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है और आधुनिक तकनीकों को दूसरों तक पहुंचने से रोका जा रहा है। संसाधनों और कनेक्टिविटी का इस्तेमाल रणनीतिक लाभ उठाने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि दुनिया भर के राष्ट्र अब एक-दूसरे पर भरोसा करने के बजाय अपने जोखिम कम करने और विविधीकरण (Diversification) पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर हैं, जिससे आपसी सद्भावना और विश्वास का माहौल खत्म हो रहा है।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति पर बढ़ते दबाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि गैर-बाजार प्रथाओं और अनुचित पाबंदियों के जरिए ग्लोबल साउथ के देशों के औद्योगीकरण के अधिकार को छीना जा रहा है। प्रौद्योगिकी, जिसका उद्देश्य दुनिया को नई आशा देना था, अब चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेष रूप से एआई के दुरुपयोग से पूर्वाग्रह बढ़ रहे हैं और देशों के बीच आपसी सम्मान कम हो रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि मंच पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने वाले आतंकवाद के आदतन अपराधियों के तर्कों को दुनिया स्वीकार नहीं करेगी। आतंकवाद को सामान्य बनाने या इसके परिणामों से छूट का दावा करने का कोई भी प्रयास कभी सफल नहीं होगा। भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और भारत इस अधिकार का खुलकर इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि दोस्ती और सद्भावना कभी भी आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकतीं। यदि कोई देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाता है, तो उसके साथ किसी भी प्रकार की समझ या समझौते पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सुधार की जिम्मेदारी आतंकवाद के आकाओं और अपराधियों की ही है।
भारत की आर्थिक और सामाजिक सफलता का सबसे बड़ा आधार 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) बना है। इसने न केवल सुशासन को बढ़ावा दिया है, बल्कि आम नागरिकों तक सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। भारत में कारोबार करने की सुगमता, जीवन जीने की सुगमता, स्टार्टअप संस्कृति और केंद्रित क्षेत्रीय मिशनों ने देश की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार दी है। भारत इन अपनी सफलताओं और अनुभवों को दुनिया के अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए हमेशा तत्पर है।
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ जल परियोजनाएं, टिकाऊ कृषि और हरित तकनीकों के प्रसार में भारत ने अभूतपूर्व काम किया है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance) जैसी भारत की वैश्विक पहलें तेजी से प्रगति कर रही हैं। इन सभी प्रयासों में अफ्रीकी महाद्वीप के देश और छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) भारत के सबसे प्रिय भागीदार रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय शांति की रक्षा में भी भारत का योगदान ऐतिहासिक रहा है। भारत हमेशा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों (UN Peacekeeping Operations) में सबसे आगे रहा है। वर्तमान में भारतीय सैनिक संयुक्त राष्ट्र के 11 में से 9 शांति अभियानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय जवानों ने असाधारण पेशवर अंदाज़ और दृढ़ता का परिचय दिया है। भारत के लिए यह गर्व की बात है कि भारतीय महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट को 'संयुक्त राष्ट्र 2025 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया है, जो भारतीय महिलाओं के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
तकनीक के मोर्चे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत तकनीक के लोकतंत्रीकरण पर जोर देता है। भारत ने 'एआई इम्पेक्ट समिट' की सफल मेजबानी की, जिसमें दुनिया के श्रेष्ठ विचारकों ने भाग लिया। भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मानव सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर सामाजिक समस्याओं के समाधान के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखता है। प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार अपने स्वयं के एआई मॉडल विकसित करने का पूरा अधिकार है। भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ एआई तकनीक साझा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक और विविधतापूर्ण दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, व्यापक परामर्श और सभी देशों की भागीदारी जरूरी है। दुनिया के बड़े हिस्से को वैश्विक निर्णयों से बाहर रखकर शांति नहीं बनाई जा सकती। इसीलिए 'सुधारित बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग अब और अधिक मजबूत हो गई है।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के एक दशक के कार्यकाल और 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के प्रति उनके समर्थन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने महासभा में आए सभी प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे शांति को केवल एक समझौते या बातचीत के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक दृष्टिकोण और विश्वास के रूप में अपनाएं।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर लगे महात्मा गांधी के कथन को याद करते हुए डॉ. एस जयशंकर ने अपने संबोधन का समापन किया— "शांति का कोई रास्ता नहीं है, शांति ही रास्ता है।"
वैश्विक संघर्ष, व्यापारिक मार्ग और नाविकों की सुरक्षा पर चिंता
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों और उनसे उपजे संकटों से की। उन्होंने विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन में जारी संघर्षों का उल्लेख किया। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में वाणिज्यिक नौवहन तथा नाविकों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं को भारत ने पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया।Delivering 🇮🇳’s statement at the 81st session of the @UN General Assembly. #UNGA81 https://t.co/IcMcmTNNAc
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 26, 2026
जयशंकर ने कहा कि एक वैश्वीकृत दुनिया में किसी भी क्षेत्र में होने वाले युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। जिन देशों की इन संघर्षों में कोई भूमिका नहीं है, वे भी इसकी आर्थिक और सामाजिक कीमत चुका रहे हैं। उन्होंने यूक्रेन संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए। भारत शांति स्थापित करने के सभी प्रयासों का समर्थन करता है और खाद्यान्न तथा ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए हर संभव सहयोग देने को तैयार है।
इसी क्रम में उन्होंने पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के हालात पर बात करते हुए कहा कि वहां भी हिंसा और तनाव जारी है। भारत का यह दृढ़ विश्वास है कि इस क्षेत्र में स्थायी शांति केवल दो-राष्ट्र समाधान (Two-State Solution) के जरिए ही संभव है। जब तक यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत सामग्री भेजना जारी रखे हुए है।
शस्त्रीकरण की मानसिकता और वैश्विक संस्थाओं का क्षरण
संयुक्त राष्ट्र के आठ दशकों के इतिहास को रेखांकित करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि इतने लंबे समय के बाद शांति और सह अस्तित्व हमारी स्वाभाविक आदत बन जानी चाहिए थी। हालांकि, दुनिया में इस समय जो देखा जा रहा है, वह हर क्षेत्र और साधन का शस्त्रीकरण (Weaponization) है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धा की मानसिकता ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को कमजोर कर दिया है और नए-नए आर्थिक तथा व्यापारिक अवरोध (Choke Points) खड़े किए जा रहे हैं।आज वित्त की दुनिया से लेकर बाजारों तक पहुंच सीमित की जा रही है, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) को जानबूझकर बाधित किया जा रहा है और आधुनिक तकनीकों को दूसरों तक पहुंचने से रोका जा रहा है। संसाधनों और कनेक्टिविटी का इस्तेमाल रणनीतिक लाभ उठाने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। इसका दुष्परिणाम यह हुआ है कि दुनिया भर के राष्ट्र अब एक-दूसरे पर भरोसा करने के बजाय अपने जोखिम कम करने और विविधीकरण (Diversification) पर ध्यान केंद्रित करने को मजबूर हैं, जिससे आपसी सद्भावना और विश्वास का माहौल खत्म हो रहा है।
ग्लोबल साउथ का संकट: 4F चुनौतियां और औद्योगीकरण का अधिकार
दुनिया के विकासशील और गरीब देशों यानी 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की स्थिति पर बोलते हुए जयशंकर ने इसे अत्यंत गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त के 4F (Food, Fuel, Fertilizer, and Finance) संकट से जूझ रहा है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन, सुपर अल नीनो के प्रभाव और उर्वरकों की कमी ने खाद्य सुरक्षा को बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति पर बढ़ते दबाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि गैर-बाजार प्रथाओं और अनुचित पाबंदियों के जरिए ग्लोबल साउथ के देशों के औद्योगीकरण के अधिकार को छीना जा रहा है। प्रौद्योगिकी, जिसका उद्देश्य दुनिया को नई आशा देना था, अब चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेष रूप से एआई के दुरुपयोग से पूर्वाग्रह बढ़ रहे हैं और देशों के बीच आपसी सम्मान कम हो रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र के मूल सिद्धांतों के विपरीत है।
आतंकवाद पर पाकिस्तान को करारा जवाब: शून्य-सहिष्णुता की नीति
अपने संबोधन के सबसे कड़े हिस्से में विदेश मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद और राज्य-प्रायोजित आतंकवाद पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने बिना किसी ढील के कहा कि आतंकवाद वैश्विक व्यवस्था के लिए एक सीधा अपमान है। जो सरकारें या देश इस प्रकार की हरकतों में शामिल हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।पाकिस्तान का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि मंच पर तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने वाले आतंकवाद के आदतन अपराधियों के तर्कों को दुनिया स्वीकार नहीं करेगी। आतंकवाद को सामान्य बनाने या इसके परिणामों से छूट का दावा करने का कोई भी प्रयास कभी सफल नहीं होगा। भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपनी रक्षा करने का पूरा अधिकार है और भारत इस अधिकार का खुलकर इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि दोस्ती और सद्भावना कभी भी आतंकवाद के साथ सह-अस्तित्व में नहीं रह सकतीं। यदि कोई देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाता है, तो उसके साथ किसी भी प्रकार की समझ या समझौते पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सुधार की जिम्मेदारी आतंकवाद के आकाओं और अपराधियों की ही है।
भारत का समावेशी विकास और 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर'
वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करने के बाद विदेश मंत्री ने भारत की आंतरिक प्रगति और विश्व में उसके योगदान का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत मानवता के छठे हिस्से का घर है। जब भारत में स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, पीने का पानी, बिजली, सड़कें और आवास जैसी बुनियादी सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो इसका सीधा सकारात्मक असर वैश्विक एसडीजी (SDG) परिणामों पर पड़ता है।भारत की आर्थिक और सामाजिक सफलता का सबसे बड़ा आधार 'डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर' (DPI) बना है। इसने न केवल सुशासन को बढ़ावा दिया है, बल्कि आम नागरिकों तक सामाजिक और आर्थिक लाभ पहुंचाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। भारत में कारोबार करने की सुगमता, जीवन जीने की सुगमता, स्टार्टअप संस्कृति और केंद्रित क्षेत्रीय मिशनों ने देश की आर्थिक वृद्धि को नई रफ्तार दी है। भारत इन अपनी सफलताओं और अनुभवों को दुनिया के अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए हमेशा तत्पर है।
वैश्विक एकजुटता: 78 देशों में 600 से अधिक भारतीय परियोजनाएं
ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने हमेशा अपनी उपलब्धियों को अपने सहयोगी देशों के साथ बांटा है। भारत की विकास साझेदारी का दायरा बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, कृषि, सूचना प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण तक फैला हुआ है। वर्तमान में दुनिया के 78 देशों में 600 से अधिक प्रमुख भारतीय विकास परियोजनाएं चल रही हैं, जो भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता का जीवंत प्रमाण हैं।जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ जल परियोजनाएं, टिकाऊ कृषि और हरित तकनीकों के प्रसार में भारत ने अभूतपूर्व काम किया है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (Global Biofuels Alliance) जैसी भारत की वैश्विक पहलें तेजी से प्रगति कर रही हैं। इन सभी प्रयासों में अफ्रीकी महाद्वीप के देश और छोटे द्वीप विकासशील राज्य (SIDS) भारत के सबसे प्रिय भागीदार रहे हैं।
मानवीय सहायता, शांति मिशन और महिलाओं का सशक्तिकरण
दुनिया में जब भी कोई संकट आया है, भारत ने हमेशा 'प्रथम उत्तरदाता' (First Responder) के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। चाहे नेपाल में आई अचानक बाढ़ हो या वेनेजुएला का भूकंप, महामारी का दौर हो या युद्ध ग्रस्त क्षेत्र, भारत ने हमेशा बिना किसी देरी के दवाएं, भोजन और जरूरी मदद पहुंचाई है। भारत द्वारा आयोजित कृत्रिम अंग शिविरों (Limb Fitment Camps) ने दुनिया भर में दिव्यांगजनों को नया जीवन दिया है।अंतरराष्ट्रीय शांति की रक्षा में भी भारत का योगदान ऐतिहासिक रहा है। भारत हमेशा संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों (UN Peacekeeping Operations) में सबसे आगे रहा है। वर्तमान में भारतीय सैनिक संयुक्त राष्ट्र के 11 में से 9 शांति अभियानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय जवानों ने असाधारण पेशवर अंदाज़ और दृढ़ता का परिचय दिया है। भारत के लिए यह गर्व की बात है कि भारतीय महिला लड़ाकू हेलीकॉप्टर पायलट को 'संयुक्त राष्ट्र 2025 मिलिट्री जेंडर एडवोकेट ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया है, जो भारतीय महिलाओं के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।
समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय कानून और एआई तकनीक का भविष्य
समुद्री क्षेत्र में पैदा हो रही नई चुनौतियों पर बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि लाल सागर से लेकर काला सागर और खाड़ी क्षेत्र तक जहाजों और नाविकों पर हो रहे हमले वैश्विक व्यापार के लिए घातक हैं। इनमें भारतीय नाविकों के साथ-साथ अन्य देशों के नागरिकों ने भी अपनी जान गंवाई है। भारत इस प्रकार के हमलों के खिलाफ वैश्विक जनमत तैयार करने के लिए लाइबेरिया और 23 अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुद्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रखना और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना सभी देशों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।तकनीक के मोर्चे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत तकनीक के लोकतंत्रीकरण पर जोर देता है। भारत ने 'एआई इम्पेक्ट समिट' की सफल मेजबानी की, जिसमें दुनिया के श्रेष्ठ विचारकों ने भाग लिया। भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को मानव सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और बड़े पैमाने पर सामाजिक समस्याओं के समाधान के एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में देखता है। प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के अनुसार अपने स्वयं के एआई मॉडल विकसित करने का पूरा अधिकार है। भारत ग्लोबल साउथ के देशों के साथ एआई तकनीक साझा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बहुध्रुवीय विश्व और संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता
विदेश मंत्री ने अंत में वैश्विक शक्ति संतुलन में आ रहे बदलावों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया 1945 के बाद बनी पुरानी व्यवस्था को पीछे छोड़कर एक बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) की ओर बढ़ रही है। आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्संतुलन की यह प्रक्रिया स्वाभाविक है, हालांकि इसमें कई उथल-पुथल और कठिनाइयां आ रही हैं।उन्होंने कहा कि एक लोकतांत्रिक और विविधतापूर्ण दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, व्यापक परामर्श और सभी देशों की भागीदारी जरूरी है। दुनिया के बड़े हिस्से को वैश्विक निर्णयों से बाहर रखकर शांति नहीं बनाई जा सकती। इसीलिए 'सुधारित बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की मांग अब और अधिक मजबूत हो गई है।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के एक दशक के कार्यकाल और 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के प्रति उनके समर्थन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने महासभा में आए सभी प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि वे शांति को केवल एक समझौते या बातचीत के रूप में न देखें, बल्कि इसे एक दृष्टिकोण और विश्वास के रूप में अपनाएं।
संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर लगे महात्मा गांधी के कथन को याद करते हुए डॉ. एस जयशंकर ने अपने संबोधन का समापन किया— "शांति का कोई रास्ता नहीं है, शांति ही रास्ता है।"
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