न्यूयॉर्क में 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान भारत का कूटनीतिक दबदबा

विश्व कूटनीति के सबसे बड़े मंच न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र का हाई-लेवल वीक जारी है। इस वैश्विक महाकुंभ में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने एक के बाद एक कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय और बहुपक्षीय उच्च स्तरीय बैठकें की हैं। विदेश मंत्री ने विसेग्राद समूह यानी V4 देशों (स्लोवाकिया, चेक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड), यूरोपीय संघ (EU) के प्रमुख नेताओं और प्रशांत महासागरीय देश नौरू के राष्ट्रपति डेविड अडीआंग से मुलाकात कर वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख को एक बार फिर साबित कर दिया है। इन बैठकों के जरिए भारत ने वैश्विक शांति, क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

UNGA 81 में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कूटनीतिक दबदबा: V4 देशों ने की UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की पुरजोर वकालत

V4 समूह ने किया बड़ा ऐलान: UNSC में भारत को स्थायी सीट देने का पुरजोर समर्थन

पहली 'V4 + India' विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मध्य यूरोपीय देशों के संगठन विसेग्राद समूह (V4) की तरफ से भारत के लिए बहुत बड़ा कूटनीतिक समर्थन सामने आया है। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार (Juraj Blanár) ने V4 समूह की ओर से संयुक्त बयान देते हुए कहा, "हम सभी V4 देश इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख हिस्से और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मेज पर एक स्थायी सदस्य के रूप में होना ही चाहिए।" V4 देशों (स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य) का यह समर्थन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधारों और भारत की स्थायी दावेदारी के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

नौरू के राष्ट्रपति डेविड अडीआंग से मुलाकात: प्रशांत महासागर में विकास साझेदारी पर जोर

संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से इतर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने प्रशांत द्वीपीय राष्ट्र नौरू के राष्ट्रपति डेविड अडीआंग के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंधों की सराहना की गई। डॉ. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत प्रशांत महासागरीय देशों के विकास में एक विश्वसनीय और मजबूत साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस वार्ता से प्रशांत क्षेत्र में भारत की 'एक्ट ईस्ट' और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ सहयोग की नीति को नई मजबूती मिली है।

यूरोपीय संघ के नेताओं संग महामंथन: रणनीतिक और बहुपक्षीय सहयोग पर सहमति

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यूरोपीय संघ के अपने समकक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व बहुपक्षीय वार्ता की। बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच आर्थिक, तकनीकी और रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने और बहुपक्षीय व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए आपसी सहयोग को अनिवार्य बताया। भारत और यूरोप के बीच गहराते ये रणनीतिक रिश्ते आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित हो सकते हैं।

यूक्रेन, खाड़ी क्षेत्र और इंडो-पैसिफिक के संवेदनशील मुद्दों पर गहरा मंथन

यूरोपीय संघ और V4 नेताओं के साथ हुई बैठकों में वर्तमान समय की सबसे जटिल और संवेदनशील भू-राजनीतिक चुनौतियों पर खुलकर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के दौरान यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष और उसके वैश्विक आर्थिक व खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहे असर पर चर्चा हुई। इसके साथ ही खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में बने तनावपूर्ण हालात और मध्य पूर्व में शांति बहाली के उपायों पर भी दोनों पक्षों ने विचार साझा किए। वहीं, इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र में खुले, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री तंत्र को बनाए रखने पर भी सहमति बनी, जो भारत और यूरोपीय देशों के रणनीतिक हितों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

UNGA के मंच से भारत का मजबूत संदेश और ग्लोबल साउथ का नेतृत्व

81वें UNGA सत्र में डॉ. एस. जयशंकर की ये ताबड़तोड़ बैठकें दर्शाती हैं कि आज की दुनिया में जटिल वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए भारत की भूमिका कितनी अपरिहार्य हो चुकी है। एक तरफ जहां मध्य यूरोप के V4 देश भारत को विश्व पटल पर सुपरपावर मानकर UNSC में स्थायी सीट की वकालत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत यूरोपीय संघ के साथ सुरक्षा पर तालमेल बढ़ा रहा है और नौरू जैसे छोटे द्वीपीय देशों की आवाज बनकर उनके सतत विकास में मदद कर रहा है। न्यूयॉर्क में जयशंकर का यह बहुपक्षीय कूटनीतिक एजेंडा भारत को विश्वमित्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की साख को और मजबूत कर रहा है।

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