अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 81) की बड़ी बैठक चल रही है। इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के 'ग्लोबल साउथ' देशों की एक खास और बड़ी बैठक की अध्यक्षता की।

सरल शब्दों में कहें तो 'ग्लोबल साउथ' उन देशों को कहा जाता है जो विकासशील हैं या अभी तरक्की कर रहे हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादातर गरीब व मध्यम वर्ग वाले देश शामिल हैं। भारत काफी समय से इन सभी देशों की आवाज बनकर दुनिया के बड़े मंचों पर उनकी समस्याओं को उठा रहा है। इस बैठक में जयशंकर ने यह समझने और समझाने की कोशिश की कि इस समय पूरी दुनिया में जो उथल-पुथल मची हुई है, उसका सबसे बुरा असर इन विकासशील देशों पर कैसे पड़ रहा है और इससे मिलकर कैसे निपटा जाए।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को आपस में व्यापार, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी मदद खुद करनी होगी। अगर हम सब एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठाएंगे, तो दुनिया की बड़ी ताकतों को हमारी बात माननी ही पड़ेगी।अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 81) की बड़ी बैठक चल रही है। इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दुनिया के 'ग्लोबल साउथ' देशों की एक खास और बड़ी बैठक की अध्यक्षता की।
सरल शब्दों में कहें तो 'ग्लोबल साउथ' उन देशों को कहा जाता है जो विकासशील हैं या अभी तरक्की कर रहे हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादातर गरीब व मध्यम वर्ग वाले देश शामिल हैं। भारत काफी समय से इन सभी देशों की आवाज बनकर दुनिया के बड़े मंचों पर उनकी समस्याओं को उठा रहा है। इस बैठक में जयशंकर ने यह समझने और समझाने की कोशिश की कि इस समय पूरी दुनिया में जो उथल-पुथल मची हुई है, उसका सबसे बुरा असर इन विकासशील देशों पर कैसे पड़ रहा है और इससे मिलकर कैसे निपटा जाए।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को आपस में व्यापार, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी मदद खुद करनी होगी। अगर हम सब एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठाएंगे, तो दुनिया की बड़ी ताकतों को हमारी बात माननी ही पड़ेगी।

सरल शब्दों में कहें तो 'ग्लोबल साउथ' उन देशों को कहा जाता है जो विकासशील हैं या अभी तरक्की कर रहे हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादातर गरीब व मध्यम वर्ग वाले देश शामिल हैं। भारत काफी समय से इन सभी देशों की आवाज बनकर दुनिया के बड़े मंचों पर उनकी समस्याओं को उठा रहा है। इस बैठक में जयशंकर ने यह समझने और समझाने की कोशिश की कि इस समय पूरी दुनिया में जो उथल-पुथल मची हुई है, उसका सबसे बुरा असर इन विकासशील देशों पर कैसे पड़ रहा है और इससे मिलकर कैसे निपटा जाए।
आज पूरी दुनिया किन बड़ी समस्याओं से जूझ रही है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के मौजूदा हालात का पूरा लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने बताया कि इस समय पूरी दुनिया एक साथ कई बड़े संकटों से गुज़र रही है:- लड़ाई-झगड़े और तनाव: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और तनाव बढ़ रहे हैं, जिससे शांति खत्म हो रही है।
- सामान की आवाजाही में रुकावट: युद्धों के कारण समुद्री रास्ते और व्यापार बंद हो रहे हैं, जिससे चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं।
- कर्ज और पैसों की तंगी: गरीब और विकासशील देशों को अपनी तरक्की के लिए जरूरी पैसे या लोन नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
- मौसम का बदलाव (जलवायु परिवर्तन): सूखा, अचानक बाढ़ और मौसम के बिगड़ने से खेती और लोगों के जीवन पर भारी असर पड़ रहा है।
- बड़ी संस्थाओं की नाकामी: संयुक्त राष्ट्र जैसी पुरानी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आज की समस्याओं को सुलझाने में नाकाम साबित हो रही हैं।
जयशंकर ने बताईं ग्लोबल साउथ के लिए 7 सबसे जरूरी बातें
इन सभी संकटों से गरीब और तरक्की पसंद देशों को बचाने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 रास्ते सुझाए हैं, जिन पर सभी देशों को मिलकर काम करना होगा:- व्यापार और सामान की सप्लाई पर रोक न लगे: जब भी दुनिया में कोई तनाव हो, तो व्यापार, पैसों के लेन-देन या सामान के आने-जाने के रास्तों को जबरदस्ती नहीं रोका जाना चाहिए।
- तेल और ऊर्जा के दामों में चालाकी न हो: पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता और उनकी कीमतों के साथ कोई खेल न खेला जाए, ताकि गरीब देशों की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा न पहुंचे।
- खाने-पीने की चीजें और खाद आसानी से मिले: दुनिया में हर इंसान को खाना मिले। इसके लिए अनाज और खेतों में इस्तेमाल होने वाली खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई कभी बंद नहीं होनी चाहिए।
- सबको व्यापार का सही और बराबर मौका मिले: बड़ी और ताकतवर कंपनियां या देश छोटे देशों के व्यापार को न दबाएं। हर देश को अपनी फैक्ट्रियां लगाने और सामान बनाने का पूरा हक मिलना चाहिए।
- समुद्र में जहाजों की सुरक्षा बनी रहे: समुद्र के रास्ते से ही दुनिया का ज्यादातर व्यापार होता है। इसलिए जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा बहुत जरूरी है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बंटवारा न हो: नई टेक्नोलॉजी और AI का फायदा हर देश को मिलना चाहिए, ऐसा न हो कि ताकतवर देश टेक्नोलॉजी के दम पर अमीर होते जाएं और बाकी देश और पीछे छूट जाएं।
- फैसले लेने वाली जगहों पर बराबरी का दर्जा मिले: जब भी दुनिया के बड़े मंचों पर कोई फैसला लिया जाए, तो उसमें विकासशील देशों की राय भी जरूर ली जाए, क्योंकि इन फैसलों का सीधा असर उन्हीं पर पड़ता है।
पुरानी व्यवस्था को बदलने की जरूरत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया को अब 'सुधारवादी बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) की जरूरत है। इसका मतलब यह है कि दुनिया को चलाने के लिए बनाए गए पुराने नियम और संस्थाएं (जैसे संयुक्त राष्ट्र) अब पुराने हो चुके हैं। इनमें तुरंत सुधार करने की जरूरत है ताकि हर देश को बराबरी का सम्मान और हक मिल सके।Pleased to chair the High Level Meeting of Like-Minded Global South Countries and Friends #UNGA81.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 22, 2026
Assessed a global picture marked by rising conflicts and geopolitical tensions; mounting pressure on supply chains and trade; fragmenting investment flows; growing debt… pic.twitter.com/2aC0KSshqu
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को आपस में व्यापार, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी मदद खुद करनी होगी। अगर हम सब एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठाएंगे, तो दुनिया की बड़ी ताकतों को हमारी बात माननी ही पड़ेगी।अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 81) की बड़ी बैठक चल रही है। इसी दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दुनिया के 'ग्लोबल साउथ' देशों की एक खास और बड़ी बैठक की अध्यक्षता की।
सरल शब्दों में कहें तो 'ग्लोबल साउथ' उन देशों को कहा जाता है जो विकासशील हैं या अभी तरक्की कर रहे हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के ज्यादातर गरीब व मध्यम वर्ग वाले देश शामिल हैं। भारत काफी समय से इन सभी देशों की आवाज बनकर दुनिया के बड़े मंचों पर उनकी समस्याओं को उठा रहा है। इस बैठक में जयशंकर ने यह समझने और समझाने की कोशिश की कि इस समय पूरी दुनिया में जो उथल-पुथल मची हुई है, उसका सबसे बुरा असर इन विकासशील देशों पर कैसे पड़ रहा है और इससे मिलकर कैसे निपटा जाए।
आज पूरी दुनिया किन बड़ी समस्याओं से जूझ रही है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के मौजूदा हालात का पूरा लेखा-जोखा पेश किया। उन्होंने बताया कि इस समय पूरी दुनिया एक साथ कई बड़े संकटों से गुज़र रही है:- लड़ाई-झगड़े और तनाव: दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध और तनाव बढ़ रहे हैं, जिससे शांति खत्म हो रही है।
- सामान की आवाजाही में रुकावट: युद्धों के कारण समुद्री रास्ते और व्यापार बंद हो रहे हैं, जिससे चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं।
- कर्ज और पैसों की तंगी: गरीब और विकासशील देशों को अपनी तरक्की के लिए जरूरी पैसे या लोन नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
- मौसम का बदलाव (जलवायु परिवर्तन): सूखा, अचानक बाढ़ और मौसम के बिगड़ने से खेती और लोगों के जीवन पर भारी असर पड़ रहा है।
- बड़ी संस्थाओं की नाकामी: संयुक्त राष्ट्र जैसी पुरानी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं आज की समस्याओं को सुलझाने में नाकाम साबित हो रही हैं।
जयशंकर ने बताईं ग्लोबल साउथ के लिए 7 सबसे जरूरी बातें
इन सभी संकटों से गरीब और तरक्की पसंद देशों को बचाने के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 7 रास्ते सुझाए हैं, जिन पर सभी देशों को मिलकर काम करना होगा:- व्यापार और सामान की सप्लाई पर रोक न लगे: जब भी दुनिया में कोई तनाव हो, तो व्यापार, पैसों के लेन-देन या सामान के आने-जाने के रास्तों को जबरदस्ती नहीं रोका जाना चाहिए।
- तेल और ऊर्जा के दामों में चालाकी न हो: पेट्रोल, डीजल और गैस की उपलब्धता और उनकी कीमतों के साथ कोई खेल न खेला जाए, ताकि गरीब देशों की ऊर्जा सुरक्षा को खतरा न पहुंचे।
- खाने-पीने की चीजें और खाद आसानी से मिले: दुनिया में हर इंसान को खाना मिले। इसके लिए अनाज और खेतों में इस्तेमाल होने वाली खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई कभी बंद नहीं होनी चाहिए।
- सबको व्यापार का सही और बराबर मौका मिले: बड़ी और ताकतवर कंपनियां या देश छोटे देशों के व्यापार को न दबाएं। हर देश को अपनी फैक्ट्रियां लगाने और सामान बनाने का पूरा हक मिलना चाहिए।
- समुद्र में जहाजों की सुरक्षा बनी रहे: समुद्र के रास्ते से ही दुनिया का ज्यादातर व्यापार होता है। इसलिए जहाजों और उन पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा बहुत जरूरी है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बंटवारा न हो: नई टेक्नोलॉजी और AI का फायदा हर देश को मिलना चाहिए, ऐसा न हो कि ताकतवर देश टेक्नोलॉजी के दम पर अमीर होते जाएं और बाकी देश और पीछे छूट जाएं।
- फैसले लेने वाली जगहों पर बराबरी का दर्जा मिले: जब भी दुनिया के बड़े मंचों पर कोई फैसला लिया जाए, तो उसमें विकासशील देशों की राय भी जरूर ली जाए, क्योंकि इन फैसलों का सीधा असर उन्हीं पर पड़ता है।
पुरानी व्यवस्था को बदलने की जरूरत
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया को अब 'सुधारवादी बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) की जरूरत है। इसका मतलब यह है कि दुनिया को चलाने के लिए बनाए गए पुराने नियम और संस्थाएं (जैसे संयुक्त राष्ट्र) अब पुराने हो चुके हैं। इनमें तुरंत सुधार करने की जरूरत है ताकि हर देश को बराबरी का सम्मान और हक मिल सके।उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को आपस में व्यापार, टेक्नोलॉजी और पर्यावरण के क्षेत्र में अपनी मदद खुद करनी होगी। अगर हम सब एक साथ मिलकर अपनी आवाज उठाएंगे, तो दुनिया की बड़ी ताकतों को हमारी बात माननी ही पड़ेगी।
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