मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क मैदान में आगामी 2 अक्टूबर को होने वाले राजनीतिक और सामाजिक हलचल वाले प्रदर्शन को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मुंबई पुलिस ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन को अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है। शिवाजी पार्क पुलिस थाने द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से आयोजकों को इस फैसले की सूचना दी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज हो रही थी।



आयोजकों ने 26 सितंबर 2026 को एक पत्र सौंपकर 2 अक्टूबर 2026 की दोपहर 3 बजे से रात 9 बजे तक शिवाजी पार्क मैदान में चुनाव आयोग के विरोध में एक बड़े आंदोलन के आयोजन की मांग की थी। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने मौजूदा कानूनों और कोर्ट के पुराने निर्देशों का हवाला देते हुए इस अर्जी को खारिज कर दिया है।
बॉम्बे हाई कोर्ट का पुराना आदेश बना मुख्य आधार
पुलिस द्वारा जारी पत्र में सबसे प्रमुख कारण बॉम्बे हाई कोर्ट के एक पुराने आदेश को बताया गया है। वेलकम ट्रस्ट एवं अन्य बनाम महाराष्ट्र सरकार से जुड़ी जनहित याचिका (संख्या 116/2009) पर फैसला सुनाते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने 4 जनवरी 2013 को यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि शिवाजी पार्क मैदान का उपयोग खेल गतिविधियों के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य के लिए नहीं किया जा सकता।
इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय (BMC 2515/प्र.क्र.1270/नवि-21) दिनांक 20 जनवरी 2016 के तहत भी इस मैदान के इस्तेमाल के लिए सख्त नियम तय किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन कानूनी बंदिशों के चलते पुलिस विभाग के पास सार्वजनिक सभाओं या राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के लिए इस मैदान के उपयोग की मंजूरी देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
इसके अलावा, दादर का शिवाजी पार्क क्षेत्र एक घोषित शांति क्षेत्र (साइलेंस जोन) है और चारों तरफ से घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों से घिरा हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस प्रकार के बड़े आंदोलन से भारी ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होने की पूरी संभावना है, जो स्थानीय निवासियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
शिवाजी पार्क के आसपास कई बड़े और महत्वपूर्ण अस्पताल स्थित हैं, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज और एम्बुलेंस आती-जाती हैं। ट्रैफिक जाम की स्थिति में एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इन्हीं तमाम सार्वजनिक सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने 2 अक्टूबर के इस आंदोलन को शिवाजी पार्क में आयोजित करने की इजाजत देने से इनकार किया है।
बीएमसी की अनुमति न होना और साइलेंस जोन के नियम
स्वीकृति न मिलने का एक और बड़ा कारण बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) से अनुमति पत्र का न होना है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, शिवाजी पार्क में किसी भी सार्वजनिक आयोजन से पहले बीएमसी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है। आवेदक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज में बीएमसी का एनओसी पत्र संलग्न नहीं था।इसके अलावा, दादर का शिवाजी पार्क क्षेत्र एक घोषित शांति क्षेत्र (साइलेंस जोन) है और चारों तरफ से घनी आबादी वाले आवासीय इलाकों से घिरा हुआ है। पुलिस का मानना है कि इस प्रकार के बड़े आंदोलन से भारी ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होने की पूरी संभावना है, जो स्थानीय निवासियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
ट्रैफिक जाम और आपातकालीन सेवाओं पर असर की आशंका
सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी पुलिस ने इस प्रस्तावित प्रदर्शन को जोखिम भरा माना है। दादर और आसपास के इलाकों में रोजाना भारी वाहनों का आवागमन रहता है। यदि शिवाजी पार्क जैसे मध्यवर्ती स्थान पर बड़ा जमावड़ा होता है, तो पूरा मध्य मुंबई भीषण ट्रैफिक जाम की चपेट में आ सकता है।शिवाजी पार्क के आसपास कई बड़े और महत्वपूर्ण अस्पताल स्थित हैं, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज और एम्बुलेंस आती-जाती हैं। ट्रैफिक जाम की स्थिति में एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो सकती है, जिससे मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। इन्हीं तमाम सार्वजनिक सुरक्षा पहलुओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन ने 2 अक्टूबर के इस आंदोलन को शिवाजी पार्क में आयोजित करने की इजाजत देने से इनकार किया है।
पुलिस ने दी अन्य स्थान पर आवेदन की सलाह
शिवाजी पार्क में अनुमति खारिज करने के साथ ही मुंबई पुलिस ने आयोजकों को एक वैकल्पिक राह भी दिखाई है। पुलिस ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यदि आयोजक शिवाजी पार्क के अलावा मुंबई शहर में किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर आंदोलन आयोजित करना चाहते हैं, तो वे संबंधित स्थानीय पुलिस स्टेशन या पुलिस मुख्यालय में नया आवेदन जमा कर सकते हैं। नया आवेदन प्राप्त होने पर सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार उस पर विचार करेंगे।
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